सक्ती शहर में 31 मई से 8 जून तक होगा श्रीमद भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का आयोजन

विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी के सानिध्य में पंडित कृष्णा तिवारी करेंगे कथा वाचन
सक्ती – सक्ती शहर की हटरी धर्मशाला में आगामी 31 मई से 8 जून 2026 तक श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया है।यह कार्यक्रम छत्तीसगढ़ शासन के सेवानिवृत एडिशनल कलेक्टर अनुपम तिवारी एवं छत्तीसगढ़ शासन स्कूल शिक्षा विभाग सक्ती में पदस्थ श्रीमती संगीता तिवारी परिवार द्वारा आयोजित है। जिसमें विद्वान पंडित भोलाशंकर तिवारी जी के पावन सानिध्य में पंडित कृष्णा तिवारी सुप्रसिद्ध भागवत कथा वाचक द्वारा व्यास पीठ पर विराजमान होकर अपनी अमृतमय वाणी से कथा का रसपान कराया जाएगा। उपरोक्त जानकारी देते हुए आयोजक परिवार के सदस्यों ने बताया कि 31 मई 2026 दिन- रविवार को प्रथम दिवस भव्य कलश यात्रा शाम 5:00 बजे निकलेगी
श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन के होंगे अलग-अलग कार्यक्रम
श्रीमद् भागवत कथा के दौरान प्रतिदिन दोपहर 3:00 से कथा प्रारंभ होगी। 1 जून 2026 दिन- सोमवार को बेदी पूजन, गोकरण, धुंधकारी चरित्र कथा प्रारंभ, 2 जून 2026 दिन- मंगलवार को कपिल अवतार शिव सती चरित्र, ध्रुव चरित्र 3 जून 2026 दिन- बुधवार को जड़ भरत चरित्र, अजामिल चरित्र, नर्सिंग अवतार, 4 जून 2026 दिन-गुरुवार को गजेंद्र मोक्ष वामन अवतार, श्री राम श्री कृष्णा प्राकट्य प्रसंग, 5 जून 2026 दिन- शुक्रवार को बाल लीला, माखन चोरी, गोवर्धन पूजन, 6 जून 2026 दिन- शनिवार को महारास।कंस वध, रुक्मणी विवाह। 7 जून 2026 दिन- रविवार को श्यामंतक कथा, सुदामा चरित्र, परीक्षित मोक्ष, चढ़ोतरी एवं अंतिम दिवस 8 जून 2026 दिन- सोमवार को तुलसी वर्षा।पूर्णाहुति सहस्त्रधारा एवं महाप्रसाद कार्यक्रम होगा
आयोजन को सफल बनाने में जुटा तिवारी एवं वाजपेई परिवार
श्रीमद भागवत कथा के आयोजन को लेकर जहां तिवारी एवं बाजपेई परिवार सक्ती जोर-जोर से जुटा हुआ है. तो वहीं स्मृतिशेष श्रीमती नेमां तिवारी, स्मृतिशेष श्रीमती सोनाबाई तिवारी, स्मृतिशेष लक्ष्मी प्रसाद तिवारी, स्मृतिशेष शंकर प्रसाद तिवारी स्मृतिशेष श्रीमती निर्मला बाजपेई, स्मृतिशेष विजेंद्र तिवारी एवं स्मृतिशेष लक्ष्मी नारायण बाजपेई एवं स्मृति से श्रीमती कविता तिवारी की पुण्य स्मृति में अनुपम तिवारी एवं श्रीमती संगीता तिवारी द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया गया है जिसके लिए श्रीमती रश्मि तिवारी, अनुराग तिवारी, श्रीमती स्वाति तिवारी, रामश्री, आदर्श, गरिमा, पुष्य मित्र, गौरांग तिवारी एवं वाजपेई परिवार जोर-जोर से लगा हुआ है। आयोजक परिवार ने सभी श्रद्धालु भक्त जनों को सह परिवार इस श्रीमद् भागवत कथा उत्सव में पहुंचकर कथा का श्रवण कर पुण्य का लाभ लेने की अपील की है
श्रीमद् भागवत कथा श्रवण का है अपना महत्व
श्रीमद् भागवत कथा का श्रवण जहां हमारे जीवन को एक नई दिशा देता है। तो वही भागवत कथा में स्पष्ट है
कर्म पर अधिकार केवल अपने कर्म (कर्तव्य) पर ध्यान दें,उसके फल पर नहीं। आत्मा अमर है आत्मा न जन्म लेती है, न मरती है;शरीर केवल एक वस्त्र की तरह है। परिवर्तन नियम है परिवर्तन संसार का नियम है, इसलिए बदलाव से न डरें। स्वार्थरहित कर्म कर्म को त्यागें नहीं, बल्कि कर्म के फल की इच्छा को त्यागें (निष्काम कर्म)। मन की शुद्धिः यदि आप मन को नियंत्रित नही करेंगे, तो यह आपका सबसे बड़ा दुश्मन बन जाएगा। विश्वास का फल व्यक्ति जैसा विश्वास करता है, वह वैसा ही बन जाता है। सकारात्मक सोच जो हुआ, वह अच्छा था; जो हो रहा है, अच्छा हो रहा है; जो होगा, वह भी अच्छा ही होगा। समर्पण (शरणगति) सब कुछ मुझे समर्पित कर दो, मैं तुम्हें सभी पापों से मुक्त कर दूँगा। ज्ञान ही परम शक्ति हैः ज्ञान के समान पवित्र करने वाली शक्ति इस दुनिया में कोई नहीं है। अहंकार का त्याग ‘मैं’ और ‘मेरा’ का अहंकार ही दुखों का कारण है। ध्यान जब मन स्थिर और शांत हो, तब आप ईश्वर को महसूस कर सकते हैं। ज्ञान और कर्म एक हैं ज्ञानी व्यक्ति जानता है कि कर्म और ज्ञान अलग नही हैं। संतुलित जीवन न बहुत अधिक खाएं, न बहुत कम; न बहुत सोएं, न बहुत जागें- जीवन में संतुलन लाएं। डर पर विजयः जो मृत्यु से नही डरता, वह वास्तव में जीवन को समझता है। सब में ईश्वर जो मुझे हर प्राणी में देखता है, वही वास्तव में मुझे देख पाता है। इंद्रिय निग्रह जो व्यक्ति अपनी इंद्रियों पर नियंत्रण नही रखता, वह भटक जाता है। धैर्य और सहनशीलता सुख-दुख को समान समझने वाला व्यक्ति ही सच्चा योगी है। कर्म ही पूजाः अपने कर्तव्यों का पालन करना ही सबसे बड़ी ईश्वर की पूजा है।


