जन संवाद @ सशक्त महंत बनाम जन आक्रोश…

आलेख / चितरंजय पटेल – राधाकृष्ण मंदिर सक्ती में आयोजित जन संवाद कार्यक्रम नेता प्रतिपक्ष के गुणगान के साथ संपन्न हुआ।
स्थानीय विधायक एवं छत्तीसगढ़ विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष डा चरणदास महंत ने तथाकथित प्रायोजित जन संवाद के मंच से अपने दल के लोगों के साथ ही सत्ता पक्ष के लोगों का बखूबी विश्वास मत हासिल कर लिया।
शायद! गत विधानसभा सत्र में नेता प्रतिपक्ष के द्वारा पेश अविश्वास प्रस्ताव के दरमियान मत विभाजन की मांग के बजाय सरकार को सलीके से विश्वास मत हासिल करने में विपक्ष के उपकार या अहसान के बदले सत्ता पक्ष के नेताओं ने डा चरण दास महंत की तारीफ के खूब कसीदे गढ़ते हुए कुछ वक्ता उन्हें भावी मुख्यमंत्री के रुप में स्वीकारने लगे तो कुछ भाजपाइयों ने उनसे पीढ़ी दर पीढ़ी पारिवारिक संबंध का वास्ता दिया तो वहीं कुछ ने दबे स्वर से उन्हें अपनी राजनीति का गाड फादर होने की ओर इशारा किया। जन संवाद क्षेत्र की समस्याओं पर जनता के दर्द अथवा क्षेत्र के विकास को लेकर सार्थक संवाद के बजाय डा महंत के गुणगान का प्रायोजित कार्यक्रम प्रतीत हो रहा था, जिसमें भाजपाइयों के मुख से भी नेता प्रतिपक्ष के गुणगान को लेकर जनता जनार्दन ने भीतर ही भीतर आक्रोश व्यक्त किया। क्योंकि सत्ता और विपक्ष की दुरभि संधि स्थापित हो जाए वहां आमजन की आशा और आकांक्षाएं धूल धूसरित होना अवश्यंभावी हैl
विदित हो कि पहले भी क्षेत्रीय लोगों में यह चर्चा आम है कि सक्ती में भाजपा की टिकट नेता प्रतिपक्ष के इशारे पर तय होता रहा है और अब भाजपा संगठन में भी चतुर सुजान महंत जी की सहमति बखूबी मायने रखती है, लेकिन आज इस चर्चा को मीडिया के भरे मंच में भाजपाइयों के समर्थन से भाजपा का जमीनी कार्यकर्ता हतोत्साहित और आक्रोशित नजर आ रहा था।
उस पर जन संवाद में प्रवक्ताओं की सूची भी बकायदा प्रायोजित नजर आ रही थी, क्योंकि किसी ने स्थानीय विधायक के खिलाफ एक शब्द बोलने की हिमाकत नहीं की जिससे मीडिया की भूमिका को लेकर भी लोग असंतोष जाहिर कर रहे थे कि शायद व्यावसायिक लाभ (विज्ञापन) की आड़ में चिह्नित लोग ही वक्ता के रुप में शामिल किए गए जो जनता के तरफदार के बजाय डॉ साहब के प्रवक्ता ज्यादा नजर आ रहे थे। साथ ही मीडिया समूह के द्वारा अचानक स्वतंत्रता दिवस के पूर्व जन संवाद के आयोजन का हितार्थ भी समझ से परे है क्योंकि न अभी कोई निर्वाचन का दौर है और न ही कोई राजनीतिक अथवा कोई महत्वपूर्ण घटना है जिस पर जन संवाद के नाम पर आयोजन का औचित्य साबित हो बल्कि आयोजन के स्वरूप और आमंत्रित अतिथियों के द्वारा डा साहब के गुणगान से आयोजन मिडिया के हितार्थ और नेता प्रतिपक्ष के सशक्तिकरण के निहितार्थ साबित हुआ है, जहां जिले के जनता जनार्दन के हक, हित को लेकर कोई वक्ता आवाज बुलंद करते नजर नहीं आया बल्कि जन संवाद के माध्यम से हमारे यशस्वी विधायक और चतुर सुजान नेता प्रतिपक्ष के सशक्तिकरण की कवायद पूर्णतः सफल रही जहां प्रभारी मंत्री की गरिमामय उपस्थिति भी भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं के मनोबल बढ़ाने में नाकामयाब ही रही।

