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हेमचंद्र यादव  विश्वविद्यालय द्वारा, “नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023” पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ

हेमचंद्र यादव  विश्वविद्यालय द्वारा, "नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023" पर एक दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित हुआ kshititech

दुर्ग – नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023 के क्रियान्वयन पर छात्रों शिक्षकों के गहन वैचारिक विमर्श के उद्देश्य को लेकर  13 अप्रैल को हेमचंद्र यादव विश्वविद्यालय दुर्ग ने एक दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार आयोजित किया ।
सेमिनार रूंगटा डेंटल कॉलेज के सभागार में आयोजित किया गया।
सेमिनार का उद्घाटन डॉ लवली शर्मा  कुलपति खैरागढ़ संगीत विश्विद्यालय, राज्य महिला आयोग की अध्यक्षा श्रीमती किरणमई नायक तथा कुलपति प्रो संजय तिवारी ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलन करके किया । मुख्य अतिथि प्रो. (डॉ.) लवली शर्मा, कुलपति — इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ ने कहा कि “नारी को सशक्त बनना होगा, सोच बदलनी होगी।” उन्होंने नारी शक्ति वंदन अधिनियम को एक ऐतिहासिक कानून बताते हुए कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद भी महिलाएँ राजनीतिक निर्णय-निर्माण में अपेक्षित स्थान से वंचित हैं।
मुख्य वक्ता डॉ. किरणमयी नायक, अध्यक्ष — छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग ने अधिनियम के विभिन्न आयामों की विस्तृत विवेचना की। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस अधिनियम के लागू होने से पूर्व जनगणना एवं परिसीमन की प्रक्रिया पूर्ण करना संवैधानिक अनिवार्यता है। यह कानून दशकों की महिला आंदोलन एवं संघर्ष का प्रतिफल है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. (डॉ.) संजय तिवारी ने कहा कि यह संगोष्ठी न केवल एक शैक्षणिक कार्यक्रम है, अपितु भारत के संवैधानिक लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी को सशक्त करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने युवाओं को संवैधानिक जागरूकता एवं लैंगिक समानता के प्रति संवेदनशील बनाने का आह्वान किया।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के महिला अध्ययन एवं विकास केंद्र द्वारा आयोजित इस एक दिवसीय संगोष्ठी में विद्यार्थियों को भारत की विधायी संस्थाओं में लैंगिक प्रतिनिधित्व की असमानताओं पर अपने विचार व्यक्त करने के लिए तथा संसदीय चर्चाओं के मंचन में भाग लेने का अवसर दिया गया है। उच्च शिक्षा संस्थानों (HEIs) के लिए UGC/MoE के दिशानिर्देशों के अनुरूप आयोजित यह कार्यक्रम नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023 के तत्काल कार्यान्वयन पर संरचित चर्चाओं को सुगम बनाता है। यह एक ऐतिहासिक विधेयक है जो संसद और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक तिहाई (33%) सीटें आरक्षित करता है।
सेमिनार में चर्चा की विषय-वस्तु में

1.नीति निर्माण और विधायिकाओं में महिलाओं के अल्प प्रतिनिधित्व के लिए सामाजिक और सांस्कृतिक बाधाएं

2.नीति निर्माण और विधायिकाओं में महिलाओं के अल्प प्रतिनिधित्व के संरचनात्मक और संस्थागत अवरोध

