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सालाना अनुदान राशि मिलने के बाद भी मरम्मत और रंग रोगन को तरस रहा विद्यालय भवन

सालाना अनुदान राशि मिलने के बाद भी मरम्मत और रंग रोगन को तरस रहा विद्यालय भवन kshititech

सक्ती / बिर्रा- विकासखंड बम्हनीडीह के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा में सालाना लगभग अस्सी हजार रुपए अनुदान राशि के रूप में  विद्यालय भवन को मरम्मत और रंग रोगन लिपाई पोताई करने के लिए शासन के द्वारा सीधे प्राचार्य को दिया जाता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा के भवन को पिछले 10 सालों से मरम्मत और लिपाई पोताई का काम विद्यालय के प्राचार्य एफ एल साहू के द्वारा आज तक नहीं कराया गया है। विद्यालय भवन मरम्मत और रंग रोगन के लिए तरस रहा है।जिसके कारण अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
         गौरतलब है कि जांजगीर चांपा जिला के विकासखंड बम्हनीडीह के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा में प्रत्येक वर्ष शासन के द्वारा विद्यालय में छात्र-छात्राओं के दर्ज संख्या के हिसाब से लगभग अस्सी हजार रुपए अनुदान राशि के रूप में विद्यालय भवन को मरम्मत और रंग रोगन लिपाई पोताई कराने के लिए छत्तीसगढ़ शासन के द्वारा सीधे प्राचार्य को उनके बैंक खाता नंबर में दिया जाता है। लेकिन मजेदार बात यह है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा के भवन को पिछले 10 सालों से मरम्मत और लिपाई पोताई का काम विद्यालय के प्राचार्य एफ एल साहू के द्वारा आज तक नहीं कराया गया है। जिसके कारण अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इस संबंध में शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा में अध्ययन कर रहे छात्र-छात्राओं के अभिभावकों ने बताया कि इस विद्यालय में शाला अनुदान के राशि लगभग 80000 रुपए सालाना मिलने के बाद भी स्कूल परिसर में पानी भरा हुआ है। इसके साथ ही विद्यालय भवन की छत से पानी टपक रहा है। पिछले लगभग 10 वर्षों से विद्यालय भवन का रंग रोगन, लिपाई पोताई विद्यालय के प्राचार्य एफएल साहू के द्वारा नहीं कराया गया है। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा के खेल मैदान में बरसाती पानी का जमाव होने और विद्युत तार का हवा में झुलने से हर समय दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। विद्यालय के   अहाता का पिछले कई वर्षों से लिपाई पोताई नहीं हुआ है। जिसके कारण यह भवन काफी जीर्ण शीर्ण और जर्जर हो चुका है। प्रसाधन कक्ष में भी गंदगी का आलम है। टॉयलेट कमरा में साफ सफाई और फिनाईल छिड़काव का अभाव बना हुआ है। छात्र-छात्राओं के बैठने के लिए कुर्सी टेबल का भी कई वर्षों तक मरम्मत नहीं करवाने से टूटे-फूटे कुर्सी टेबल बरसात के दिनों में लावारिस की तरह इधर-उधर बिखरे पड़े दिखाई दे रहे हैं।  प्राचार्य के द्वारा शासन के नियमों को ताख में रखकर कक्षा छठवीं से आठवीं तक के बच्चों को निशुल्क भरती लेने से मना करते हैं। शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा के प्राचार्य एफ एल साहू के द्वारा एडमिशन फॉर्म बच्चों को वितरण किया जाता है और उनके साथ में प्रत्येक छात्र-छात्राओं से 20 रुपए लिया जाता है। जो जांच का विषय है। प्राचार्य के द्वारा शिक्षा के अधिकार अधिनियम 2009 का मजाक बना कर रख दिया गया है। प्राचार्य जी का वेतन लाख रुपए के लगभग है। उसके बावजूद भी शाला अनुदान की राशि और मिडिल स्कूल के बच्चों से एडमिशन के नाम पर 20-20 रुपये लेना छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों के समझ से परे हैं। यह जांच का विषय बना हुआ।
       बहरहाल कारण चाहे जो भी हो लेकिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बिर्रा के प्राचार्य एफएल साहू के कार्यशैली से छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अभि भावकों ने जिला के मुखिया कलेक्टर से जांच करा कर कड़ी कार्रवाई करने की मांग किए हैं।