सक्ती में डिजिटल रावण का अनूठा जलवा: इस बार हवा में उड़कर चंद्रमा को लंका ले जाता दिखा 10 इंच का ‘चलित रावण’


कलाकार अमित तम्बोली ने लगातार 35वें वर्ष बिखेरा अपनी कला का जादू, 4 मिनट के संवाद और सवर्ण लंका की झांकी को देखने उमड़ रही भारी भीड़
सक्ती – विजयादशमी के पावन पर्व पर जहां एक ओर बड़े-बड़े रावण के पुतलों का दहन किया गया, वहीं सक्ती नगर में एक ऐसा अनोखा और छोटा रावण लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ है, जिसे देखने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंच रहे हैं। स्थानीय हुनरमंद कलाकार अमित तम्बोली ने अपनी 35 वर्षों की अटूट परंपरा को कायम रखते हुए इस वर्ष भी एक बेहद अनूठा 10 इंच का बैटरी चलित रावण तैयार किया है। तकनीकी और कला के इस बेजोड़ संगम को देखने के लिए सक्ती नगर सहित आसपास के ग्रामीण अंचलों से बच्चे, बुजुर्ग और पूरा परिवार जुट रहा है।
हवा में उड़कर पैरों को फैलाता है यह रावण
हर वर्ष रावण को एक नए और आधुनिक अंदाज में पेश करने वाले अमित तम्बोली ने इस बार तकनीक का ऐसा कमाल दिखाया है कि यह लघु रावण हवा में उल्टा उड़ता हुआ दिखाई देता है। इतना ही नहीं, उड़ते हुए यह रावण अपने दोनों पैरों को बार-बार फैलाता है और अपने हाथों से 24 इंच आकार के घूमते हुए चंद्रमा को दबाकर, उसे समुद्र के बीच स्थित सवर्ण लंका तक ले जाता है। झांकी में चारों तरफ समुद्र नुमा जल का सजीव दृश्य और उसके बीचों-बीच जगमगाती सवर्ण लंका का मॉडल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर रहा है।
रावण और चंद्रदेव के संवाद ने जीता दिल
इस पूरी चलित झांकी के दौरान पृष्ठभूमि में लगभग 4 मिनट का एक बेहद प्रभावशाली संवाद चलता है। इस संवाद का सार यह है कि रावण अत्यंत अहंकार में चंद्रदेव से कहता है— “मैं तीनों लोकों को जीत चुका हूं, इसलिए इस चंद्रमा को महादेव के मस्तक के बजाय मेरे मस्तक की शोभा बढ़ाना चाहिए।” इस दमदार संवाद को सुनने और रावण की इस अनोखी कलाकृति को निहारने के लिए लोग टस से मस नहीं हो रहे हैं और देखकर बेहद प्रसन्न हो रहे हैं।
35 सालों से लगातार रच रहे हैं इतिहास
गौरतलब है कि कलाकार अमित तम्बोली पिछले 35 वर्षों से लगातार बिना रुके इस अनोखे रावण की चलित झांकी का निर्माण कर रहे हैं। उनके रावण का अंदाज हर साल बदल जाता है। इससे पहले उनके द्वारा बनाए गए रावण कभी स्केटिंग करते, कभी चश्मा और जूता पहनकर डांस करते, कभी सीढ़ी चढ़ते, तो कभी रस्सी से लटककर ऊपर जाते नजर आ चुके हैं। मोबाइल पकड़कर डांस करने से लेकर, सीता-सीता चिल्लाने और महादेव व हनुमान जी के साथ संवाद करने वाले उनके पिछले प्रयोगों को भी जनता का भरपूर प्यार मिला था। इस वर्ष का यह ‘हवाई रावण’ उनकी कला यात्रा में एक और मील का पत्थर साबित हो रहा है।
