सक्ती शहर में आस्था विसर्जन सामग्री कुंड का हो निर्माणशहर के प्रमुख तालाबो में धार्मिक आस्था सामग्रियों का विसर्जन हो पूर्णता बंद,धार्मिक आस्था की सामग्रियों से पटे पड़े हैं शहर के प्रमुख तालाब

सक्ती – कहने को तो हम जल संरक्षण की बात करते हैं, किंतु आज शहरी क्षेत्र के प्रमुख तालाबों की स्थिति यह है कि आज कहीं ना कहीं हम अपनी धार्मिक भावनाओं एवम आस्थाओं के चलते स्वयं तालाबों को दूषित करने में तूले हुए हैं, तथा नगर पालिका क्षेत्र सक्ती की बात करें तो शहर के प्रमुख तालाब इन दोनों धार्मिक आस्थाओं की सामग्रियों से पटे पड़े हुए हैं, तालाबों के घाटों में जहां ढेर लगा हुआ है, तो वहीं स्थानीय प्रशासन भी इन सामग्रियों को उठाने के लिए कितनी मुश्किलों का सामना करते करते हुए अपने कर्मचारियों से इस कार्य को करवा रही है, किंतु क्या हमारी धार्मिक आस्थाओं को हम वर्तमान समय के अनुसार एवं जल संकट, पर्यावरण एवं स्वास्थ्य की दृष्टि से परिवर्तित नहीं कर सकते तथा वर्तमान स्थिति को देखते हुए हमें अपनी सोच को बदलना होगा एवं नगर पालिका सक्ती के अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल एवं नगर पालिका प्रशासन से हम अपील करते हैं कि शहर में एक ऐसे आस्था विसर्जन सामग्री कुंड का निर्माण किया जाए जहां की समय समय पर सार्वजनिक एवं लोगों के घरों में से निकलने वाली धार्मिक आस्थाओं का यह सामग्रियां एक जगह एकत्रित हो एवं वहां से प्रतिदिन या की सप्ताह में एक दिन प्रशासन की मशीनरींयों के माध्यम से उन सामग्रियों को उठाकर अन्यत्र डाला जा सके अन्यथा आज की स्थिति को देखते हुए शहर के प्रमुख निस्तारी वाले एवम अन्य तालाबो में धार्मिक आस्थाओ की विसर्जित सामग्री से जहां पर्यावरण दूषित हो रहा है तो कहीं ना कहीं हमारे स्वास्थ्य पर भी इसका विपरीत असर पड़ रहा है, हमें विश्वास है की सक्ती के नगर पालिका अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल इस दिशा में ठोस प्रयास करेंगे एवं शहर के बीचो-बीच एक छोटे से आस्था बिसर्जन सामग्री कुंड का निर्माण करवाएंगे, जिसमें लोगों की धार्मिक आस्थाओं का भी सम्मान हो सके एवं उस धार्मिक आस्था वाली विसर्जन योग्य सामग्रियों को भी उचित स्थान पर डाला जा सकें विगत वर्षों सक्ती शहर के श्री हनुमान सेवा परिवार ने शहर के घरों में निकलने वाली ऐसी धार्मिक आस्थाओं वाली विसर्जन सामग्री को घर-घर जाकर एकत्रित करने अभियान चलाया था, जिसके अंतर्गत प्रतिदिन समिति द्वारा रिक्शा निकाल कर मुनादी के माध्यम से घरों से विसर्जित सामग्री भी एकत्रित कर उसे खाद के रूप में उपयोग किया जाता था, किंतु समिति के सदस्यों को भी शहर वासियों का इस दिशा में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाने के कारण वह व्यवस्था बंद हो गई है, तथा यह व्यवस्था जब चल रही थी तब लोग काफी प्रशंसा करते थे,किंतु इस व्यवस्था में प्रतिदिन लगभग 500 से 700 रुपए का खर्च आता था, लेकिन समिति भी आखिरकार कहां से इस व्यवस्था को करेगी,जी एल न्यूज वेबसाइट परिवार शहर वासियों की धार्मिक आस्थाओं एवं भावनाओं का सम्मान करता है, किंतु वर्तमान स्थिति को देखते हुए हमें जागरुक होने की आवश्यकता है, तथा हम स्वयं जब तक इस दिशा में आगे नहीं बढ़ेंगे तब तक हमारे आने वाली पीढ़ी हमारा अनुसरण नहीं कर पाएगी, इसलिए सक्ती शहर की जनता से हम निवेदन करते हैं कि इस दिशा में सकारात्मक सोच के साथ आगे बढ़े एवं इसमें सहयोग करें वही सक्ती शहर में धार्मिक आस्था वाली सामग्रियों के एकत्रीकरण को लेकर शहर की सामाजिक संस्था हनुमान सेवा परिवार ने नगर पालिका परिषद शक्ति के अध्यक्ष श्याम सुंदर अग्रवाल से निवेदन किया है कि नगर पालिका की ओर से एक बैटरी ई रिक्शा उनकी समिति को प्रदान किया जाए तथा नगर पालिका के एक सफाई कर्मचारी भी उपलब्ध करवाया जाए जिससे प्रतिदिन नियमित रूप से सक्ती शहर के प्रत्येक स्थानो पर ई रिक्शा के माध्यम से धार्मिक विसर्जित सामग्रियों का एकत्रीकरण किया जा सके तथा इस कार्य में हनुमान सेवा परिवार भी इसकी देखरेख करते हुए इसका बेहतर ढंग से संचालन करने को तैयार है


