सक्ती

गुप्ता स्टोन माइंस पर बेनामी संपत्ति से खनन का आरोपसक्ती में कारोबारी के खिलाफ मुख्यमंत्री समेत कई विभागों को शिकायत,पट्टा निरस्त करने की मांग

गुप्ता स्टोन माइंस पर बेनामी संपत्ति से खनन का आरोपसक्ती में कारोबारी के खिलाफ मुख्यमंत्री समेत कई विभागों को शिकायत,पट्टा निरस्त करने की मांग kshititech

सक्ती –  सक्ती जिले में खनन कारोबार से जुड़े एक मामले ने नया विवाद खड़ा कर दिया है। गुप्ता स्टोन माइंस के संचालक द्वारिका प्रसाद गुप्ता पर बेनामी संपत्तियों के आधार पर खनन पट्टा हासिल करने, अवैध खनिज भंडारण करने, शासकीय भूमि पर कब्जा करने और प्रशासनिक अधिकारियों की कथित मिलीभगत से खनन गतिविधियां संचालित करने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं। मामले को लेकर मुख्यमंत्री, कलेक्टर, खनिज संसाधन विभाग, छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल, खान सुरक्षा महानिदेशक सहित कई उच्च अधिकारियों को शिकायत भेजी गई है। शिकायतकर्ता बीजेपी किसान मोर्चा के जिला मंत्री नरेश चंद्रा ने खनन एवं भंडारण पट्टा तत्काल निरस्त करने, कथित राजस्व नुकसान की भरपाई कराने और आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग की है।
डोलोमाइट खनन पट्टे पर उठे सवाल
शिकायत के अनुसार, द्वारिका प्रसाद गुप्ता, निवासी पीपल चौक, वार्ड क्रमांक-7, तहसील बिल्हा, जिला बिलासपुर को ग्राम डूमरपारा और लोहराकोट क्षेत्र में डोलोमाइट उत्खनन एवं भंडारण के लिए खनिज पट्टा प्रदान किया गया है।
आरोप है कि जिस भूमि पर खनन गतिविधियां संचालित की जा रही हैं, वह वास्तव में द्वारिका प्रसाद गुप्ता की बेनामी संपत्ति है, जिसे लक्ष्मीचंद मरावी और ओंकार सिंह गोंड के नाम पर खरीदा गया था।
बेनामी संपत्ति अटैच होने का दावा
शिकायतकर्ता नरेश चंद्रा का दावा है कि बेनामी संपत्ति अंतरण निषेध अधिनियम, 1988 के तहत जांच के बाद बेनामी निषेध इकाई ने संबंधित संपत्तियों को अटैच किया था।
दस्तावेजों के अनुसार, लक्ष्मीचंद मरावी से संबंधित संपत्ति को 28 दिसंबर 2023 को प्रोविजनल और 3 जनवरी 2024 को फाइनल अटैच किया गया। इसमें लक्ष्मीचंद मरावी को बेनामीदार और द्वारिका प्रसाद गुप्ता को लाभार्थी स्वामी माना गया था। इस मामले में अपीलीय न्यायाधिकरण (सफेमा), नई दिल्ली ने 5 फरवरी 2026 को अपील भी खारिज कर दी थी।
इसी प्रकार, ओंकार सिंह गोंड से जुड़ी संपत्ति को 22 जुलाई 2021 को प्रोविजनल और 28 फरवरी 2022 को अंतिम रूप से अटैच किया गया था। इस मामले की अपील भी 19 दिसंबर 2024 को खारिज हो चुकी है।
जानकारी के बावजूद कार्रवाई नहीं कर रहे अधिकारी:आरोप
शिकायत में कहा गया है कि अटैचमेंट आदेशों की प्रतियां तहसीलदार, उप-पंजीयक, एसडीएम, जिला पंजीयक और कलेक्टर कार्यालय समेत संबंधित अधिकारियों को भेजी जा चुकी थीं।
इसके बावजूद कथित तौर पर तथ्यों को छिपाकर खनिज विभाग से अनुमति प्राप्त की गई और लंबे समय तक खनन एवं भंडारण कार्य जारी रखा गया। शिकायतकर्ताओं ने इसे गंभीर प्रशासनिक लापरवाही और शासकीय राजस्व को नुकसान पहुंचाने वाला मामला बताया है।
अवैध भंडारण और शासकीय भूमि कब्जे का भी आरोप
मामले में यह आरोप भी लगाया गया है कि खनन क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अवैध खनिज भंडारण किया गया है। साथ ही शासकीय भूमि पर कब्जा कर खनन संबंधी गतिविधियां संचालित की जा रही हैं।
शिकायतकर्ता नरेश चंद्रा का कहना है कि यदि संबंधित भूमि को न्यायिक प्रक्रिया के तहत बेनामी संपत्ति घोषित किया जा चुका है और अंतिम आदेश भी पारित हो चुके हैं, तो ऐसे में खनन और भंडारण की अनुमति जारी रहना कई गंभीर सवाल खड़े करता है।
खनिज विभाग की भूमिका पर भी सवाल
शिकायत में खनिज विभाग के अधिकारियों की भूमिका पर भी प्रश्न उठाए गए हैं। आरोप है कि संबंधित अधिकारियों को भूमि की स्थिति की जानकारी होने के बावजूद खनन गतिविधियों को नहीं रोका गया।
शिकायतकर्ता ने पूरे मामले का वित्तीय मूल्यांकन कर कथित राजस्व नुकसान और गबन की राशि की वसूली द्वारिका प्रसाद गुप्ता तथा संबंधित अधिकारियों से करने की मांग की है। साथ ही दोनों के खिलाफ आपराधिक प्रकरण दर्ज करने की मांग भी की गई है।
कई विभागों को भेजी गई शिकायत
यह शिकायत मुख्यमंत्री, कलेक्टर सक्ती, खनिज संसाधन विभाग के सचिव, भूविज्ञान एवं खनिकर्म विभाग के संचालक, ऑडिटर जनरल, खान सुरक्षा महानिदेशक, जिला प्रभारी मंत्री और छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल को भेजी गई है।
जिला खनिज अधिकारी का पक्ष नहीं आया सामने
मामले में पक्ष जानने के लिए जिला खनिज अधिकारी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसीव नहीं किया। फिलहाल शिकायतों और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर पूरे प्रकरण की जांच और संभावित कार्रवाई को लेकर क्षेत्र में चर्चाएं तेज हो गई हैं।