आधुनिक कृषि तकनीक ‘मल्चिंग’ से खीरे की खेती में बढ़ा उत्पादन

किसान गोपाल कृष्ण पटेल ने कमाया 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ
सक्ती- आधुनिक कृषि तकनीकों को अपनाकर किसान अपनी आमदनी में उल्लेखनीय वृद्धि कर रहे हैं। जिला सक्ती के विकासखण्ड डभरा के ग्राम जवाली निवासी कृषक गोपाल कृष्ण पटेल पिता देव कुमार पटेल ने प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक को अपनाकर खीरे की खेती में बेहतर उत्पादन और लाभ अर्जित किया है। पटेल के पास 1 हेक्टेयर भूमि है। वे पूर्व में पारंपरिक तरीके से सब्जियों की खेती करते थे। इस दौरान सिंचाई में अधिक पानी की आवश्यकता, खरपतवार की समस्या, मिट्टी में नमी की कमी तथा अधिक उत्पादन लागत के कारण उन्हें अपेक्षित लाभ नहीं मिल पा रहा था। उद्यानिकी विभाग के तकनीकी अमले द्वारा कृषक को प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक के लाभों तथा एकीकृत बागवानी विकास मिशन योजना के अंतर्गत उपलब्ध मल्चिंग अनुदान की जानकारी दी गई। विभागीय मार्गदर्शन में आधुनिक तकनीक एवं बेहतर फसल प्रबंधन अपनाते हुए उन्होंने खीरे की खेती शुरू की। मल्चिंग तकनीक अपनाने से पहले उन्हें 120 से 150 क्विंटल तक उत्पादन प्राप्त होता था, जो आधुनिक तकनीक अपनाने के बाद बढ़कर 200 से 250 क्विंटल तक पहुंच गया। इससे उन्हें लगभग 5 लाख रुपये की बिक्री प्राप्त हुई। उत्पादन में लगभग 1.75 लाख रुपये की लागत आने के बाद उन्हें 3.25 लाख रुपये का शुद्ध लाभ प्राप्त हुआ। कृषक गोपाल कृष्ण पटेल बताते हैं कि उद्यानिकी विभाग के मार्गदर्शन और आधुनिक तकनीक के उपयोग से उन्हें फसल का बेहतर उत्पादन प्राप्त करने में सफलता मिली है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक खेती की तुलना में आधुनिक तकनीक से सब्जी उत्पादन करने पर उनकी आय में 2 से 3 गुना तक वृद्धि हुई है। कृषक की सफलता से क्षेत्र के अन्य किसान भी प्रेरित हो रहे हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर उद्यानिकी फसलों की खेती की ओर आकर्षित हो रहे हैं। यह सफलता किसानों के लिए तकनीक आधारित खेती, बेहतर उत्पादन और अधिक आय का प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
