सक्ती

नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम योजना से किसान कृष्ण कुमार धान के बदले अन्य फसल लेकर जिले के किसानों को कर रहे प्रेरित

धान की पारंपरिक खेती से ऑयल पाम एवं सब्जी उत्पादन की ओर बढ़े किसान कृष्ण कुमार चंद्रा, पा रहे दोगुना लाभ

नेशनल मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम योजना से किसान कृष्ण कुमार धान के बदले अन्य फसल लेकर जिले के किसानों को कर रहे प्रेरित kshititech

सक्ती-  जिले के विकासखण्ड जैजैपुर के ग्राम खम्हारडीह निवासी किसान  कृष्ण कुमार चंद्रा लंबे समय से अपनी भूमि पर मुख्य रूप से धान की खेती करते आ रहे थे। खेती उनके परिवार की आजीविका का प्रमुख साधन थी, लेकिन पारंपरिक तरीके से धान की खेती करने पर लागत और मेहनत के अनुपात में बचत सीमित रहती थी। लगभग 5 एकड़ भूमि में धान की खेती से उन्हें करीब 125 क्विंटल उत्पादन प्राप्त होता था। धान का कुल विक्रय मूल्य लगभग 3 लाख 87 हजार 500 रुपये होता था। वहीं इनपुट लागत, श्रमिक लागत एवं अन्य कृषि खर्चों को मिलाकर लगभग 1 लाख 70 हजार रुपये व्यय होता था। सभी खर्चों को निकालने के बाद कृषक को लगभग 2 लाख 17 हजार रुपये की बचत प्राप्त होती थी। लगातार खेती में बढ़ती लागत और बेहतर आमदनी की आवश्यकता को देखते हुए कृषक ने अपनी पारंपरिक खेती में बदलाव करने का निर्णय लिया। वे ऐसी फसल प्रणाली अपनाना चाहते थे, जिसमें उपलब्ध भूमि का बेहतर उपयोग हो और वर्तमान के साथ-साथ भविष्य में भी आय का अतिरिक्त स्रोत तैयार हो सके।
              किसान कृष्ण कुमार चंद्रा ने उद्यान विभाग अंतर्गत संचालित ’’राष्ट्रीय मिशन ऑन एडिबल ऑयल पाम योजना’’ के तहत ऑयल पाम की खेती और लौकी सब्जी की खेती को अपनाकर अपनी खेती में नया बदलाव किया। उन्होंने अपनी लगभग 5 एकड़ भूमि में ऑयल पाम के 286 पौधे लगाए। ऑयल पाम के पौधों के बीच उपलब्ध रिक्त स्थान का उपयोग भी उन्होंने प्रभावी ढंग से किया और वहां लौकी की खेती शुरू की। इस तरह एक ही भूमि से वर्तमान में सब्जी उत्पादन के माध्यम से आय प्राप्त करने के साथ-साथ भविष्य के लिए ऑयल पाम से आय का आधार तैयार किया गया। किसान के अनुसार लौकी की फसल का उत्पादन अच्छा रहा। इसमें फफूंद एवं बीमारी का प्रकोप अपेक्षाकृत कम होने के कारण फसल प्रबंधन में भी सुविधा रही। लौकी की खेती से उन्हें लगभग 800 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ, जिसका कुल विक्रय मूल्य करीब 8 लाख रुपये रहा। इसमें लगभग 3 लाख 60 हजार रुपये की लागत आई। लागत निकालने के बाद कृषक को करीब 4 लाख 40 हजार रुपये की बचत प्राप्त हुई। इस प्रकार पहले धान की खेती से प्राप्त करीब 2 लाख 17 हजार रुपये की बचत की तुलना में अब लौकी की खेती से करीब 4 लाख 40 हजार रुपये की बचत हुई, जिससे किसान की बचत में लगभग 2 लाख 22 हजार रुपये की वृद्धि हुई। इसके साथ ही ऑयल पाम के लगाए गए 286 पौधे भविष्य की आय का आधार बन रहे हैं। इन पौधों से लगभग चार वर्ष बाद फल प्राप्त होने की उम्मीद है। इससे आने वाले समय में किसान को सब्जी उत्पादन के साथ ऑयल पाम से भी नियमित आय प्राप्त होने का अवसर मिलेगा। योजना के अंतर्गत कृषक को लगभग 2 लाख रुपये का विभागीय अनुदान भी प्राप्त हुआ है, जिससे ऑयल पाम की खेती को अपनाने में उन्हें आर्थिक सहयोग मिला। किसान कृष्ण कुमार चंद्रा की यह पहल फसल विविधीकरण और उपलब्ध भूमि के बेहतर उपयोग का उदाहरण बनकर सामने आई है। पहले जहां उनकी खेती मुख्य रूप से धान पर निर्भर थी, वहीं अब वे लौकी से वर्तमान आय और ऑयल पाम से भविष्य की आय का आधार तैयार कर रहे हैं। उनकी सफलता से प्रभावित होकर जिले के अन्य किसान भी धान के बदले सब्जी एवं ऑयल पाम की खेती अपनाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।