सक्ती बुधवारी बाजार की अनुपयोगी सरकारी जमीनों और जर्जर भवनों पर होगा नवनिर्माण

सक्ती – सक्ती नगरपालिका क्षेत्र के बुधवारी बाजार में लंबे समय से खाली पड़ी सरकारी जमीनों और अनुपयोगी हो चुके जर्जर शासकीय भवनों के दिन अब बहुरने वाले हैं। छत्तीसगढ़ सरकार ने एक विशेष योजना के तहत इस क्षेत्र के पुनर्विकास (नवनिर्माण) प्रोजेक्ट को मंजूरी दे दी है। इस फैसले के बाद अब जल्द ही बुधवारी बाजार क्षेत्र में जनहित के बड़े निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद जग गई है।
अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद खाली हुई थी जमीन
गौरतलब है कि साल 2022 में जिला प्रशासन द्वारा बुधवारी बाजार क्षेत्र में बड़े पैमाने पर अतिक्रमण हटाओ अभियान चलाया गया था। इस कार्रवाई के बाद भारी मात्रा में बेशकीमती सरकारी जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया था। इसके अलावा, इस क्षेत्र में कई ऐसे बड़े शासकीय भवन भी मौजूद हैं, जो लंबे समय से देखरेख के अभाव में अनुपयोगी और जर्जर हो चुके हैं।
पूर्व और वर्तमान परिषद के प्रयासों को मिली सफलता
अतिक्रमण विरोधी अभियान के बाद से ही इस खाली स्थान का जनहित में उपयोग करने के प्रयास शुरू हो गए थे। नगरपालिका परिषद सक्ती की तत्कालीन अध्यक्ष श्रीमती सुषमा दादू जायसवाल ने तत्कालीन कलेक्टर श्रीमती नूपुर राशि पन्ना के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन को इस स्थल पर नवनिर्माण के लिए कई प्रोजेक्ट बनाकर भेजे थे। हालांकि, उस समय इन प्रयासों को गति नहीं मिल सकी।
इसके बाद, वर्तमान नगरपालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल ने इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए कमान संभाली। उन्होंने बुधवारी बाजार क्षेत्र के सुनियोजित विकास और जनकल्याणकारी निर्माण कार्यों के लिए छत्तीसगढ़ शासन से लगातार पत्राचार किया और पुरजोर पैरवी की।
कैबिनेट बैठक में मिली हरी झंडी
नगरपालिका अध्यक्ष श्यामसुंदर अग्रवाल के इन गंभीर प्रयासों को बड़ी सफलता तब मिली, जब 27 अक्टूबर 2026 को आयोजित छत्तीसगढ़ शासन की कैबिनेट बैठक में पूरे प्रदेश के पांच विशेष प्रोजेक्ट्स में सक्ती के इस बुधवारी बाजार प्रोजेक्ट को भी शामिल कर लिया गया। कैबिनेट के इस फैसले के बाद अब शीघ्र ही क्षेत्र के पुराने और जर्जर भवनों को डिस्मेंटल (ढहाने) करने की प्रक्रिया शुरू होगी और खाली जमीनों पर भव्य व उपयोगी जन-निर्माण कार्य कराए जाएंगे।
शहर से दूर नालंदा लाइब्रेरी बनाने पर जनप्रतिनिधियों ने जताई चिंता
इस बीच, स्थानीय जनप्रतिनिधियों ने शासन की महत्वाकांक्षी ‘नालंदा लाइब्रेरी’ योजना को लेकर एक बड़ी विडंबना की ओर ध्यान आकर्षित किया है। जनप्रतिनिधियों का कहना है कि अतिक्रमण हटाओ अभियान के बाद 5 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली नालंदा लाइब्रेरी को इसी बुधवारी बाजार क्षेत्र (शहर के बीचों-बीच) में बनाने का प्रस्ताव भेजा गया था।
लेकिन, अब इस लाइब्रेरी को सक्ती शहर से काफी दूर नेशनल हाईवे के किनारे बनाया जा रहा है। जनप्रतिनिधियों और नागरिकों ने इस पर चिंता जताते हुए कहा कि शहर से इतनी दूर लाइब्रेरी बनने के कारण:
• विद्यार्थियों को भारी और व्यस्त आवागमन (ट्रैफिक) से होकर गुजरना पड़ेगा, जिससे हमेशा दुर्घटनाओं का खतरा बना रहेगा।
• इतनी दूरी तय करने में छात्र-छात्राओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ेगा।
• हाईवे के सुनसान और बाहरी इलाके में होने के कारण असामाजिक तत्वों और बदमाशों का डर भी बना रहेगा।
स्थानीय नागरिकों का मानना है कि यदि नालंदा लाइब्रेरी को भी इसी बुधवारी बाजार के नवनिर्माण प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया जाता, तो शहर के विद्यार्थियों को सुरक्षित और सुलभ माहौल में पढ़ाई की सुविधा मिल सकती थी। बहरहाल, कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद अब बुधवारी बाजार में होने वाले नए विकास कार्यों को लेकर शहरवासियों में भारी उत्साह है।
