सक्ती

आदिवासी कांग्रेस जिलाध्यक्ष जागेश्वर सिंह राज की पहल—डॉ. चरण दास महंत से मुलाकात, जल-जंगल-जमीन के अधिकारों पर उठी मजबूत आवाज

सक्ती- छत्तीसगढ़ में आदिवासी समाज के अधिकारों को लेकर एक महत्वपूर्ण पहल सामने आई है। दिल्ली से लौटे आदिवासी प्रतिनिधिमंडल ने वरिष्ठ कांग्रेस नेता डॉ. चरण दास महंत से सौजन्य मुलाकात कर जल, जंगल और जमीन से जुड़े मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की। इस पहल का नेतृत्व आदिवासी कांग्रेस के जिला अध्यक्ष जागेश्वर सिंह राज ने किया, जिसे समाज के हित में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
जागेश्वर सिंह राज ने जानकारी देते हुए बताया कि दिल्ली में विभिन्न मंचों पर आदिवासी अधिकारों को लेकर आवाज उठाने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने राज्य स्तर पर नेतृत्व को अवगत कराने का निर्णय लिया। इसी क्रम में डॉ. महंत से मुलाकात कर उन्हें जमीनी हकीकत और आदिवासी समाज की वर्तमान चुनौतियों से अवगत कराया गया।
मुलाकात के दौरान प्रतिनिधिमंडल ने वन अधिकार कानून के प्रभावी क्रियान्वयन, पारंपरिक संसाधनों पर अधिकार, विस्थापन की समस्याएं और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसरों की कमी जैसे अहम मुद्दों को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि आज भी कई क्षेत्रों में आदिवासी समुदाय अपने मौलिक अधिकारों से वंचित हैं, जिसे दूर करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और संगठित प्रयास जरूरी हैं।
डॉ. चरण दास महंत ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि कांग्रेस पार्टी आदिवासी हितों की रक्षा के लिए सदैव प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि जल, जंगल और जमीन आदिवासी समाज की पहचान और अस्तित्व का आधार हैं, और इनके संरक्षण के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।
जागेश्वर सिंह राज ने आगे कहा कि इस मुलाकात का उद्देश्य केवल समस्याओं को सामने रखना नहीं, बल्कि एकजुटता का संदेश देना भी था। उन्होंने बताया कि आदिवासी समाज कांग्रेस पार्टी के साथ मिलकर अपने अधिकारों की लड़ाई को और मजबूत करेगा तथा संगठन को जमीनी स्तर तक सशक्त बनाने का कार्य जारी रहेगा।
इस अवसर पर प्रतिनिधिमंडल के अन्य सदस्यों ने भी अपने विचार साझा किए और क्षेत्रीय समस्याओं के समाधान के लिए ठोस रणनीति बनाने पर जोर दिया। सभी ने एक स्वर में कहा कि जब तक आदिवासी समाज को उनके अधिकार पूरी तरह नहीं मिल जाते, तब तक यह संघर्ष जारी रहेगा।
इस मुलाकात को आदिवासी अधिकारों की दिशा में एक सकारात्मक पहल माना जा रहा है, जिससे आने वाले समय में नीति निर्माण और जमीनी स्तर पर बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है।