झालरौंदा गाँव में नई खदान और क्रेशर का ग्रामीणों ने किया विरोध कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन

क्षेत्र के पर्यावरण, स्वास्थ्य और खेती पर पड़ेगा असर, ग्रामीणों ने खदान प्रस्ताव निरस्त करने की उठाई मांग
सक्ती – बाराद्वार थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पंचायत झालरौंदा में प्रस्तावित नई खदान, क्रेशर एवं उत्खनन कार्य का विरोध तेज हो गया है। गांव के ग्रामीणों ने सक्ती कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर प्रस्तावित खदान की स्वीकृति निरस्त करने तथा जनहित में न्यायसंगत कार्रवाई करने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि गांव के समीप खदान और क्रेशर संचालित किए गए तो पर्यावरणीय संतुलन बिगड़ने के साथ-साथ ग्रामीणों के स्वास्थ्य, कृषि और सामाजिक जीवन पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों द्वारा सौंपे गए आवेदन में कहा गया है कि झालरौंदा एक आबादी वाला गांव है, जहां बड़ी संख्या में लोग कृषि और अन्य पारंपरिक व्यवसायों पर निर्भर हैं। ऐसे में गांव के आसपास खदान और क्रेशर संचालन से कई प्रकार की समस्याएं उत्पन्न होंगी, जिनका असर आने वाले वर्षों तक देखने को मिलेगा।
धूल और प्रदूषण से बढ़ेगी परेशानी
ग्रामीणों ने ज्ञापन में उल्लेख किया है कि खदान और क्रेशर संचालन के दौरान बड़ी मात्रा में धूल उड़ने की संभावना है। इससे वायु प्रदूषण बढ़ेगा और बच्चों, बुजुर्गों तथा श्वास संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा। ग्रामीणों का कहना है कि वर्तमान में गांव का वातावरण शांत और स्वच्छ है, लेकिन खदान शुरू होने के बाद यह स्थिति पूरी तरह बदल जाएगी।
खेती और जल स्रोतों पर खतरा
आवेदन में ग्रामीणों ने आशंका जताई है कि उत्खनन गतिविधियों से भूजल स्तर प्रभावित हो सकता है। इससे किसानों को सिंचाई संकट का सामना करना पड़ सकता है। गांव की अधिकांश आबादी कृषि पर निर्भर है, इसलिए खदान संचालन का सीधा असर ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ेगा।
भारी वाहनों से बढ़ेगा दुर्घटना का खतरा
ग्रामीणों ने बताया कि खनिज परिवहन के लिए प्रतिदिन भारी वाहनों की आवाजाही होगी। इससे गांव की सड़कों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाएगी। स्कूल आने-जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से खतरनाक साबित हो सकती है। साथ ही लगातार भारी वाहनों के चलने से गांव की सड़कें भी क्षतिग्रस्त होने की संभावना है।
ध्वनि प्रदूषण से प्रभावित होगा जनजीवन
क्रेशर मशीनों और भारी वाहनों से उत्पन्न होने वाले शोर को लेकर भी ग्रामीणों ने चिंता जताई है। उनका कहना है कि लगातार होने वाला शोर गांव की शांति को भंग करेगा और लोगों के दैनिक जीवन को प्रभावित करेगा।
ग्रामीणों ने प्रशासन से की निष्पक्ष जांच की मांग
ज्ञापन में ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि प्रस्तावित खदान और क्रेशर परियोजना के सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच कराई जाए तथा स्थानीय लोगों की आपत्तियों को गंभीरता से सुना जाए। ग्रामीणों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं, लेकिन ऐसा कोई भी प्रोजेक्ट स्वीकार नहीं किया जाएगा जिससे गांव के पर्यावरण और भविष्य पर खतरा उत्पन्न हो।
ग्रामीणों ने इन बिंदुओं पर जताई आपत्ति
खदान और क्रेशर से वायु एवं ध्वनि प्रदूषण बढ़ने की आशंका, भूजल स्तर प्रभावित होने और कृषि को नुकसान पहुंचने का खतरा, भारी वाहनों की आवाजाही से सड़क दुर्घटनाओं की संभावना, गांव की सड़कों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका, बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों की सुरक्षा पर खतरा, पर्यावरणीय संतुलन और ग्रामीण जीवन प्रभावित होने की चिंता, प्रस्तावित खदान एवं उत्खनन कार्य की स्वीकृति निरस्त करने की मांग।




