अंचल के ख्याति प्राप्त संगीताचार्य ने शास्त्रीय संगीत को रोजगार से जोड़ा


सक्ती /बिर्रा- जनपद पंचायत जैजैपुर के अंतर्गत ग्राम पंचायत गुडरुकला (मल्दा) के निवासी एवं बिर्रा अंचल के ख्याति प्राप्त संगीताचार्य के नाम से मशहूर के आर कश्यप सुप्रसिद्ध है। संगीत के गुरु कहे जाने वाले के आर कश्यप गुरुजी का बचपन से ही संगीत सीखने की ललक ने शासकीय शिक्षक होने के बावजूद भी उनके हुनर को कम होने नहीं दिया। बल्कि उसकी उत्तरोत्तर उसकी वृद्धि होती चली गयीं और उसका परिणाम भी बहुत ही समाज में प्रभावशाली एवं कारगर और सार्थक सिद्ध हुआ है। इस संबंध में बिर्रा अंचल के महान संगीताचार्य और संगीत गुरु कहे जाने वाले के आर कश्यप गुरुजी ने बताया कि संगीत में जन्म लेना एवं संगीत में रहना और संगीत में ही मरना अर्थात स्वर्गवास का होना ही परमधाम में श्री हरि के चरणों में मोक्ष प्राप्ति की परम साधन है। संगीत के माध्यम से ही हम भगवान के महिमा वंदन, प्रार्थना, और प्रभु श्री हरि को याद करना ही हमारा प्रथम कर्तव्य है। इसीलिए बांके बिहारी लीलाधारी भगवान श्री कृष्ण जी ने हमें जन्म दिया है। और आज हम मानव समाज भगवान की महिमा का गुणगान संगीत के माध्यम से जन-जन तक पहुंचा रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि के आर कश्यप ने इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय खैरागढ़ जिला राजनांदगांव से संगीत में एम ए की डिग्री प्राप्त किया । इसके साथ ही अपने सहयोगियों के सहयोग से सरगम संगीत समिति का गठन करके गुरुघासीदास संगीत महाविद्यालय हसौद की स्थापना करके सन 1996 में विधिवत शुभारंभ किया गया था। इनका सहयोगी आर के सोनवानी ,एन आर भारद्वाज , बी पी शुक्ला , बी पी जायसवाल ने मिलकर के आर कश्यप को संगीत महाविद्यालय हसौद के प्राचार्य पद का दायित्व देते हुए अखिल भारती गंधर्व महामण्डल मुंबई से सम्बद्धता ग्रहण किये और मात्र 06 विद्यार्थीयो से संगीत विद्यालय का शुभारंभ किए । जो आज बटवृक्ष बनकर इनके 10 अधीनस्थ विद्यालयों में संचालित होकर लगभग 110 विद्यार्थी संगीत की शिक्षा अल्प शुल्क भुगतान कर ग्रहण कर रहे है। जिनको शास्त्र एवं प्रायोगिक ज्ञान लगभग 13 प्रशिक्षित योग्य शिक्षक सिखा रहे है । इनके विद्यालय से लगभग 25 डिप्लोमा प्राप्त विद्यार्थी आज शासकीय ,गैर शासकीय विद्यालयों में संगीत शिक्षक के रूप में अपनी सेवा दे रहे है। इसके साथ ही अपने पारिवारिक दायित्वों का निर्वहन करते हुए संगीत की सेवा कर रहे हैं। ये सब के आर कश्यप की दूर दृष्टि एवं ललक और मेहनत ,संगीत के प्रति समर्पण का परिणाम है, जो संगीत को जन जन तक पहुंचाते हुए सुलभ बनाया है। जो शास्त्रीय संगीत कभी कुछ लोगों तक ही सीमित थी जो समाज से कोसों दूर था । जिसे कठिन विद्या माना जाता था आज बिलासपुर संभाग एवं रायपुर संभाग में सुलभ एवं लोक प्रिय संगीत बन चुका है । प्रत्येक वर्ष संगीत को गांव गांव तक पहुंचाने के लिए शरद संगीत समारोह का आयोजन जनसहयोग से विगत 29 वर्षों से आयोजित करते आ रहे है। जिसमें खैरागढ़ संगीत विश्वविद्यालय के कलाकारों द्वारा प्रस्तुति तथा राष्ट्रीय स्तर के कलाकारों की प्रस्तुति भी होती है। जिससे संगीत के प्रचार प्रसार में भी सहयोग मिलता है और आज शास्त्रीय संगीत जन जन तक पहुंच रही है, जिसका सेतु का कार्य के आर कश्यप गुरुजी कर रहे हैं ।
