जिले में नील हरित काई उत्पादन को बढ़ावा, 500 किसानों तक पहुंचाने की तैयारी

नील हरित काई से बढ़ेगी मिट्टी की उर्वरता, कृषि विभाग ने शुरू किया विशेष अभियान

सक्ती – कृषि उत्पादन आयुक्त के निर्देशन, संचालक कृषि के मार्गदर्शन एवं कलेक्टर अमृत विकास तोपनो के नेतृत्व में जिले में नील-हरित काई ( ब्लू ग्रीन एल्गी ) के उत्पादन एवं उपयोग को बढ़ावा देने हेतु विशेष अभियान संचालित किया जा रहा है। इसी क्रम में संयुक्त संचालक कृषि, बिलासपुर संभाग आर. के. राठौर द्वारा जिला सक्ती के शासकीय कृषि बीज प्रक्षेत्र रगजा में स्थापित उत्पादन यूनिट का निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान जिले के कृषि अधिकारियों को निर्देशित किया गया कि नील हरित काई का उपयोग जिले के अधिक से अधिक किसानों के खेतों में कराया जाए। प्रक्षेत्र रगजा के टांकों में नील हरित काई का उत्पादन किया जा रहा है, जिसका हार्वेस्टिंग के पश्चात शीघ्र ही जिले के किसानों को प्रदाय किया जाएगा। इस हेतु जिले में 500 किसानों का चयन किए जाने की कार्ययोजना तैयार की गई है। उप संचालक कृषि ने जिले के किसानों से नील हरित काई के उपयोग हेतु अपील भी की। इस अवसर पर अनुविभागीय कृषि अधिकारी एवं सहायक मृदा परीक्षण अधिकारी सक्ती उपस्थित रहे।
कृषि विभाग ने बताया कि नील हरित काई एक सायनो बैक्टीरिया है, जो प्रोकैरियोटिक जीव के रूप में कार्य करता है और वायुमंडलीय नाइट्रोजन को 20 से 25 किलोग्राम प्रति हेक्टेयर भूमि में स्थिरीकरण कर मिट्टी की उर्वरता बढ़ाता है। इसके उपयोग से रासायनिक उर्वरकों जैसे यूरिया एवं डीएपी पर निर्भरता कम होती है। नील हरित काई के उत्पादन हेतु आवश्यक सामग्री में 2 गुणा 1 वर्ग मीटर आकार की अधोसंरचना, 10 किलोग्राम प्रति वर्ग मीटर कन्हार मिट्टी, 200 ग्राम प्रति वर्ग मीटर सिंगल सुपर फास्फेट, 100 ग्राम प्रति वर्ग मीटर बुझा हुआ चूना तथा 100 ग्राम प्रति वर्ग मीटर नील हरित काई का मातृ कल्चर शामिल है।


