मुक्तिधाम की सरकारी भूमि पर 25 वर्षों से कब्जे का आरोप, कलेक्टर से शिकायत

सक्ती – जिले के नया बाराद्वार तहसील अंतर्गत ग्राम जर्वे में मुक्तिधाम एवं श्मशान घाट की शासकीय भूमि पर लंबे समय से कथित अवैध कब्जे का मामला सामने आया है। ग्रामीणों ने इस संबंध में कलेक्टर, एसडीएम एवं तहसीलदार को लिखित शिकायत सौंपकर तत्काल कार्रवाई की मांग की है। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि ग्राम की सार्वजनिक उपयोग की भूमि, जो मुक्तिधाम और श्मशान घाट के लिए आरक्षित है, उस पर पिछले 20 से 25 वर्षों से अवैध रूप से खेती-बाड़ी और फसल उत्पादन किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इससे मुक्तिधाम एवं श्मशान घाट की उपयोगिता प्रभावित हो रही है और अंतिम संस्कार जैसी आवश्यक गतिविधियों में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार खसरा नंबर 459 रकबा 1.03 एकड़ मुक्तिधाम तथा खसरा नंबर 460 रकबा 1.10 एकड़ भूमि श्मशान घाट के लिए आरक्षित है। आरोप है कि इन सार्वजनिक स्थलों की भूमि पर कब्जा कर निजी उपयोग किया जा रहा है।
उपसरपंच पर लगाए गए आरोप
शिकायत में ग्राम पंचायत के उपसरपंच पर शासकीय भूमि का दुरुपयोग करने और पंचायत पद का लाभ उठाकर कब्जा बनाए रखने का आरोप लगाया गया है। ग्रामीणों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने तथा कब्जा हटाकर भूमि को मूल स्वरूप में वापस लाने की मांग की है।
कई शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई
ग्रामीणों का कहना है कि इस मामले को लेकर पूर्व में भी कई बार प्रशासन का ध्यान आकर्षित कराया गया। वर्ष 2024 और 2025 में विभिन्न अधिकारियों को शिकायतें दी गईं, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। आरोप है कि जांच के नाम पर अधिकारियों ने शिकायतकर्ताओं को बुलाया, लेकिन मौके पर पहुंचकर स्थिति का सत्यापन नहीं किया गया।
15 दिन में कार्रवाई नहीं तो हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
शिकायतकर्ताओं ने प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि 15 दिनों के भीतर अतिक्रमण हटाने और जांच की दिशा में प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे न्याय के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने कहा कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि को कब्जामुक्त कराना प्रशासन की जिम्मेदारी है और इसमें किसी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी निगाहें
मामला शासकीय भूमि और सार्वजनिक उपयोग से जुड़ा होने के कारण पूरे क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब ग्रामीणों की निगाहें प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। यदि शिकायतों में लगाए गए आरोप सही पाए जाते हैं तो यह पंचायत व्यवस्था और शासकीय भूमि संरक्षण से जुड़ा गंभीर मामला साबित हो सकता है।




