सक्ती

राष्ट्र धर्म और देश सेवा ही हर नागरिक का परम कर्तव्य: राजकुमार चंद्रा

सक्ती में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का विजयादशमी महोत्सव संपन्न, धूमधाम से हुआ शस्त्र पूजन

कदम से कदम मिलाकर निकले स्वयंसेवक, नगरवासियों ने पुष्पवर्षा कर किया भव्य पथ संचलन का स्वागत

वैश्विक षड्यंत्रों पर बेबाक बोल— भारत में कभी सफल नहीं होंगे ‘रिज्यूम चेंज’ के कुप्रयास

राष्ट्र धर्म और देश सेवा ही हर नागरिक का परम कर्तव्य: राजकुमार चंद्रा kshititech
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राष्ट्र धर्म और देश सेवा ही हर नागरिक का परम कर्तव्य: राजकुमार चंद्रा kshititech
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सक्ती –  राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) सक्ती खण्ड द्वारा विजयादशमी महोत्सव एवं भव्य पथ संचलन कार्यक्रम का आयोजन गौरवशाली परंपरा के साथ अत्यंत गरिमामय माहौल में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में धर्म जागरण प्रांत प्रमुख राजकुमार चंद्रा उपस्थित रहे। उन्होंने स्वयंसेवकों और आम नागरिकों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण और सामाजिक एकता का एक मजबूत संदेश दिया।
शस्त्र पूजन और ध्वज गीत से हुआ शुभारंभ
कार्यक्रम की शुरुआत मुख्य अतिथि राजकुमार चंद्रा एवं आचार्य राजेंद्र शर्मा द्वारा भारत माता के तैलचित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्वलन और विधि-विधान से शस्त्र पूजन के साथ की गई। इसके पश्चात उपस्थित स्वयंसेवकों ने पूर्ण गणवेश में राष्ट्रभक्ति की भावना से ओतप्रोत ध्वज गीत गाकर कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ किया।
आपसी एकता ही देश की ताकत: राजकुमार चंद्रा
स्वयंसेवकों और नागरिकों को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि राजकुमार चंद्रा ने कहा कि राष्ट्र धर्म और देश की निस्वार्थ सेवा करना ही हर नागरिक का सर्वोपरि कर्तव्य है। उन्होंने इतिहास का हवाला देते हुए सचेत किया कि जब भी हम आपस में बंटे हैं, तब-तब देश कमजोर हुआ है। इसलिए पूरे हिंदू समाज को सशक्त और संगठित होकर मातृभूमि की सेवा के लिए सर्वोपरि भाव से कार्य करना होगा। विविधता में एकता ही हमारी असली ताकत है।
वैश्विक परिदृश्य और ‘रिज्यूम चेंज’ पर बेबाक बोल
अपने उद्बोधन में श्री चंद्रा ने वैश्विक परिस्थितियों और फ्रांस सहित अन्य देशों की हालिया घटनाओं का विशेष रूप से जिक्र किया। उन्होंने ‘रिज्यूम चेंज’ (सत्ता परिवर्तन) और अर्थव्यवस्था परिवर्तन के वैश्विक षड्यंत्रों के मुद्दे पर दृढ़ता से कहा कि भारत में ऐसा कुप्रयास न कभी सफल हुआ है और न कभी भविष्य में होगा। भारत की नींव और संस्कृति अत्यंत मजबूत है, जिसे कोई हिला नहीं सकता।
‘पंच परिवर्तन’ और सामाजिक समरसता का आह्वान
श्री चंद्रा ने संघ के ‘पंच परिवर्तन’ के सिद्धांत पर विशेष जोर दिया। उन्होंने उपस्थित जनसमुदाय से स्वदेशी उत्पादों को अपनाने, सामाजिक समरसता बनाए रखने, नशा मुक्ति अभियान चलाने और नई पीढ़ी को अच्छे संस्कार देने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में भारत की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है, इसलिए हमें हमेशा राष्ट्रीय चेतना, अनुशासन और परिवार भाव से जुड़े रहना चाहिए।
अनुशासन के साथ निकला भव्य पथ संचलन, जगह-जगह हुआ स्वागत
शस्त्र पूजन और बौद्धिक सत्र के बाद स्वयंसेवकों द्वारा भव्य पथ संचलन निकाला गया। यह पथ संचलन ग्राम सोठी से शुरू होकर अग्रसेन चौक, हटरी चौक और हॉस्पिटल रोड होते हुए जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय प्रांगण में पहुंचकर संपन्न हुआ। कदम से कदम मिलाते और देशभक्ति के गीतों की धुन पर अनुशासित रूप से चलते स्वयंसेवकों को देखकर नगरवासी अभिभूत नजर आए। मार्ग में जगह-जगह पर नागरिकों द्वारा पुष्पवर्षा कर पथ संचलन का आत्मीय व भव्य स्वागत किया गया।
गरिमामय आयोजन में ये रहे उपस्थित
इस भव्य उत्सव के अवसर पर मुख्य रूप से आचार्य राजेंद्र शर्मा, राम अवतार अग्रवाल, प्रीतम गबेल, लक्ष्मी सोनी, दीपक गुप्ता, गुलाबचंद खेतान, रमेश अग्रवाल, श्रीमती विद्या सिदार, बजरंग आचार्य, चेतन साहू, सुदामा चंद्रा, पुरुषोत्तम खूंटे सहित बड़ी संख्या में संघ के पदाधिकारी, निष्ठावान कार्यकर्ता, स्वयंसेवक और गणमान्य नगरवासी उपस्थित रहे।