सक्ती

रस रूप श्री कृष्ण ही है रासलीला देह की लीला नहीं बल्कि  आत्मा का परमात्मा से मिलन का तादात्म्य  भाव है – आचार्य राजेंद्र जी महाराज

रस रूप श्री कृष्ण ही है रासलीला देह की लीला नहीं बल्कि  आत्मा का परमात्मा से मिलन का तादात्म्य  भाव है - आचार्य राजेंद्र जी महाराज kshititech

सक्ती – एसडी महाविद्यालय नवागढ़ में आयोजित श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ महोत्सव के पांचवें दिन आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने दशम स्कंध के पूर्वार्ध में 29 में अध्याय से 33 वे । अध्याय तक जिसे रास पंच अध्यायी कहा गया है ,। आचार्य द्वारा विस्तार से वर्णन करते हुए बताया गया कि हिंदी साहित्य में रसराज की उपाधि श्रृंगार रस को दिया गया है और श्रृंगार रस के देवता साक्षात भगवान श्री कृष्णा है । शरद ऋतु की पूर्णिमा की रात्रि आने पर श्री कृष्ण ने गोपियों के साथ महारास लीला किया । रस रूप श्री कृष्ण ही है रासलीला देह की लीला नहीं बल्कि  आत्मा का परमात्मा से मिलन का तादात्म्य  भाव है। और रासलीला केवल गोपियों का ही विषय है । गोपी भाव होने पर ही रस को समझा जा सकता है। गोपी का अर्थ — गो अर्थात मनुष्य की इन्द्रियां और पी का अर्थ पीना या आत्मसात करना। जो भगवान की गोपी बन सकते है। रस का आनंद उन्हें ही आता है भले ही वह स्त्री हो या पुरुष। स्वयं भगवान भोलेनाथ महारास। मैं गोपी बनाकर नृत्य कर रहे थे । इस लीला में भगवान श्री कृष्ण ने योग माया का आश्रय लिया था जिसके परिणाम स्वरूप जितनी गोपिया थी उतने ही कृष्ण भी वहां पर रस में नृत्य कर रहे थे किंतु इन गोपियों को केवल एक ही कृष्णा और वह भी अपने पास दिख रहे थे। दुनिया की कोई श्रेष्ठ वास्तु जब किसी एक के पास हो जाए तो उसके मन में अहंकार हो ही जाता है । सभी गोपियों ने सोचा श्री कृष्णा केवल मेरे ही पास हैं वह भी इसलिए की मैं उनकी सबसे प्यारी गोपी हूं और मेरी सुंदरता और संपूर्ण गुण सबसे श्रेष्ठ है  श्री भगवान कहते हैं मैं और मेरे किसी भक्त के बीच अहंकार ही दीवार बनकर खड़ी हो जाती है जिसके कारण मैं किसी भक्तों को दिखाई नहीं देता और फिर उसे अहंकार करने वाले मनुष्य का मैं परित्याग कर देता हूं । गोपियों के अहंकार भाव के कारण ही श्री कृष्णा इन गोपियों का परित्याग कर अदृश्य हो गए थे । और गोपियों कृष्णा विरह की अग्नि में जलने लगी अपने अहंकार को त्याग कर क्षमा मांगने लगे कृष्ण को खोजने भड़कने लगी । अहंकार को त्यागने और मन । की आतुरता बढ़ाने पर ही भगवान मिलते हैं।
    रास मंडल में श्री कृष्णा के प्रकट होने पर गोपियों को दिव्य आनंद प्राप्त हुआ । आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने बताया कि श्री कृष्णा । लीला पुरुषोत्तम कहलाते हैं वह जगतगुरु भी हैं और एक क्रांतिकारी देवता है जिन्होंने जल को प्रदूषण मुक्त करने तथा ताल वन के फल को देनुकासुर। दानव से मुक्त करने के साथ ही भौमासुर से थल अर्थात धरती । को मुक्त करने का संकल्प लिए थे । और मुक्त कर अपना संकल्प भी पूरा किया । श्री कृष्ण की विविध लीलाओं में आनंद और अद्भुत ज्ञान तथा समाज के लिए चेतना और भविष्य की दूरदर्शिता छिपी हुई है । इसलिए श्री कृष्णा ने जो संदेश दिया मानव समाज को उसका पालन करना चाहिए और श्री राम ने जो किया वह अपने जीवन में करना चाहिए।
      पांडे परिवार द्वारा आयोजित श्रीमद् भागवत कथा में प्रतिदिन नवागढ़ नगर एवं क्षेत्र के कथा प्रेमी कथा श्रवण एवं सत्संग का लाभ प्राप्त कर रहे हैं
    श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ के आयोजन श्रीमती वर्षा आनंद पांडे य। द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने आने की अपील की गई है।