सक्ती

ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर उड़द की खेती से किसान को मिला बेहतर उत्पादन और अधिक लाभ

सक्ती-  कृषि विभाग द्वारा संचालित फसल प्रदर्शन के अंतर्गत विकासखंड मालखरौदा के ग्राम दिमानी के प्रगतिशील किसान दाऊ लाल ने ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन कार्यक्रम के तहत उड़द (किस्म–KOTA URAD-04) की खेती अपनाकर बेहतर उत्पादन के साथ आर्थिक लाभ अर्जित किया है।  दाऊ लाल के पास कुल 4.5 एकड़ कृषि भूमि है, जिसमें 3.0 एकड़ सिंचित एवं 1.0 एकड़ असिंचित भूमि शामिल है। पूर्व में वे ग्रीष्मकालीन धान की खेती करते थे, जिसमें अधिक पानी की आवश्यकता, अधिक लागत तथा भूमि की उर्वरता में कमी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता था। कृषि विभाग के मार्गदर्शन में उन्होंने फसल प्रदर्शन के अंतर्गत 2.5 एकड़ क्षेत्र में उड़द की खेती की। उड़द की फसल लगभग 70 दिनों में तैयार हो गई और किसान को कुल 15 क्विंटल उत्पादन प्राप्त हुआ। खेती में कुल लागत लगभग 22,500 रुपये आई, जबकि फसल विक्रय से लगभग 1,10,000 रुपये की आय प्राप्त हुई। इससे किसान को अच्छा शुद्ध लाभ मिला। उड़द की खेती में धान की अपेक्षा सिंचाई हेतु पानी की आवश्यकता लगभग 97 प्रतिशत तक कम रही तथा कीट एवं रोगों का प्रकोप भी अपेक्षाकृत कम देखा गया। किसान  दाऊ लाल ने बताया कि उड़द की खेती कम लागत, कम पानी और कम समय में अधिक लाभ देने वाली फसल है। इस खेती से उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है तथा वे भविष्य में भी फसल चक्र अपनाकर दलहन फसलों का रकबा बढ़ाने का निर्णय ले चुके हैं। उप संचालक कृषि, जिला सक्ती ने बताया कि विभाग द्वारा किसानों से जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य सुधार एवं आय में वृद्धि के लिए ग्रीष्मकालीन धान के स्थान पर दलहन, तिलहन एवं मक्का फसल प्रोत्साहन कार्यक्रम के अंतर्गत अन्य फसलों को अपनाने की अपील की जा रही है। विभाग द्वारा उन्नत बीज, तकनीकी मार्गदर्शन एवं आवश्यक कृषि सलाह निरंतर उपलब्ध कराई जा रही है।