सक्ती

आई जी दफ्तर बिलासपुर तक पहुंचा परिवार- न्याय अब भी अधर में

करही गोलीकांड: 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली , हाईटेक दावों की खुली पोल

बिर्रा-   जांजगीर चांपा जिला के अंतर्गत पुलिस थाना बिर्रा क्षेत्र के ग्राम करही जिला सक्ती में 23 अप्रैल की दरमियानी रात्रि में हुए बहुचर्चित गोलीकांड और 19 वर्षीय आयुष कश्यप हत्याकांड को लगभग 15 दिन से अधिक समय बीत चुका है। लेकिन पुलिस अब तक किसी भी मुख्य आरोपी तक पहुंचने में नाकाम साबित हो रही है। जिस घटना ने पूरे क्षेत्र के अलावा जिला सहित समूचे छत्तीसगढ़ राज्य को दहला दिया था। वह अब कानून व्यवस्था और जांच प्रणाली की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है। पीड़ित परिवार ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर पहुंचकर न्याय दिलाने की गुहार लगाई है। बिलासपुर रेंज आईजी रामगोपाल गर्ग ने पदभार संभालते ही स्मार्ट पुलिसिंग, हाईटेक मॉनिटरिंग और टेक्नोलॉजी से अपराधियों तक पहुंचने के बड़े-बड़े दावे किए थे। कहा गया था कि “त्रिनयन” और “सशक्त” जैसे ऐप अपराधियों की पहचान और गिरफ्तारी को तेज करेंगे।  क्यू आर कोड के जरिए पीड़ित सीधे बड़े अफसरों तक पहुंच सकेंगे और थानेदारों की मनमानी पर लगाम लगेगी। लेकिन मजेदार बात यह है कि बिर्रा थाना क्षेत्र के ग्राम करही गोलीकांड ने इन तमाम दावों की जमीनी हकीकत खोलकर रख दी है। 15 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली हैं। 35 जवान जांच में लगे होने, हजारों CCTV फुटेज और कॉल डिटेल खंगालने के दावों के बावजूद न कोई ठोस सुराग मिला, न किसी मुख्य आरोपी तक पुलिस पहुंच सकी। परिवार थाना से लेकर आई जी पुलिस महानिरीक्षक बिलासपुर , विधायक, सांसद और मंत्री तक न्याय की गुहार लगा रहे है। लेकिन सिस्टम अब भी सिर्फ दावों और बैठकों में उलझा नजर आ रहा है। लोग पूछ रहे हैं —क्या टेक्नोलॉजी सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस तक सीमित है? क्या बैठकों और निर्देशों का असर जमीन पर नहीं दिखता है क्या।  और जब पीड़ित परिवार खुद पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय बिलासपुर तक पहुंच चुका है। तब भी जांच में वह तेजी क्यों नहीं दिख रही है।  जिसकी बातें मंचों से की जाती हैं ? अगर सिस्टम इतना स्मार्ट हो गया है, तो फिर न्याय अब भी इतना कमजोर क्यों दिख रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या हाईटेक पुलिसिंग सिर्फ प्रेस कॉन्फ्रेंस और मीडिया में सुर्खियाँ बटोरने तक ही सीमित है।  जबकि जमीन पर अपराधी अब भी कानून से दो कदम आगे चल रहे हैं। गौरतलब है कि बिर्रा थाना क्षेत्र  में स्थित करही गांव में हुए बहुचर्चित गोलीकांड और आयुष कश्यप हत्याकांड को 15 दिन से ज्यादा बीत चुके हैं, लेकिन पुलिस अब तक किसी भी मुख्य आरोपी तक नहीं पहुंच सकी है। जिस वारदात ने पूरे इलाके को हिला दिया था। अब वही मामला कानून व्यवस्था और पुलिस की कार्यप्रणाली पर कई बड़े बड़े सवाल खड़े कर रहा है। 23 अप्रैल 2026 की दरमियानी रात करही गांव में क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता एवं व्यापारी सम्मे लाल कश्यप के घर में घुसकर अज्ञात तीन नकाबपोश बदमाशों ने सबसे पहले आयुष के पिता सम्मे लाल कश्यप के कमरा को बाहर से बंद कर दिया। उसके बाद आयुष के  कमरा को खटखटाकर खुलवाया। आयुष के द्वारा दरवाजा खोलते ही तीन नकाबपोश अज्ञात बदमाशों ने मृतक आयुष के ऊपर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के दौरान सबसे पहले आयुष को सीने में गोली लगी। जिसके कारण वह गिर गया।गिरने के बाद उसके सिर में गोली मारकर उसकी निर्मम हत्या कर दी गई। ईसी बीच बचाव करने आया उसके छोटे भाई आशुतोष कश्यप को भी बदमाशों ने फायरिंग कर घायल कर दिया था। इसके बाद पिता सम्मे लाल कश्यप के कमरा के दरवाजा को खोलकर नकाबपोश बदमाशों ने सम्मे लाल कश्यप को गाली देते हुए धमकाया कि तेरा बड़े बेटा को मार दिया गया है जो उखाड़ना है उखाड़ लेना। ऐसा कह कर तीन नकाबपोश बदमाश वहां से नौ दो ग्यारह हो गए। गोली कांड में ताबड़तोड़ फायरिंग हुई थी। हमले में 19 वर्षीय आयुष कश्यप की मौत हो गई, जबकि उसका छोटा भाई आशुतोष कश्यप घायल हो गया था। वारदात के बाद पुलिस ने बड़े स्तर पर जांच शुरू करने का दावा किया था । 35 पुलिसकर्मियों की टीम गठित की गई। हजारों CCTV फुटेज खंगाले गए। हजारों कॉल डिटेल की जांच हुई। 100 से ज्यादा लोगों से पूछताछ भी की गई, लेकिन 15 दिन बाद भी नतीजा शून्य है। यह बात क्षेत्र के ग्रामीणों के बीच में चर्चा का विषय बना हुआ है।
     न्याय के लिए हर दरवाजा खटखटा चुका परिवार: मृतक आयुष कश्यप के परिजन अब तक थाना, पुलिस अफसर, बिलासपुर रेंज आई जी और जनप्रतिनिधियों तक से मुलाकात कर चुके हैं। परिवार ने बिलासपुर जाकर पुलिस महानिरीक्षक से आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग किए हैं। जांजगीर में कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप से मिलकर न्याय की गुहार लगाई है। इसके अलावा बालेश्वर साहू विधायक जैजैपुर से भी मिलकर आरोपियों के गिरफ्तारी की मांग किए हैं। मामला बढ़ने के बाद  जांजगीर-चाम्पा की भाजपा सांसद  कमलेश जांगड़े ने भी प्रशासन को कार्रवाई के निर्देश देने की बात कही। इसके बावजूद पुलिस अब तक हाथ पर हाथ रखे खाली हाथ बैठी है। “रेत खनन की वजह से गई बेटे की जान” मृतक आयुष के पिता एवं क्षेत्र के वरिष्ठ कांग्रेस नेता सम्मेलाल कश्यप लगातार आरोप लगा रहे हैं कि हत्या के पीछे अवैध रेत कारोबार का विवाद है। उनका कहना है कि कुछ रसूखदार लोगों के नाम पुलिस को दिए गए, लेकिन अब तक उन पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। यही वजह है कि अब गांव में चर्चा तेज हो गई है कि आखिर पुलिस की जांच किस दिशा में चल रही है ? लोग सवाल पूछ रहे हैं कि जब पुलिस के पास तकनीक, संसाधन और पूरी टीम मौजूद है, तो फिर आरोपी अब तक गिरफ्त से बाहर कैसे हैं ।
जांजगीर चांपा विधायक का तंज – “पाताल से भी पकड़ सकती है पुलिस” कांग्रेस विधायक ब्यास कश्यप ने मामले में पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि आज पुलिस आधुनिक तकनीकों से लैस है। उन्होंने कहा — “अगर पुलिस चाहे तो पाताल से भी अपराधियों को पकड़ सकती है। फिर 15 दिन बाद भी आरोपी बाहर घूम रहे हैं, यह बड़ा सवाल है।”
सांसद ने भी मांगी सख्त कार्रवाई:

