बंदरों के बढ़ते आतंक से शहरवासी त्रस्त, वन विभाग की निष्क्रियता पर उठे गंभीर सवाल

सक्ती- इन दिनों शहर में बंदरों का आतंक इस कदर बढ़ गया है कि आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो चुका है। बंदरों के झुंड के झुंड घरों की छतों पर कब्जा जमाए हुए हैं और घरों के अंदर घुसकर खाने-पीने का सामान, कपड़े और घरेलू सामान तहस-नहस कर रहे हैं। कई मामलों में बंदरों द्वारा लोगों पर हमला करने और काटने की घटनाएं भी सामने आ चुकी हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों का घरों से बाहर निकलना तक दूभर हो गया है।
प्रशासन और वन विभाग की घोर लापरवाही स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि इस विकट समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को लिखित एवं मौखिक शिकायतें दी जा चुकी हैं, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। वन विभाग की इस उदासीनता और गैर-जिम्मेदाराना रवैये के कारण शहरवासियों में भारी रोष व्याप्त है।
लोगों का कहना है कि अधिकारी केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित हैं और धरातल पर कोई प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। यदि समय रहते इस समस्या पर लगाम नहीं कसी गई, तो यह स्थिति किसी बड़ी जनहानि या गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है।
शहरवासियों की प्रमुख मांगें
तुरंत रेस्क्यू अभियान: शहर के सभी प्रभावित वार्डों में विशेष टीमों का गठन कर बंदरों को पकड़ने का अभियान चलाया जाए।
सुरक्षित वनों में स्थानांतरण: पकड़े गए बंदरों को शहर से दूर घने जंगलों या उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ा जाए।
वैकल्पिक व्यवस्था: वन विभाग द्वारा शहर की सीमाओं पर बंदरों के लिए भोजन और पानी की वैकल्पिक व्यवस्था की जाए ताकि वे आवासीय इलाकों का रुख न करें।
चेतावनी: यदि वन विभाग ने जल्द ही इस दिशा में कोई वैकल्पिक और स्थायी व्यवस्था नहीं की, तो शहर की जनता को साथ मिलकर सड़कों पर उतरकर उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और वन विभाग की होगी। इस संबंध में रेंजर गबेल जी से जानकारी लेने के लिए मोबाइल से कॉल करने पर कॉल रिसीव नहीं किया गया।
