सक्ती जिले में काला झंडा दिखाने को लेकर चर्चा गर्म, किसने किया कलेक्टर को गुमराह? क्या होगी कार्यवाही?

सक्ती – जिले के नवपदस्थ कलेक्टर जय श्री जैन द्वारा कार्यभार लेते ही जिले में प्रशासनिक कसावट लाने सख्त नजर आ रही हैं। शासन की सभी योजनाओं को लेकर उनके द्वारा समीक्षा बैठक लेते हुए सभी विभाग के अधिकारियों को आम जनता तक लाभ पहुंचाने निर्देश भी दिया है। इसी बीच कल 11 सितंबर 2026 को केंद्रीय कृषि मंत्री शिव राज सिंह चौहान सहित मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, उप मुख्यमंत्री, प्रभारी मंत्री सहित सांसद एवं विधायक की मौजूदगी में सफलता पूर्वक कार्यक्रम संपन्न हुआ। इस कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष ईश्वर साहू ने काला झंडा दिखाकर कार्यक्रम को प्रभावित करने की कोशिश की गई लेकिन पुलिस ने उसे तत्काल गिरफ्तार करते हुए उन्हें नजर बंद कर दिया। इस पूरे मामले में बड़ी हैरानी की बात है कि काला झंडा दिखाने को लेकर ईश्वर साहू के द्वारा 9 सितंबर 2026 को कलेक्टर कार्यालय शाखा में एक पत्र भी दिया था जिसकी पावती अब सोशल मीडिया में वायरल हो रही है। इस पत्र को लेकर चर्चा तेज हो गई है कि आखिरकार कलेक्टर के नाम पर केंद्रीय मंत्री के कार्यक्रम में काला झंडा दिखाने जैसे पत्र को आवक – जावक में किसके कहने पर रिसीव करते हुए पावती दी गई? इतना गंभीर विषय को लेकर किसी व्यक्ति ने जब पत्राचार किया तो उसकी जानकारी कलेक्टर तक क्यों नहीं पहुंचाई गई? संबंधित जिम्मेदार अधिकारी ने स्वयं संज्ञान क्यों नहीं लिया? इसके पीछे का वास्तविक दृश्य क्या था? इसकी जांच होनी चाहिए। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि तात्कालीन कलेक्टर के कार्यकाल में आवक – जावक में बैठे कर्मचारी सामान्य आवेदन को भी लेने में भारी नियम दिखाते थे और सवाल भी करते थे जिसमें पत्रकारों को भी दिक्कत होती थी। फिर नए कलेक्टर के पदस्थ होते ही इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई? क्या ये किसी साजिश के हिस्सा तो नहीं था? बड़ा सवाल है जिसकी जांच होनी चाहिए। ऐसा इसलिए कहा जा रहा है क्योंकि नए कलेक्टर के पदस्थ होते ही पतेरापाली समिति में फर्जी खाद का पिछले दो महीने से लंबित मामले में किसानों के हित में त्वरित संज्ञान लेते हुए खुद कार्यवाही करने निर्देश दी और कार्यवाही भी हुई जिसका प्रमाण है कि रामन साहू को समिति से हटा दिया गया है। ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि यदि काला झंडा दिखाने की बात की जानकारी कलेक्टर को होती तो निश्चित ही संज्ञान में लेते हुए प्रशासन को अलर्ट करते और कार्यक्रम में व्यवधान होने नहीं देते। इसके पीछे का असली सच क्या है? और कौन जिम्मेदार है? इस पर अब जांच की सुई मंडरा रही है।
