सक्ती

सक्ती के सरस्वती शिशु मंदिर में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 25 सितंबर को हुआ पूर्ण गायन का आयोजन

विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान के निर्देश पर आचार्य राजेंद्र महाराज के नेतृत्व में आयोजित था कार्यक्रम

सक्ती के सरस्वती शिशु मंदिर में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 25 सितंबर को हुआ पूर्ण गायन का आयोजन kshititech
सक्ती के सरस्वती शिशु मंदिर में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 25 सितंबर को हुआ पूर्ण गायन का आयोजन kshititech
सक्ती के सरस्वती शिशु मंदिर में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने पर 25 सितंबर को हुआ पूर्ण गायन का आयोजन kshititech

सक्ती – विद्या भारती अखिल भारतीय शिक्षा संस्थान द्वारा संपूर्ण भारत देश में संचालित सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालयों में एक तिथि एक समय और एक ही स्वर में सामूहिक वंदे मातरम गायन का आयोजन रखा गया  इस गौरवशाली और महत्वपूर्ण कार्यक्रम का शुभारंभ जांजगीर लोकसभा क्षेत्र के सांसद कमलेश जांगड़े द्वारा दीपप्रज्वलन एवं भारत माता की पूजा अर्चना के साथ किया गया। विद्या भारती द्वारा निर्धारित समय अनुसार ठीक 11: बजे , वंदे मातरम गायन प्रारंभ हुआ जो 3 मिनट 13 सेकंड में संपूर्ण गायन पूर्ण हुआ। इस गौरवशाली अवसर पर एडिशनल एसपी पंकज पटेल साक्षी के रूप में उपस्थित थे। सहायक जिला शिक्षा अधिकारी और राकेश अग्रवाल , विद्यालय समिति के अध्यक्ष राम अवतार अग्रवाल मंचस्थ थे। सामूहिक वंदे मातरम पूर्ण गायन के जिला प्रभारी एवं ग्राम भारती सक्ती जिला के अध्यक्ष आचार्य राजेंद्र महाराज द्वारा वंदे मातरम की रचना एवं वर्तमान परिदृश्य में इस राष्ट्रीय गीत के प्रति नागरिकों की अवधारणा के संबंध में विस्तार से बताया गया कि –1875 में वंदे मातरम की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने किया-उसे समय उन्हें भी यह ज्ञात नहीं रहा होगा की वंदे मातरम की पंक्तियां वर्तमान भारत में दूरदर्शिता के साथ गौरव और एक जय घोष तथा नारे के रूप में स्वीकार्य होगा। मुख्य वक्ता आचार्य राजेंद्र ने बताया कि वंदे मातरम केवल एक गीत , दो शब्द और स्वर ही नहीं है , बल्कि यह भारत माता की स्तुति और वंदना की पंक्ति है वंदे मातरम में भारत भूमि की आंतरिक सुंदरता और इसकी महिमा का बखान किया गया है । स्वतंत्रता प्राप्ति के पूर्व वे सभी देशभक्त और वीर शहीद जो मातृभूमि के लिए अपने प्राणों का न्योकछावर कर दिए  अंग्रेजों ने जिन भारतवासियों को प्रताड़ित किया फांसी पर लटकाए उन सभी के मुख से एक ही नर जय घोष के रूप में निकलते थे — वंदे मातरम विद्या भारती की योजना वंदे मातरम गायन का एक ही उद्देश्य यह की हम अपने विद्यालयों के माध्यम से वर्तमान पीढ़ी को समाज और राष्ट्र के अनुरूप बना सके और उनमें मातृभूमि और अपने राष्ट्र के लिए समर्पण और सम्मान का भाव हो।
     मुख्य अतिथि सांसद श्रीमती कमलेश जांगड़े द्वारा विद्या भारती की योजना को अत्यंत महत्वपूर्ण तथा राष्ट्र निर्माण में अग्रणी शैक्षणिक संस्थान बताते हुए प्रशंसा के साथ सभी के लिए मंगल कामनाकी गई ।
विद्यालय समिति के अध्यक्ष राम अवतार अग्रवाल द्वारा सरस्वती शिशु मंदिर में संस्कार के साथ शिक्षा और भावी पीढ़ी का निर्माण हेतु आग्रह करते हुए धन्यवाद व्यापित किया गया। इस अवसर पर एडिशनल एसपी पंकज पटेल ने कहा कि यह मेरे लिए बड़ा ही गौरव और भाव विभोर हो जाने जैसा है क्योंकि मैं स्वयं सरस्वती शिशु मंदिर का छात्र रहा हूं और मुझे गर्व है कि इस संस्था से अध्ययन कर मुझे देश की सेवा करने का शुभ अवसर मिला है। सामूहिक वंदे मातरम गायन में 247 छात्र-छात्राओं एवं नागरिकों की संख्या पंजीकृत की गई और इस अवसर पर लगभग 200 नागरिक एवं मातृ शक्तियों दर्शक दीर्घा में उपस्थित होकर वंदे मातरम का गायन के प्रत्यक्षदर्शी रहे । आयोजन में भाजपा जिला अध्यक्ष टिकेश्वर गबेल, रमेश अग्रवाल, दीपक कुमार गुप्ता , भगत राम साहू, श्रीमती अनीता सिंह, अन्नपूर्णा राठौर, गौरी शंकर राठौड़, पंचूराम पटेल एवं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारी सहित गायत्री शक्तिपीठ एवं अन्य संगठन के लोग सहभागी हुए । व्यवस्थापक मांगेराम अग्रवाल द्वारा आभार ज्ञापन किया गया।
    आयोजन को संपन्न करने में विद्यालय के प्राचार्य पूरन गिरि गोस्वामी , प्रधानाचार्य बलदाऊ साहू , विभाग समन्वयक मनहरण राठौर एवं विद्यालय परिवार का महत्वपूर्ण योगदान रहा ।