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अघरिया समाज के बाल सभा में सामुदायिक भवन का लोकार्पण

अघरिया समाज के बाल सभा में सामुदायिक भवन का लोकार्पण kshititech

शिक्षा सबसे बड़ी ताकत : ओ पी चौधरी

सामाजिक विकास के लिए अपनों का टांग खींचने के बजाय हाथ खींचना होगा

सक्ती-  शिक्षा सबसे बड़ी ताकत है जिससे आप सब कुछ हासिल कर सकते हैं इसलिए समाज मेंं शिक्षा को प्रोत्साहित करें, यह उद्गार वित्त मंत्री ओ पी चौधरी ने अखिल भारतीय अघरिया समाज, जांजगीर के अघरिया सामुदायिक भवन के लोकार्पण कार्यक्रम के मुख्य अतिथि की आसंदी से व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा के दम पर ही मैने सफलता की हर मंजिल हासिल किया है। इन पलों में अति विशिष्ट अतिथि खनिज विकास निगम के अध्यक्ष सौरभ सिंह ने अघरिया समाज को मेहनतकश समाज बताते हुए कहा कि मैं हमेशा अघरिया समाज के विकास के लिए तत्परता के साथ खड़ा हूं। केंद्रीय अध्यक्ष ऊषा पटेल ने समाज में एकता और अनुशासन पर जोर देते हुए कहा कि सामाजिक स्तर के लिए प्रतिबद्ध हैं। आज कार्यक्रम के संयोजक पूर्व महासचिव एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि हमें समाज के विकास के लिए अपने लोगों के टांग खींचने के बजाय हाथ खींचना चाहिए तथा हम सब परस्पर समन्वय के साथ समाज की प्रगति हेतु योगदान सुनिश्चित करें।
इस अवसर पर पूर्व विधायक अंबेश जांगड़े, पूर्व सांसद कमला पाटले, जनपद पंचायत अध्यक्ष  शगुन देव अघरिया, सभापति द्वय संगीता देवेंद्र गौतम एवं शंकर लाल गौतम के साथ ही अघरिया समाज के महासचिव कामता पटेल, महिला संयोजिका शशिकला, क्षेत्रीय अध्यक्ष रघुलाल कौशिक, संजय पटेल, कुशल पटेल, आर्यभट्ट शांडिल्य, ब्रजेश गौतम, दिलीप कौशिक, पवन कौशिक, गोमती भारद्वाज,  पवन कौशिक आदि सामाजिक बंधुओंनकी सक्रिय सहभागिता रही।
अघरिया सामुदायिक भवन कापन के विशाल परिसर में प्रातः बाल सभा का शुभारंभ उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया पश्चात अतिथियों स्वागत के साथ स्वागत भाषण रघुलाल कौशिक तथा आय-व्यय प्रतिवेदन का पठन आर्यभट्ट शांडिल्य ने किया तो वहीं सभा को केंद्रीय अध्यक्ष ऊषा पटेल, उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल, क्षेत्रीय अध्यक्ष कुशल पटेल ने हुई संबोधित करते हुए सामाजिक एकता और विकास में योगदान सुनिश्चित करने का आग्रह किया।
पश्चात अपरान्ह अघरिया सामुदायिक भवन का लोकार्पण अभ्यागतों के द्वारा श्रीफल फोड़कर एवं फीता काट कर किया। आज के आयोजन सामाजिक बंधुओं में नारीशक्तियों के सैकड़ों की संख्या में उपस्थिति और उत्साह ने आयोजन को ऐतिहासिक बना दिया।