सक्ती मुक्तिधाम में बिखरेगी श्रद्धा की रोशनी: ‘एक दिया पितरों के नाम’ अभियान के तहत होगा भव्य दीप प्रज्वलन

भारतीय संस्कृति व परंपराओं के संरक्षण की दिशा में श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार की अनुपम पहल
सक्ती– भारतीय संस्कृति और परंपरा आज भी विश्व में सर्वश्रेष्ठ मानी जाती है, जहाँ जीवित ही नहीं बल्कि मृत स्वजनों, जीव-जंतुओं, प्रकृति और जल-थल के सम्मान व पूजन की अटूट परंपरा है। इसी गौरवशाली परंपरा का अनुसरण करते हुए श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार, सक्ती के सौजन्य से रविवार, 8 नवंबर को सक्ती मुक्तिधाम में एक भव्य और सामूहिक दीप प्रज्वलन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। ‘एक दिया पितरों के नाम’ अभियान के तहत होने वाले इस आयोजन में नगरवासी अपने स्वर्गवासी स्मृतिशेष स्वजनों की याद में दीप जलाकर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करेंगे। इस कार्यक्रम के संबंध में विस्तृत जानकारी देते हुए संरक्षक एवं हिंदू जागरण मंच के जिला प्रमुख, हाई कोर्ट एडवोकेट चितरंजय पटेल ने बताया कि सनातन मान्यताओं के अनुसार, कार्तिक अमावस्या के दिन हमारे स्वर्गवासी पितृ (जो पितृ पक्ष के दौरान भू-लोक में आते हैं) तर्पण और पूजन स्वीकार करने के बाद पुनः बैकुंठ धाम लौटते हैं। बैकुंठ के द्वार पर पहुँच कर वे एक पल के लिए भू-लोक पर अपने परिजनों की ओर दृष्टिपात करते हैं। ऐसी मान्यता है कि जब वे अपने परिजनों को एक साथ दीपों की रोशनी में अपना अभिवादन करते देखते हैं, तो उन्हें अपार तृप्ति, सुख और शांति का अनुभव होता है।
इसी पावन मान्यता और श्रेष्ठ संस्कृति के निर्वहन के लिए श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार प्रतिवर्ष दीपावली (कार्तिक अमावस्या) के अवसर पर मुक्तिधाम के संरक्षण के साथ-साथ इस अभियान का आयोजन करता आ रहा है, जो सनातन हिंदू संस्कृति को जीवंत रखने की दिशा में एक अनुपम पहल है।उल्लेखनीय है कि श्री सिद्ध हनुमान मंदिर परिवार सक्ती के मुक्तिधाम को दिन-प्रतिदिन सुंदर और सुव्यवस्थित बनाने के कार्य में निरंतर समर्पित है। इस धार्मिक व सामाजिक सरोकार के कार्य को आगे बढ़ाते हुए मंदिर के पुजारी ओमप्रकाश वैष्णव एवं कोंडके मौर्य ने सक्ती के समस्त प्रबुद्ध नागरिकों और आम जनता से अपील की है कि वे रविवार रात्रि को आयोजित होने वाले इस भव्य दीप प्रज्वलन कार्यक्रम में अधिक से अधिक संख्या में शामिल हों और अपने पितरों के निमित्त दीप जलाकर इस पुनीत अभियान का हिस्सा बनें।
