सक्ती

रगजा में रथयात्रा के साथ जगन्नाथ प्रभु मंदिर में हुए विराजित

सक्ती- जगन्नाथ पुरी की प्रख्यात रथ द्वितीया पर्व पर भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा अपने रथ (नंदीघोष, तालध्वज और दर्पदलन) पर सवार होकर मुख्य मंदिर से अपने मौसी के घर गुंडिचा मंदिर पहुंचते हैं जहां 9 दिन रहने के बाद आषाढ़ शुक्ल दशमी पर पुनः मुख्य श्री मंदिर वापस पहुंचते है तथा परंपरा अनुसार पुरी में भगवान जगन्नाथ की पारंपरिक रथ यात्रा के समापन चरण में घर वापसी पर पवित्र बहुदा रथयात्रा मनाई गई।
अघरिया समाज द्वारा इसी परंपरा के अनुसरण करते हुए आज ग्राम रजगा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथ यात्रा के पश्चात पुनः जगन्नाथ मंदिर में विराजित किया गया।
विदित हो कि अघरिया समाज के लोग 1922 में रगजा गाँव में आकर बस गये तथा 1929 में भगवान श्री जगन्नाथ मंदिर बनवाया तब से निरंतर हर साल ग्रामवासी रथयात्रा का पर्व मनाते रहे हैं तथा गाजे बाजे एवं नृत्य के साथ भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा की यात्रा निकाली जाती है।
इस संबंध में पुजारी पंडित मिथलेश्वरानंद दुबे ने बताया कि अघरिया समाज द्वारा सन 1929 में निर्मित श्री जगन्नाथ मंदिर का 1982 में जीर्णोद्धार कराया गया तथा हर साल आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया एवं दशमी को रथयात्रा महोत्सव के साथ मड़ई मेला का आयोजन किया जाता है जिसमें सक्ती अंचल लोग बड़ी संख्या में शामिल होते हैं तथा इस क्रम में आज (बिनौधा) चंद्रपुर क्षेत्र के नर्तक दल द्वारा श्रेष्ठ प्रदर्शन और नाच गान के साथ भगवान श्री जगन्नाथ स्वामी मंदिर में विराजित किया गया।
इन पलों में उपस्थित अघरिया समाज के पूर्व महासचिव एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि हमारा समाज आगरा से करीब सन 1600 ईसवी में माइग्रेट होकर जगन्नाथ पुरी के तत्कालीन गजपति राजा मुकुंद देव के आशीर्वाद से उड़ीसा और फिर कालांतर में छत्तीसगढ़ आकर निवास कर रहे हैं जो इष्ट देव के रूप में  आराध्य जगन्नाथ स्वामी को आत्मसात किए हुए हैं तथा हम सब अघरिया समाज के रूप ख्याति प्राप्त कर परंपरानुसार अघरिया आवासित गांवों की तरह रजगा में भी हमारे समाज के लोग अपने ईष्ट भगवान जगन्नाथ के पूजा अर्चना के साथ रथयात्रा की संस्कृति एवं परंपरा को आज भी शिद्दत से जिंदा रखे हुए हैं जिसके लिए ग्राम रगजा के अघरिया बंधुओं के साथ सभी ग्रामवासियों का प्रयास सराहनीय होने के साथ अनुकरणीय है। खासकर, आज जब हमारे लोक कला, संस्कृति तथा परंपरा अपना वजूद खोते जा रहा है तब अघरिया समाज के लोगों के द्वारा सभी ग्रामवासियों के सहयोग से रथ यात्रा की प्रथा एवं कायम रखना एक मिसाल है।
इस आयोजन को सफल बनाने में पुजारी पंडित  मिथिलेश्वरानंद की भूमिका को स्थानीय लोगों ने तारीफ ए काबिल बताते हुए कहा कि जगन्नाथ मंदिर के पुजारी पंडित कथावाचन के साथ ही हर व्यक्ति के सुख-दुख में सक्रिय भूमिका अदा करते हैं जिससे गांव के लोगों में सामाजिक समरसता कायम है।