पेट्रोल-डीजल की मारामारी का सीधा असर किसानों पर,सुबह से शाम तक पंपों में ट्रैक्टरों की लंबी कतारें

डीजल संकट से बढ़ी किसानों की चिंता, जुताई और कटाई कार्य पर मंडराने लगा खतरा, खेती-किसानी का काम प्रभावित
सक्ती – जिले में पिछले एक-दो सप्ताह से जारी पेट्रोल-डीजल संकट अब किसानों के लिए बड़ी मुसीबत बनता जा रहा है। पेट्रोल पंपों में ईंधन की भारी कमी के कारण आम जनता के साथ-साथ किसान भी परेशान हैं। जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों में सुबह से ही ट्रैक्टर, हार्वेस्टर, मोटरसाइकिल और अन्य वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं। कई स्थानों पर किसानों को घंटों इंतजार के बाद भी पर्याप्त मात्रा में डीजल नहीं मिल पा रहा है, जिससे खेती-किसानी के कार्य प्रभावित होने लगे हैं। खेतों में धान की कटाई का काम जारी है, वहीं दूसरी ओर जुताई और अगली फसल की तैयारी भी शुरू हो गई है। ऐसे समय में ट्रैक्टर और हार्वेस्टर के संचालन के लिए बड़ी मात्रा में डीजल की आवश्यकता होती है, लेकिन जिले में बने ईंधन संकट ने किसानों की मुश्किलें कई गुना बढ़ा दी हैं।
पेट्रोल पंपों में ट्रैक्टरों की लंबी कतारें, किसान घंटों कर रहे इंतजार
जिले के कई पेट्रोल पंपों में सुबह से देर रात तक ट्रैक्टरों और हार्वेस्टरों की लंबी लाइनें लगी हुई हैं। किसान अपने कृषि यंत्रों के साथ घंटों पंपों के बाहर खड़े नजर आ रहे हैं। कई किसानों का कहना है कि एक दिन में कई-कई बार पंपों का चक्कर लगाना पड़ रहा है, तब कहीं जाकर थोड़ी मात्रा में डीजल मिल पा रहा है। यदि समय पर कृषि कार्य पूरे नहीं हुए तो आने वाले दिनों में फसल उत्पादन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। किसानों का कहना है कि खेती पूरी तरह डीजल आधारित हो चुकी है और ईंधन के बिना कृषि कार्य लगभग ठप हो जाएगी।
डीजल संकट के डर से किसान कर रहे भंडारण
जिले में लगातार बनी हुई पेट्रोल-डीजल की किल्लत के कारण किसानों में भविष्य को लेकर डर बढ़ता जा रहा है। यही वजह है कि किसान ट्रैक्टर, हार्वेस्टर और मोटरसाइकिलों में अधिक से अधिक मात्रा में पेट्रोल-डीजल भरवाकर भंडारण करने में जुटे हुए हैं।
किसानों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ी तो खेती-किसानी पूरी तरह प्रभावित हो सकती है। इसलिए वे पहले से ही अतिरिक्त डीजल रखने की कोशिश कर रहे हैं ताकि कृषि कार्यों में किसी प्रकार की बाधा न आए।
सरकार और प्रशासन के दावे बेअसर, जमीनी हकीकत अलग
एक तरफ प्रदेश सरकार और जिला प्रशासन लगातार यह दावा कर रहे हैं कि प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की कोई कमी नहीं है और पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध है। प्रशासन द्वारा लोगों से अनावश्यक भंडारण नहीं करने और कृत्रिम संकट पैदा न करने की अपील भी लगातार की जा रही है।
लेकिन जमीनी स्तर पर हालात कुछ और ही कहानी बयां कर रहे हैं। जिले के अधिकांश पेट्रोल पंपों में प्रतिदिन भारी भीड़ उमड़ रही है। ट्रैक्टरों और वाहनों की लंबी कतारें यह साफ संकेत दे रही हैं कि जिले में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य नहीं है। कई पंपों में कुछ घंटों के भीतर ही डीजल खत्म हो जा रहा है, जिससे लोगों में और अधिक अफरा-तफरी का माहौल बन रहा है।
खेती-किसानी पर मंडराया संकट, उत्पादन प्रभावित होने की आशंका
किसानों का कहना है कि खेती का समय बेहद महत्वपूर्ण होता है। यदि समय पर खेतों की जुताई, कटाई और अन्य कृषि कार्य पूरे नहीं हुए तो इसका सीधा असर उत्पादन पर पड़ेगा। वर्तमान समय में कृषि कार्यों की रफ्तार डीजल पर निर्भर है और ईंधन संकट के कारण किसान आर्थिक और मानसिक दोनों रूप से परेशान हो सकते हैं। कई किसानों ने चिंता जताई कि यदि आने वाले दिनों में भी यही स्थिति बनी रही तो कृषि कार्यों में देरी होगी और इसका असर पूरे जिले की खेती पर देखने को मिलेगा। किसानों ने सरकार और प्रशासन से जल्द पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति सामान्य करने की मांग की है।
आम जनता भी परेशान, दिनभर पंपों के चक्कर लगाने को मजबूर
ईंधन संकट का असर केवल किसानों तक सीमित नहीं है। नौकरीपेशा लोग, छोटे व्यापारी, वाहन चालक और आम नागरिक भी पेट्रोल-डीजल की कमी से परेशान हैं। लोग सुबह से लाइन में लग रहे हैं, लेकिन कई बार घंटों इंतजार के बाद भी उन्हें पेट्रोल-डीजल नहीं मिल पा रहा है। स्थिति यह हो गई है कि लोग एक पेट्रोल पंप से दूसरे पंप तक भटकने को मजबूर हैं। जिले में ईंधन संकट ने आम जनजीवन को भी प्रभावित करना शुरू कर दिया है।
प्रशासन से व्यवस्था सुधारने की मांग
किसानों और आम नागरिकों ने शासन-प्रशासन से जल्द स्थिति सामान्य करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि पेट्रोल-डीजल की नियमित आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और पंपों में पर्याप्त मात्रा में ईंधन उपलब्ध कराया जाए, ताकि किसानों को खेती-किसानी के कार्यों में किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।


