सक्ती

कलेक्टर के निर्देशन में खाद विक्रेताओं पर बड़ी कार्यवाही, दो लाइसेंस किए गए निरस्त

किसानों को गुणवत्तायुक्त खाद उपलब्ध कराने लगातार जारी है निरीक्षण अभियान

सक्ती – कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के निर्देशन एवं उप संचालक कृषि तरुण कुमार प्रधान के मार्गदर्शन में किसानों को गुणवत्तायुक्त उर्वरक उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जिले में निजी उर्वरक व्यापारियों का सतत निरीक्षण किया जा रहा है। निरीक्षण के दौरान अनियमितता पाए जाने पर विकासखंड डभरा अंतर्गत मेसर्स कोमल प्रसाद जायसवाल, साराडीह तथा विकासखंड मालखरौदा अंतर्गत मेसर्स योगेश कुमार अग्रवाल, फगुरम के खाद लाइसेंस को निरस्त कर दिए गए। जांच में पाया गया कि मेसर्स कोमल प्रसाद जायसवाल द्वारा बिना वैध फार्म-ओ के खाद का व्यवसाय किया जा रहा था। साथ ही किसानों को प्रपत्र-एम फार्म में कैश क्रेडिट जारी नहीं किया जा रहा था तथा स्टॉक पंजी का संधारण एवं मासिक प्रगति प्रतिवेदन की जानकारी प्रस्तुत नहीं की जा रही थी। इसी प्रकार मेसर्स योगेश कुमार अग्रवाल द्वारा भी बिना वैध फार्म-ओ के खाद का व्यवसाय किया जा रहा था। किसानों को प्रपत्र-एम फार्म में कैश क्रेडिट जारी नहीं किया गया तथा बिना पीओएस मशीन के उर्वरक वितरण किया जा रहा था। इसके अलावा स्टॉक पंजी का संधारण एवं मासिक प्रगति प्रतिवेदन की जानकारी भी प्रस्तुत नहीं की जा रही थी। उक्त अनियमितताएं उर्वरक (अकार्बनिक, कार्बनिक एवं मिश्रित) नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के प्रावधानों का उल्लंघन पाए जाने पर लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्यवाही की गई।

कालाबाजारी और अधिक मूल्य पर बिक्री करने वालों पर होगी कार्यवाही

        कृषि विभाग द्वारा जिले में उर्वरकों के भंडारण एवं वितरण व्यवस्था की सतत निगरानी की जा रही है। शासन द्वारा निर्धारित दर से अधिक मूल्य पर बिक्री, कालाबाजारी, जमाखोरी अथवा अन्य अनियमितता पाए जाने पर जिला स्तरीय एवं विकासखंड स्तरीय निगरानी दल द्वारा कार्रवाई की जा रही है। जिले के उर्वरक निरीक्षकों द्वारा अब तक 132 विक्रय स्थलों का निरीक्षण किया जा चुका है। निरीक्षण के दौरान 07 विक्रय केंद्रों पर विक्रय प्रतिबंध लगाकर प्राधिकार पत्र निलंबन की कार्रवाई की गई है। वहीं 05 अवैध भंडारण मामलों को जब्त कर कलेक्टर न्यायालय में प्रस्तुत किया गया है तथा 61 विक्रय केंद्रों को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है। कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि कहीं अधिक कीमत पर खाद बिक्री, कालाबाजारी अथवा अन्य अनियमितता की जानकारी मिले तो इसकी सूचना अपने नजदीकी कृषि विभाग कार्यालय को दें। किसानों को निर्धारित दर पर गुणवत्तायुक्त उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए निरीक्षण अभियान लगातार जारी रहेगा तथा नियमों के उल्लंघन पर संबंधित विक्रेताओं के विरुद्ध उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 एवं आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 के तहत कड़ी प्रशासनिक, कानूनी एवं दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।