भुगतान नहीं मिलने से टूटा सब्र का बांध: पूर्व आदिवासी महिला सरपंच 3 जून से आमरण अनशन पर बैठेंगी

सक्ती – रनिंग वाटर टेप नल निर्माण कार्य की 3 लाख 25 हजार रुपये की लंबित भुगतान राशि को लेकर ग्राम पंचायत बुंदेली की पूर्व आदिवासी महिला सरपंच चमेली कंवर ने 3 जून से जनपद पंचायत मालखरौदा कार्यालय के सामने आमरण अनशन पर बैठने की घोषणा कर दी है। उनका आरोप है कि कई बार ज्ञापन सौंपने और अधिकारियों से गुहार लगाने के बावजूद केवल आश्वासन मिला, लेकिन आज तक भुगतान नहीं हुआ। पूर्व सरपंच ने बताया कि उनके कार्यकाल में वर्ष 2021 में शासन के निर्देश पर रनिंग वाटर टेप नल निर्माण कार्य कराया गया था। कार्य पूर्ण हुए वर्षों बीत जाने के बाद भी करीब 3.25 लाख रुपये का भुगतान लंबित है। इस संबंध में उन्होंने क्षेत्रीय विधायक, कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ, एसडीएम, तहसीलदार, जनपद पंचायत सीईओ एवं चौकी अड़भार को ज्ञापन सौंपकर भुगतान की मांग की थी, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है। चमेली कंवर का आरोप है कि पीएचई विभाग द्वारा अन्य पंचायतों का भुगतान कर दिया गया, लेकिन ग्राम पंचायत बुंदेली की राशि दुर्भावनापूर्वक रोक दी गई। उन्होंने कहा कि निर्माण सामग्री खरीदने वाले दुकानदार लगातार भुगतान के लिए दबाव बना रहे हैं, जिससे वह मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई बार जनपद पंचायत अधिकारियों से 15वें वित्त आयोग मद से आंशिक भुगतान कराने का आग्रह किया गया, लेकिन यह कहकर टाल दिया गया कि राशि का भुगतान पीएचई विभाग से होगा। नतीजतन आज तक भुगतान नहीं हो सका।
कर्ज और बढ़ते दबाव ने लिया अनशन का रूप
पूर्व सरपंच ने कहा कि दुकानदारों का कर्ज चुकाने के लिए अब उनके पास कोई विकल्प नहीं बचा है। भीषण गर्मी के बावजूद वह 3 जून से आमरण अनशन पर बैठेंगी और जब तक भुगतान नहीं होगा, धरना स्थल नहीं छोड़ेंगी। उन्होंने ज्ञापन में स्पष्ट किया है कि अनशन के दौरान यदि उनकी तबीयत बिगड़ती है तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी।
सीईओ बोले- इस सप्ताह हो सकता है भुगतान
जनपद पंचायत मालखरौदा के मुख्य कार्यपालन अधिकारी तेजेश्वर यादव ने बताया कि संबंधित भुगतान की फाइल आगे बढ़ चुकी है और उनके पास पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि “इस सप्ताह के भीतर राशि का भुगतान होने की संभावना है। पूर्व सरपंच को कुछ दिन और प्रतीक्षा करने के लिए समझाने का प्रयास किया जाएगा।” अब सभी की निगाहें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि भुगतान पहले होता है या फिर पूर्व सरपंच का आमरण अनशन शुरू होता है।




