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एसडीएम के बेदखली आदेश के बावजूद नहीं हट सका कब्जा, पीडब्ल्यूडी भूमि पर आवास स्वीकृति को लेकर भी सवाल

एसडीएम के बेदखली आदेश के बावजूद नहीं हट सका कब्जा, पीडब्ल्यूडी भूमि पर आवास स्वीकृति को लेकर भी सवाल kshititech

कलेक्टर को लगाया न्याय की गुहार
सीमांकन में सड़क भूमि पर कब्जे के संकेत, राजस्व रिकॉर्ड और चालू नक्शे में मिली विसंगतियाँ

सक्ती-/बिर्रा-  एसडीएम न्यायालय चांपा द्वारा पारित बेदखली आदेश के लगभग दो वर्ष बाद भी कथित अतिक्रमण नहीं हटाए जाने का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मामले में आवेदक बनवारी लाल कश्यप निवासी बिर्रा ने कलेक्टर जांजगीर-चांपा को आवेदन सौंपकर न्यायालयीन आदेश का पालन कराने की मांग किया है।
वहीं हालिया जांच में सामने आए तथ्यों ने राजस्व रिकॉर्ड, सीमांकन और सरकारी भूमि पर निर्माण संबंधी कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) चांपा ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 202501061300039/अ-10/2024-25 में 13 दिसंबर 2024 को आदेश पारित करते हुए अनावेदिका गीता बाई वैष्णव को खसरा नंबर 2098/12 में पट्टे से प्राप्त 0.02 एकड़ भूमि को छोड़कर शेष अतिरिक्त भूमि से बेदखल करने के निर्देश दिए थे। आदेश के पालन की जिम्मेदारी तहसील प्रशासन को सौंपी गई थी।

मौका जांच में सामने आई विसंगतियां


तहसीलदार के निर्देश पर 9 सितंबर 2026 को राजस्व निरीक्षक एवं पटवारी द्वारा मौके का निरीक्षण कर संयुक्त पंचनामा तैयार किया गया। जांच के दौरान पाया गया कि चालू नक्शे में खसरा नंबर 2098 केवल दो भागों 2098/1 एवं 2098/2 के रूप में दर्शाया गया है, जबकि वर्तमान राजस्व अभिलेखों में यह खसरा 14 बटांकों में विभक्त दर्ज है। नक्शे और अभिलेखों के बीच इस अंतर ने पूरे मामले को और जटिल बना दिया है।

पीडब्ल्यूडी की सड़क भूमि तक पहुंचा कब्जा
जांच के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित भूमि के पूर्व दिशा में स्थित लोक निर्माण विभाग (PWD) की सड़क भूमि खसरा नंबर 2207 की निर्धारित चौड़ाई के अनुसार सीमांकन करने पर वर्तमान कब्जा सड़क भूमि के हिस्से तक पाया गया। पंचनामा में दर्ज तथ्यों के अनुसार कब्जे की स्थिति केवल निजी भूमि तक सीमित नहीं बल्कि सरकारी सड़क भूमि को भी प्रभावित करती हुई दिखाई दी।

सड़क भूमि के भीतर आवास स्वीकृति पर उठे सवाल
कलेक्टर को दिए गए आवेदन में आवेदक ने आरोप लगाया है कि जिस भूमि को राजस्व अमले ने मौके पर PWD की भूमि और सड़क क्षेत्र में स्थित बताया है, उसी भूमि पर आवास भी स्वीकृत कर दिया गया तथा निर्माण कार्य किया गया। यदि जांच में यह तथ्य सही पाया जाता है तो यह मामला केवल बेदखली आदेश के पालन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सरकारी भूमि पर आवास स्वीकृति और निर्माण की प्रक्रिया पर भी प्रश्नचिह्न खड़े करेगा।
आदेश के पालन की मांग करते हुए बम्हनीडीह तहसील के अंतर्गत ग्राम पंचायत बिर्रा के आवेदक बनवारी लाल कश्यप ने अपने आवेदन में बताया है कि न्यायालय द्वारा बेदखली आदेश पारित किए जाने के बाद भी आज तक उसका पालन नहीं कराया गया है। आवेदक का कहना है कि मौके की जांच में तथ्य सामने आने के बावजूद कार्रवाई लंबित है, जिससे उसे लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

सबसे बड़ा सवाल
जब एसडीएम न्यायालय का बेदखली आदेश प्रभावी है, राजस्व अमले की जांच में कब्जे और अभिलेखीय विसंगतियां दर्ज हो चुकी हैं तथा सड़क भूमि के भीतर आवास स्वीकृति का मुद्दा भी सामने आया है, तो फिर जिम्मेदार विभागों द्वारा अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
अब ग्रामीणों और आवेदक की निगाहें जिला प्रशासन पर टिकी हैं। देखना होगा कि प्रशासन न्यायालयीन आदेश का पालन सुनिश्चित करते हुए कथित अतिक्रमण और सरकारी भूमि पर हुए निर्माण के मामले में क्या कार्रवाई करता है।