भाजपा सांसद कमलेश जांगड़े ने कहा कि घटना में शामिल किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाना चाहिए। उन्होंने कलेक्टर और एसपी को कार्रवाई करने के लिए कहा है। साथ ही जिले में अवैध रेत उत्खनन पर रोक लगाने की जरूरत भी बताई है।

परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़:

जिस घर में दो बेटों की हंसी गूंजती थी, वहां अब मातम पसरा है। आयुष की मौत के बाद परिवार गहरे सदमे में है। घायल भाई आशुतोष अब भी उस रात के खौफ से बाहर नहीं निकल पाया है। परिवार को सिर्फ बेटे को खोने का दर्द नहीं है, बल्कि यह डर भी है कि कहीं यह मामला भी लंबी जांच और फाइलों में दबकर न रह जाए।

सिस्टम पर सबसे बड़ा सवाल:

करही गोलीकांड अब सिर्फ एक हत्या का मामला नहीं रह गया है। यह उस सिस्टम पर सवाल बन चुका है, जहां पीड़ित परिवार न्याय के लिए दर-दर भटकता है और आरोपी समय के साथ और दूर निकल जाते हैं।

सबसे बड़ा सवाल यही है – अगर यही वारदात किसी रसूखदार परिवार के साथ हुई होती, तो क्या तब भी 15 दिन तक आरोपी खुले घूम रहे होते।