गलत नजर बनी पत्नी की मौत का कारण

विरोध करने पर पति ने गमछे से गला घोंट कर ली जान, आरोपी पति को कोर्ट ने सुनाई उम्रकैद की सजा

सक्ती – सक्ती जिले के जैजैपुर थाना क्षेत्र में पत्नी की गला घोंटकर हत्या करने वाले पति को न्यायालय ने कड़ी सजा सुनाते हुए आजीवन कारावास से दंडित किया है। अपर सत्र न्यायाधीश एफटीसी सक्ती श्रीमती गंगा पटेल ने 9 मार्च को सुनाए फैसले में आरोपी मनोज कुमार टंडन (23 वर्ष) निवासी ग्राम सलनी, थाना जैजैपुर को हत्या का दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास सहित विभिन्न धाराओं में अतिरिक्त सजा और जुर्माना लगाया है। अभियोजन के अनुसार, थाना जैजैपुर में मर्ग क्रमांक 01/2025 के तहत ममता कुमारी टंडन (21 वर्ष) की संदिग्ध मौत की जांच की गई। मृतका की शादी को सात वर्ष से कम समय हुआ था, इसलिए मामला संदिग्ध माना गया। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपी पति मनोज टंडन अपनी साली को मोबाइल पर फोन कर आपत्तिजनक बातें करता था और उसके साथ अकेले मिलने व संबंध बनाने का दबाव डालता था। बताया गया कि 5 जनवरी 2025 को साली ने आरोपी की यह हरकत अपनी बहन ममता को बता दी। इसके बाद ममता ने इस संबंध में अपने पति से सवाल किया, जिससे दोनों के बीच घर के ऊपरी कमरे में तीखा विवाद हो गया। विवाद के दौरान गुस्से में आकर आरोपी ने ममता के गले में पड़े गमछे से उसका गला घोंट दिया, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। घटना के बाद आरोपी ने साक्ष्य मिटाने की कोशिश भी की। उसने हत्या में इस्तेमाल किए गए गमछे को तालाब के पास ले जाकर जलाने का प्रयास किया। गमछा पूरी तरह नहीं जलने पर उसने अधजले गमछे को गड्ढा खोदकर छिपा दिया। बाद में पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जिसमें उसने अपराध स्वीकार कर लिया। उसकी निशानदेही पर अधजला गमछा बरामद किया गया और जब्ती की वीडियोग्राफी भी कराई गई। पंचनामा के दौरान मृतका के गले पर काले निशान पाए गए थे। 6 जनवरी 2025 को कराए गए पोस्टमार्टम में डॉक्टरों ने मौत का कारण गला दबाने से दम घुटना बताया, जिससे यह स्पष्ट हो गया कि यह हत्या का मामला है। पुलिस ने विस्तृत विवेचना के बाद न्यायालय में अभियोग पत्र प्रस्तुत किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने 18 गवाहों के बयान कराए। प्रस्तुत साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोषी करार देते हुए धारा 103 बीएनएस के तहत आजीवन कारावास एवं 5000 रुपये जुर्माना, धारा 238 (क) बीएनएस के तहत 7 वर्ष सश्रम कारावास एवं 3000 रुपये जुर्माना तथा पॉक्सो एक्ट की धारा 12 के तहत 3 वर्ष सश्रम कारावास एवं 2000 रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। प्रकरण में अभियोजन पक्ष की ओर से विशेष लोक अभियोजक (पॉक्सो) मुन्ना पटेल ने प्रभावी पैरवी की।


