स्कूलों की जन भागीदारी समितियो स्कूल के अभिभावक ही होंगे समिति के सदस्य


सक्ती – स्कूलों में दशकों से चली आ रही जन भागीदारी समिति एवं शाला विकास समितियो की प्रक्रिया को सरकार ने बदलाव करते हुए एक बड़ा फैसला लिया है।सरकारी और राज्य-संचालित स्कूलों की समितियों से अब नेताओं की सीधी दखलअंदाजी खत्म की जा रही है।केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा शिक्षा को राजनीति से मुक्त करने के लिए सख्त दिशा निर्देश लागू किए गए हैं, जिसके तहत समितियों में अभिभावकों (विशेषकर महिलाओं) को मुख्य जिम्मेदारी दी जा रही है इन बदलावों के प्रमुख बिंदु इस प्रकार हैं
केंद्रीय स्तर पर नया ढांचा
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा जारी SMC दिशानिर्देश के तहत, पुरानी ‘स्कूल प्रबंधन विकास समितियों’ (SMDC) की जगह अब ‘स्कूल प्रबंधन समितियों’ (SMC) का गठन किया गया है
अभिभावकों को प्राथमिकता
इन नई समितियों में 75% सदस्य माता-पिता होंगे, और इनमें 50% महिलाओं का शामिल होना अनिवार्य है।अब नेताओं के बजाय सीधे अभिभावकों और स्थानीय समुदाय के हाथों में स्कूल के विकास और प्रबंधन की बागडोर सौंपी जा रही है
राज्य-स्तरीय कदम
पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में तो सीधे तौर पर राजनीतिक दलों (जैसे तृणमूल कांग्रेस) द्वारा नियुक्त सभी पुरानी प्रबंध समितियों और उनके सदस्यों को रद्द कर दिया गया है, ताकि शिक्षा व्यवस्था में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को खत्म किया जा सके
ये प्रमुख अधिकार और जिम्मेदारियां
हर महीने कम से कम एक बैठक आयोजित करना अनिवार्य, विद्यालय में बच्चों के नियमित नामांकन और उपस्थिति सुनिश्चित करना, स्कूल छोड़ चुके बच्चों की पहचान कर उन्हें वापस मुख्यधारा में लाने का प्रयास, स्कूल में विद्यार्थियों की संख्या बढ़ाने के लिए नामांकन अभियान चलाना, अभिभावक-शिक्षक बैठक।(पीटीएम) में सहयोग करना, एफएलएन लक्ष्यों की प्राप्ति में सहयोग देना। पीएम पोषण (मिड-डे मील) और स्वास्थ्य संबंधी गतिविधियों की निगरानी, स्कूल विकास योजना (एसडीपी) तैयार करने में भागीदारी, बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और कल्याण सुनिश्चित करना, स्कूल अनुदान राशि के उपयोग की निगरानी करना।
अब 1 लाख तक के मरम्मत कार्य का फैसला खुद करेगी समिति
नई एसएमसी को वित्तीय अधिकार भी दिए गए हैं। स्कूलों में 1 लाख रुपए तक के निर्माण और मरम्मत कार्य समिति स्वयं करा सकेगी। इसके लिए अलग से विभागीय मंजूरी लेने की आवश्यकता नहीं होगी। इन कार्यों में शौचालय निर्माण या मरम्मत, पेयजल व्यवस्था, रैंप, बिजली व्यवस्था, छोटी मरम्मत और अन्य आधारभूत सुविधाओं से जुड़े काम शामिल हैं। कार्य निर्धारित प्रक्रिया के तहत कराए जाएंगे तथा तकनीकी मूल्यांकन और भुगतान की व्यवस्था भी तय की गई है। 1 लाख रुपए से अधिक लागत वाले निर्माण और मरम्मत कार्यों के लिए वर्तमान व्यवस्था यथावत रहेगी।
ये होंगे समिति के अन्य 25 फीसदी सदस्य
नई एसएमसी में अध्यक्ष और उपाध्यक्ष दोनों पद अभिभावकों के पास रहेंगे। स्थानीय निकाय का एक निर्वाचित प्रतिनिधि, एक शिक्षक, स्थानीय शिक्षाविद् या विषय विशेषज्ञ, पूर्व विद्यार्थी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आशा कार्यकर्ता अथवा एएनएम को सदस्य बनाया जाएगा। स्कूल के प्राचार्य या प्रभारी प्राचार्य समिति के सदस्य सचिव होंगे।




