परिणाम ही नहीं, भविष्य गढ़ता है सरस्वती शिशु मंदिर

सफलता के संकल्प के साथ आगे बढ़ते कदम चंद्रपुर के विद्यार्थियों ने बोर्ड परीक्षाओं में किया उत्कृष्ट प्रदर्शन
सक्ती – शिक्षा के क्षेत्र में दशकों से अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाले सरस्वती शिशु मंदिर, चंद्रपुर ने इस वर्ष भी बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की है। समलाई बाल कल्याण समिति द्वारा संचालित इस संस्थान ने 5वीं, 8वीं के साथ-साथ 10वीं और 12वीं के परीक्षा परिणामों में सफलता का परचम लहराया है।
सफलता की अटूट परंपरा
यह संस्थान वर्ष 2011-12 से लगातार उत्कृष्ट परीक्षा परिणाम देने के लिए जाना जाता है। यहाँ के छात्र निरंतर प्रावीण्य सूची (Top -10) में स्थान बनाते रहे हैं। जो की यहाँ की शिक्षा पद्धति का ही परिणाम है
डिप्टी कलेक्टर विकास चौधरी जैसे सितारे यहाँ की देन
यह विद्यालय केवल किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि ऊर्जावान संस्कार और अनुशासन के लिए जाना जाता है। इसी शिक्षा पद्धति का परिणाम है कि आज यहाँ के पूर्व छात्र विकास चौधरी (डिप्टी कलेक्टर) जैसे उच्च पदों पर आसीन होकर क्षेत्र का नाम रोशन कर रहे हैं। वर्तमान में भी अनेक विद्यार्थी प्रशासनिक सेवा, रक्षा एवं सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं तकनीकी के क्षेत्र में कार्यरत होकर देश की सेवा कर रहे हैं।
अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और अनुशासन
विद्यालय की इस निरंतर प्रगति का मुख्य आधार यहाँ के अनुभवी और ऊर्जावान शिक्षक हैं। यहाँ बच्चों को केवल अक्षर ज्ञान नहीं, बल्कि जीवन की चुनौतियों से लड़ने की ‘ऊर्जावान शिक्षा’ दी जाती है।
छत्तीसगढ़ की प्रावीण्य सूची पर है लक्ष्य
स्कूल में जिस तरह की विशेष तैयारी और शैक्षणिक वातावरण तैयार किया गया है, उससे निश्चित रूप से आने वाले सत्रों में छत्तीसगढ़ की टॉप-10 (मेरिट) सूची में विद्यालय का नाम स्वर्ण अक्षरों में दर्ज होने की पूरी संभावना है।
समलाई बाल कल्याण समिति का संकल्प
“हमारा लक्ष्य चंद्रपुर और आसपास के क्षेत्र के हर बच्चे को ऐसी शिक्षा देना है जिससे वे भविष्य में जिम्मेदार नागरिक बनकर देश की सेवा कर सकें। हम भविष्य में भी इसी तरह बेहतर परिणाम देने के लिए प्रतिबद्ध हैं।”
सरस्वती शिशु मंदिर उच्चतर माध्यमिक विद्यालय चंद्रपुर के संस्था प्रमुख जगन्नाथ पाणिग्राही ने स्पष्ट किया कि अभिभावक स्वयं विद्यालय आकर बोर्ड परीक्षा परिणामो का प्रत्यक्ष अवलोकन कर सकते हैं। किसी भी भ्रामक जानकारी पर विश्वास करने के बजाय सीधे विद्यालय प्रबंधन से संपर्क करना उचित होगा ताकि सही स्थिति स्पष्ट हो सके।


