तरौद में श्रीमद् भागवत महापुराण कथा के चौथे दिन भागवताचार्य राजेंद्र महाराज ने कृष्ण जन्म की कथा सुनाई


सक्ती – तरौद में चंदेल परिवार द्वारा आयोजित भागवत कथा के चौथे दिन श्री कृष्ण अवतार की कथा का वर्णन करते हुए व्यास पीठ से आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने स्रोतों को बताया कि जब-जब धरती में धर्म और पाप का भार बढ़ता है तब भगवान का अवतार होता है धर्म की रक्षा और धर्म का नाश करने के लिए श्री नारायण अवतार धारण करते हैं ,अट्ठाइसवें द्वापर में श्री कृष्ण के रूप में भगवान का पूर्ण अवतार हुआ और उन्होंने अनेक लीला के माध्यम से धरती से पाप का भार उतारा था। श्रीमद् भागवत की कथा मृत्यु को भी मंगलमय बनाने वाली कथा और इस संसार का सर्वश्रेष्ठ सत्कर्म है। जो किसी मनुष्य के पुण्य अर्जित हो जाने पर पूर्वजों के आशीर्वाद से प्राप्त होता है ।
आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने भगवान नाम की सार्थकता का दृष्टांत बताते हुए अजामिल ब्राह्मण के बारे में बताया कि अजामिल ब्राह्मण एक दासी स्त्री के संसर्ग में आकर अपने ब्राह्मणत्व का नाश कर दिया और अपने पापों और निंदित कर्मों के कारण अधोगति प्राप्त कर रहा था और शरीर के जर्जर होने पर यमदूतों को अपने पास देखकर डर के मारे घबरा कर अपने बेटे नारायण को बुलाने लगा । उसका बेटा नारायण तो नहीं आया किंतु बार-बार नारायण नाम लेने से भगवान नारायण ने अजामिल की पुकार सुन लिया और अपने पार्षदों को भेज कर आज मिल की प्राण रक्षा ही नहीं बल्कि उसे नर्क में जाने से भी बचाया ।आचार्य ने कहा कि यही भगवान के नाम को स्मरण करने और जपने का इस कलयुग में बहुत बड़ा महत्व और पुण्य है । आत्म कल्याण के लिए भगवान नाम का स्मरण ही सर्वोपरि है चौथे दिन के कथा वृत्तांत में बाली और बामन प्रसंग को सुनकर श्रोता भाव विभोर हो गए आचार्य ने बताया कि दान का बड़ा महत्व इस कलयुग में है । राजा बलि ने वामन भगवान को तीन पग भूमि दान करने का संकल्प किया तो भगवान ने पहले पद में स्वर्ग और दूसरे पग में सारी धरती नाप ली और वामन भगवान ने कहा की तीसरा पद कहां रखूं । तब राजा बलि ने दान की महिमा बढ़ाते हुए वामन से कहा कि आप अपना चरण मेरे सिर पर रखकर मुझे ही नाप लीजिए अर्थात मुझे अपना बना लीजिए । अपना सर्वस्व समर्पण कर देने पर भगवान भी राजा बलि के रिनी बन गए और वरदान दिया। की तुम हमेशा के लिए चिरंजीवी बन जाओ और मैं पल प्रतिपल हमेशा तुम्हारी रक्षा करते रहूंगा। कथा श्रवण करने सैकड़ो श्रद्धालु प्रतिदिन दिव्य सत्संग एवं कथा अमृत रसपान के साथ जीवंत झांकियां का आनंद ले रहे हैं । स्मृति शेष गिरधर सिंह एवं पुष्प लता सिंह के स्मृति एवं मोक्ष की पवित्र कामना से आयोजित भागवत कथा के यजमान डॉक्टर प्रतिभा एवं डॉ अनुराग सिंह द्वारा अधिक से अधिक संख्या में कथा श्रवण करने की अपील की गई है ।


