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चंद्रपुर के जाने-माने शिक्षक बिक्रम महानंदा का निधन

शिक्षा के जगत में अपूर्णीय क्षति  सर्वोदय पब्लिक स्कूल परिवार ने कहा—एक शिक्षक नहीं, एक अपनापन खो दिया हमने

चंद्रपुर के जाने-माने शिक्षक बिक्रम महानंदा का निधन kshititech

सक्ती –  चंद्रपुर सर्वोदय पब्लिक स्कूल के लोकप्रिय एवं समर्पित शिक्षक बिक्रम महानंदा सर के आकस्मिक निधन से पूरे चंद्रपुर, गोपालपुर एवं आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर है। उनके निधन से शिक्षा जगत और सर्वोदय पब्लिक स्कूल परिवार को गहरी क्षति पहुंची है। बिक्रम महानंदा सर वर्ष 2014 से सर्वोदय पब्लिक स्कूल में अपनी सेवाएं दे रहे थे। लगभग 12 वर्षों के लंबे सेवाकाल में उन्होंने हजारों विद्यार्थियों को शिक्षा, संस्कार और मार्गदर्शन दिया। वे पूरे चंद्रपुर क्षेत्र में अपने सरल स्वभाव, उत्कृष्ट शिक्षण शैली और विद्यार्थियों के प्रति आत्मीय व्यवहार के लिए विशेष रूप से जाने जाते थे।
चंद्रपुर क्षेत्र के जाने-माने और लंबे समय तक शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं देने वाले शिक्षकों में बिक्रम महानंदा सर का नाम बेहद सम्मान के साथ लिया जाता था। चंद्रपुर ही नहीं, बल्कि गोपालपुर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों एवं अभिभावकों के बीच भी वे बेहद लोकप्रिय थे। उनके पढ़ाए हुए विद्यार्थियों की बड़ी संख्या आज भी उनकी शिक्षाओं और संस्कारों को याद करती है। उनका विद्यालय से जुड़ाव केवल एक शिक्षक के रूप में नहीं था। अपने 12 वर्षों के सेवाकाल में उन्होंने विद्यालय परिवार के साथ ऐसा आत्मीय रिश्ता बनाया कि वे धीरे-धीरे विद्यालय के एक शिक्षक से बढ़कर परिवार के अभिन्न सदस्य बन गए। उनका सरल व्यवहार, बच्चों के प्रति स्नेह, सहकर्मियों के साथ आत्मीयता और अपने कार्य के प्रति समर्पण उन्हें एक अलग पहचान देता था। यही कारण है कि उनके आकस्मिक निधन की खबर से विद्यार्थी, अभिभावक, शिक्षक और क्षेत्र के अनेक लोग स्तब्ध हैं। सर्वोदय पब्लिक स्कूल परिवार ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि “आज हमने केवल एक शिक्षक नहीं, बल्कि अपने परिवार का एक ऐसा सदस्य खो दिया है, जिसकी कमी कभी पूरी नहीं हो सकेगी।” महानंदा सर ने अपने जीवन में जो ज्ञान, संस्कार, स्नेह और मार्गदर्शन विद्यार्थियों को दिया, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत है। उनकी यादें उनके विद्यार्थियों, सहकर्मियों और उनसे जुड़े हर व्यक्ति के दिल में हमेशा जीवित रहेंगी। विद्यालय परिवार ने कहा कि कुछ रिश्ते पद या जिम्मेदारी से नहीं, बल्कि समय, स्नेह और अपनापन से बनते हैं। महानंदा सर ने अपने 12 वर्षों के सेवाकाल में विद्यार्थियों और पूरे विद्यालय परिवार के साथ ऐसा ही रिश्ता बनाया था। सर्वोदय पब्लिक स्कूल परिवार ने दिवंगत आत्मा को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए ईश्वर से प्रार्थना की कि वे उन्हें अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिवार, विद्यार्थियों, सहकर्मियों और समस्त शुभचिंतकों को इस अपूरणीय क्षति को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
“सर, आपकी कमी कभी पूरी नहीं हो पाएगी। आपकी यादें, आपका स्नेह और आपके दिए संस्कार हमेशा हमारे साथ रहेंगे।”