सक्ती

पति की लंबी उम्र के लिए महिलाओं ने की वट सावित्री पूजा, व्रत रखकर अखंड सौभाग्यवती होने का मांगा वरदान

सक्ती – ज्येष्ठ अमावस्या के पावन अवसर पर शनिवार को सक्ती नगर सहित पूरे क्षेत्र में वट सावित्री व्रत श्रद्धा, आस्था और पारंपरिक उल्लास के साथ मनाया गया. सुबह से ही वट वृक्ष स्थलों पर सुहागिन महिलाओं की भीड़ उमड़ी. सोलह श्रृंगार से सजी महिलाओं ने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य की कामना करते हुए विधि-विधान से वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की.
क्या है धार्मिक मान्यता ?
धार्मिक मान्यता के अनुसार वट सावित्री व्रत पति-पत्नी के अटूट प्रेम, समर्पण और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. इसी आस्था के साथ महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर बरगद के वृक्ष की पूजा की तथा कच्चा सूत लपेटकर परिक्रमा की.पूजा के दौरान महिलाओं ने सत्यवान-सावित्री की कथा का श्रवण एवं पाठ किया. कई स्थानों पर महिलाओं ने सामूहिक रूप से मंगल गीत गाए.
रीति रिवाज के साथ किया पूजन
पूजन के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक रीति-रिवाजों का पालन करते हुए एक-दूसरे को पूजा में उपयोग किए जाने वाले पंखे से खोइछा दिया. सिंदूर दान कर अखंड सौभाग्य की कामना की. पूजा संपन्न होने के बाद महिलाओं ने परिवार के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लिया. पूरे क्षेत्र में धार्मिक वातावरण और उत्साह का माहौल देखने को मिला.
पारंपरिक परिधानों और आभूषणों से सजी महिलाओं ने पूरे भक्ति भाव से पूजा संपन्न की. महिलाओं ने बताया कि यह व्रत वैवाहिक जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का प्रतीक है. महिलाओं ने परिवार की खुशहाली, संतान की उन्नति और पति की दीर्घायु के लिए विशेष प्रार्थना की. स्थानीय संगीता राकेश गबेल ने बताया कि वट सावित्री व्रत सनातन परंपरा और नारी शक्ति का प्रतीक है. पौराणिक कथा के अनुसार माता सावित्री ने अपने तप, त्याग और दृढ़ संकल्प के बल पर यमराज से अपने पति सत्यवान के प्राण वापस प्राप्त किए थे.तभी से यह व्रत अखंड सौभाग्य और पति की लंबी आयु के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. सुहागिन महिलाएं बरगद के वृक्ष के नीचे पूजा-अर्चना कर सुहाग सामग्री, फल-फूल और प्रसाद अर्पित करती हैं तथा पति की मंगल कामना करती हैं
गबेल समाज की महिलाओं ने प्रतीक्षा बस स्टैंड सक्ती स्थित बट पेड़ के नीचे वट सावित्री की पूजा कर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना की जिसमे संगीता राकेश गबेल ,प्रमिला जितेश,रीना संजीव,मुस्कान राज,इंदु शरद,संगीता नंदकिशोर,फूलेश्वरी राजेंद्र,ममता राजेश, विमला रेमन्त,अनुपमा हितेश, होम वर्मा संजय, चन्द्रा केशव और साथ ही मुहल्ले की बहुत सारी महिलाये मिलकर एक साथ पूजा किए।
वहीं पंडित श्री राधेश्याम शर्मा राम मंदिर पुजारी ने बताया कि वट सावित्री व्रत ज्येष्ठ मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या को मनाया जाता है.इस व्रत का मुख्य उद्देश्य पति की लंबी आयु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करना है. सावित्री ने अपने पतिव्रत धर्म के बल पर यमराज से भी अपने पति के प्राण वापस प्राप्त किए थे, जिसके कारण यह व्रत भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है.इस अवसर पर महिलाओं ने कथा श्रवण, पूजन और हवन कर ईश्वर से परिवार के कल्याण की प्रार्थना की।