सक्ती

3 माह से वेतन नहीं मिलने पर फूटा कर्मचारियों का आक्रोश

13 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान

सक्ती –  छत्तीसगढ़ के नगरीय निकायों में कार्यरत हजारों अधिकारियों और कर्मचारियों का सब्र अब जवाब देता नजर आ रहा है। पिछले कई महीनों से वेतन भुगतान में हो रही देरी और लंबित मांगों के निराकरण नहीं होने से नाराज नवयुक्त अधिकारी/कर्मचारी कल्याण संघ (छत्तीसगढ़) ने 13 जुलाई 2026 से प्रदेशव्यापी अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाने की घोषणा की है। संघ के इस फैसले से प्रदेशभर के नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायतों में कार्यरत कर्मचारियों के बीच हलचल तेज हो गई है। संघ की सक्ती जिला इकाई के अध्यक्ष विकास देवांगन ने बताया कि प्रदेश के कई नगरीय निकायों में कर्मचारियों को दो से तीन माह तक वेतन नहीं मिला है। समय पर वेतन नहीं मिलने के कारण कर्मचारियों के सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है और परिवार का भरण-पोषण करना भी मुश्किल हो रहा है। उन्होंने कहा कि शासन द्वारा हर माह समय पर वेतन भुगतान के स्पष्ट निर्देश जारी किए गए हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है, जिससे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। संघ द्वारा उठाई जा रही प्रमुख मांगों में प्रत्येक माह की पहली तारीख को नियमित वेतन भुगतान सुनिश्चित करना, सभी नगरीय निकाय कर्मचारियों के लिए समान वेतनमान लागू करना, पूर्व में की गई कटौतियों की राशि जमा कराना तथा सेवानिवृत्त कर्मचारियों के लंबित भुगतान का शीघ्र निराकरण करना शामिल है। कर्मचारियों का कहना है कि ये मांगें लंबे समय से लंबित हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं की गई है। संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजेश सोनी ने कहा कि कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर कई बार शासन और विभागीय अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया तथा चर्चा के माध्यम से समाधान निकालने का प्रयास किया गया, लेकिन अब तक कोई सकारात्मक परिणाम सामने नहीं आया। उन्होंने कहा कि लगातार उपेक्षा के चलते कर्मचारियों के पास आंदोलन का रास्ता अपनाने के अलावा कोई अन्य विकल्प नहीं बचा है।
हड़ताल की घोषणा के बाद प्रदेशभर के नगरीय निकाय कर्मचारियों में आंदोलन की तैयारियां शुरू हो गई हैं। यदि समय रहते शासन स्तर पर कोई सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो जल प्रदाय, सफाई व्यवस्था, कर वसूली, स्ट्रीट लाइट रखरखाव और अन्य आवश्यक नगरीय सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इसका सीधा असर आम नागरिकों पर पड़ने की आशंका है। कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब शासन ने हर माह समय पर वेतन भुगतान के निर्देश जारी कर रखे हैं, तो फिर हजारों कर्मचारियों को महीनों तक वेतन के लिए इंतजार क्यों करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का मानना है कि इस व्यवस्था में मौजूद खामियों और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।