पीएम आशा योजना के तहत समर्थन मूल्य पर दलहन-तिलहन उपार्जन, किसानों को डीबीटी के माध्यम से किया गया भुगतान

सक्ती जिले की छह समितियों में 59 किसानों से सरसों एवं चना की खरीदी, किसानों को मिला लाभ
सक्ती- प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम आशा) योजना के अंतर्गत प्राइस सपोर्ट स्कीम (पीएसएस) के तहत दलहन एवं तिलहन फसलों के उपार्जन हेतु सक्ती जिले में केंद्रीय एजेंसी नेफेड के माध्यम से छह समितियों को अधिसूचित किया गया था। इनमें रगजा, मालखरौदा, बेल्हाडीह, पिहरीद, जैजैपुर एवं कोटमी समितियां शामिल हैं। इन समितियों के आसपास के किसानों से निर्धारित अवधि तक समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन फसलों का उपार्जन किया गया। योजनांतर्गत किसानों से सरसों एवं चना की खरीदी की गई। अंतिम खरीदी तिथि तक जिले के छह उपार्जन केंद्रों के माध्यम से 59 किसानों से कुल 316 क्विंटल सरसों तथा 5 क्विंटल चना का उपार्जन किया गया। सरसों का समर्थन मूल्य 6200 रुपये प्रति क्विंटल तथा चना का समर्थन मूल्य 5875 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित था। इसके अनुसार 19 लाख 59 हजार 200 रुपये की सरसों तथा 29 हजार 375 रुपये की चना उपार्जन राशि किसानों के खातों में डीबीटी के माध्यम से भुगतान की गई। कोटमी समिति में 14 किसानों से 203.50 क्विंटल सरसों का उपार्जन किया गया, जिसके लिए 12 लाख 61 हजार 700 रुपये का भुगतान संबंधित किसानों के खातों में किया गया। इनमें ग्राम नवापारा के किसान श्री गणपतलाल पटेल द्वारा 30 क्विंटल सरसों की बिक्री की गई, जिसके एवज में उनके खाते में 1 लाख 86 हजार रुपये की राशि का भुगतान किया गया। विकासखंड सक्ती के रगजा उपार्जन केंद्र में 19 किसानों से 51.50 क्विंटल सरसों की खरीदी की गई, जिसके लिए 3 लाख 19 हजार 300 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। इसी प्रकार विकासखंड मालखरौदा में 11 किसानों से 43 क्विंटल सरसों का उपार्जन किया गया, जिसके लिए 2 लाख 66 हजार 600 रुपये का भुगतान किसानों को किया गया है। विकासखंड जैजैपुर में 14 किसानों से 18 क्विंटल सरसों एवं 4 क्विंटल चना का उपार्जन किया गया। इसके एवज में किसानों को क्रमशः 1 लाख 11 हजार 600 रुपये तथा 23 हजार 500 रुपये का भुगतान किया जा चुका है। जिले में पहली बार रबी मौसम में समर्थन मूल्य पर दलहन एवं तिलहन फसलों का उपार्जन किया गया, जिसमें किसानों ने उत्साहपूर्वक भाग लेते हुए अपनी उपज सहकारी समितियों में विक्रय की। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए खुले बाजार पर निर्भर नहीं रहना पड़ा। योजना के सफल क्रियान्वयन से आगामी वर्षों में जिले में दलहन एवं तिलहन फसलों के रकबे में वृद्धि होने की संभावना व्यक्त की जा रही है।




