बुजुर्ग मां-बाप की सुरक्षा के लिए संतान की हो सकती है बेदखली, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट की ट्रिब्यूनल की शक्ति

सक्ती – बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा, सम्मान और संपत्ति के अधिकारों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 के तहत गठित ट्रिब्यूनल आवश्यकता होने पर वरिष्ठ नागरिक की सुरक्षा एवं संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उसके घर में रह रहे बच्चे या अन्य रिश्तेदार को बेदखल करने का आदेश दे सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने 4 अगस्त 2026 को Ravi Kant Gupta बनाम State of Uttar Pradesh मामले में स्पष्ट किया कि वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण या संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होने पर अधिनियम के तहत गठित ट्रिब्यूनल को बेदखली का आदेश देने की शक्ति है। न्यायालय ने पूर्व में पारित बेदखली आदेशों को बहाल करते हुए कहा कि अधिनियम का उद्देश्य वरिष्ठ नागरिकों को सुरक्षा और गरिमापूर्ण जीवन उपलब्ध कराना है। इसी तरह 12 सितंबर 2025 को Kamalakant Mishra बनाम Additional Collector मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि यदि बच्चा या रिश्तेदार वरिष्ठ नागरिक के भरण-पोषण संबंधी वैधानिक दायित्व का पालन नहीं करता है, तो ट्रिब्यूनल उसे वरिष्ठ नागरिक की संपत्ति से बेदखल करने का आदेश दे सकता है।
संपत्ति पर जबरन कब्जे के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई संभव
राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि भारतीय सामाजिक व्यवस्था में माता-पिता के सम्मान और संरक्षण की परंपरा रही है। वर्तमान समय में यदि कोई संतान बुजुर्ग माता-पिता की संपत्ति पर जबरन कब्जा करती है अथवा उन्हें उनके ही घर से वंचित करती है, तो परिस्थितियों के अनुसार उपलब्ध आपराधिक और सिविल कानूनी उपायों का सहारा लिया जा सकता है। उन्होंने बताया कि जबरन घर में प्रवेश, संपत्ति पर अनधिकृत कब्जा, धमकी अथवा प्रताड़ना जैसी परिस्थितियों में संबंधित तथ्यों के आधार पर पुलिस में शिकायत अथवा प्राथमिकी दर्ज कराई जा सकती है। वहीं, यदि धोखे, दबाव या जालसाजी के माध्यम से संपत्ति का हस्तांतरण कराया गया है, तो उसके विरुद्ध भी कानून के अनुसार कार्रवाई का रास्ता खुला रहता है।
सीनियर सिटीजन एक्ट में ट्रिब्यूनल की महत्वपूर्ण भूमिका
अधिवक्ता पटेल ने बताया कि Maintenance and Welfare of Parents and Senior Citizens Act, 2007 वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और संरक्षण के लिए विशेष व्यवस्था करता है। अधिनियम के तहत ट्रिब्यूनल गठित किए जाते हैं और उन्हें प्रभावी राहत देने की शक्तियां प्रदान की गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने Ravi Kant Gupta मामले में भी माना कि संरक्षण और भरण-पोषण सुनिश्चित करने के लिए बेदखली का आदेश ट्रिब्यूनल की प्रभावी राहत का हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि 60 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिक, यदि बच्चों या रिश्तेदारों द्वारा उपेक्षा, प्रताड़ना अथवा संपत्ति से संबंधित विवाद के कारण असुरक्षित महसूस कर रहे हों, तो अधिनियम के तहत उपलब्ध वैधानिक उपायों का उपयोग कर सकते हैं। परिस्थितियों के अनुसार पुलिस, संबंधित ट्रिब्यूनल तथा अन्य सक्षम न्यायिक मंचों का सहारा लिया जा सकता है।
कानून अंतिम उपाय बने, सामाजिक संस्कार मजबूत हों
अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि बुजुर्ग माता-पिता की सुरक्षा केवल कानूनी विषय नहीं बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि माता-पिता के सम्मान, संरक्षण और देखभाल के लिए परिवार एवं समाज में जागरूकता बढ़ाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि “कानून का प्रयोग सभ्य समाज के लिए अंतिम अस्त्र होना चाहिए, लेकिन जब बुजुर्ग माता-पिता के सम्मान, सुरक्षा और अधिकारों का उल्लंघन हो, तब उन्हें प्रभावी कानूनी संरक्षण मिलना भी उतना ही आवश्यक है।”