3.राजनीति और नौकरशाही में महिलाएं – चुनौतियां और अवसर

4.राजनीति और नौकरशाही में महिलाओं के अल्प प्रतिनिधित्व के निहितार्थ

5. 2047 तक विकसित भारत यानी विकसित भारत के लिए महिलाएं पथप्रदर्शक के रूप में भूमिका
सहित महिलाओं की वर्तमान स्थिति और भविष्य पर चर्चा कराना था
उद्घाटन सत्र के बाद तकनीकि सत्र में हेमचंद्र विश्वविद्यालय की भूतपूर्व कुलपति अरुण पल्टा, सामाजिक कार्यकर्ता शताब्दी पाण्डेय तथा प्रख्यात अधिवक्ता विभा सिंह ने स्रोत वक़्तव्य प्रस्तुत किया जिस पर छात्रों ने अपने विचार रखे और
बहस में हिस्सा लिया जिसमें प्रमुख रूप से  हर्षजीत कौर गिल, आकांक्षा बाघमारिया, श्रेया सिंह, विधि विश्वकर्मा, याग्निनी देवांगन, राशि चंद्राकर, प्रिया सिंह, नम्रता देवतारे,पल्लवी ठाकुर,  हरीश साहू, धृति वैष्णो,अनुष्का राजभर, अंशिका, कलश यादव, मोनिका चंदनानी, तीक्षा पात्रे, छाया नोर्गे, विनीता मिश्रा, मोनिका
ने हिस्सा लिया, सर्वश्रेष्ठ वक्ताओं को पुरस्कृत किया गया प्रथम स्थान पर कलश यादव, द्वितीय स्थान पर मोनिका चन्दनानी, और तृतीय स्थान पर संयुक्त रूप से पल्लवी ठाकुर और याग्नि देवांगन रहे समापन समारोह में विजेता छात्र छात्राओं को प्रमाणपत्र देकर सम्मानित किया गया ।
हेमचन्द यादव विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति महोदय प्रो डॉ संजय तिवारी ने कहा कि इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य इसकी विशेषताओं को जन जन तक विशेष रूप से महिलाओं और बच्चों तक  पहुंचाना है। उन्होंने आगे कहा कि प्रकृति के बाद इस संसार की सबसे सुंदरतम सक्षम हस्ताक्षर नारी है। संविधान की धारा 325 का उल्लेख करते हुए बताया कि भारत में 19 वीं सदी के बाद महिलाओं को वोट का अधिकार मिला। भारत की जीडीपी में घरेलू महिलाओं के योगदान को आवश्यक रूप से शामिल किया जाना चाहिए तभी वास्तव में नारी शक्ति को पहचान मिल सकेगी। इस सत्र का धन्यवाद ज्ञापन वि वि के कुलसचिव डॉ भूपेंद्र कुलदीप ने आभार प्रदर्शन किया ।
        द्वितीय सत्र तकनीकी सत्र था। इस सत्र में सभी अतिथियों का औपचारिक स्वागत करने के पश्चात सर्वप्रथम डॉ अरुणा पलटा ने अपने उद्बोधन में नारी संघर्ष के इतिहास की चर्चा की तथा भारतीय संविधान में महिलाओं के योगदान का सविस्तार वर्णन किया। भारतीय महिलाओं को वोट देने का अधिकार किस प्रकार मिला इसके इतिहास की विवेचना की साथ ही महिला आरक्षण पर भी उन्होंने कई तथ्यात्मक और ऐतिहासिक जानकारी प्रदान की। उन्होंने यह भी बताया कि समानता के साथ साथ समता का भी अधिकार महिलाओं को प्राप्त होना चाहिए।
         श्रीमती विभा सिंह ने संसदीय व्यवस्था में महिला आरक्षण की बात कही और बताया कि यह एक्ट सिर्फ एक्ट नहीं बल्कि सभी  महिलाओं का सपना है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि समाज पितृसत्तात्मक न होकर लैंगिक समानता पर आधारित होना चाहिए।
         महिला एवं बाल विकास आयोग की पूर्व अध्यक्ष डॉ शताब्दी पांडेय ने कहा कि नारी नारायणी शक्ति है। महिलाओं को मुक्ति नहीं बल्कि शक्ति की बात करनी होगी। नारी शक्ति  वंदन अधिनियम 2023 केवल विधायी परिवर्तन नहीं बल्कि लोकतांत्रिक चेतना का विस्तार है। निर्णय निर्माण में नारी की भागीदारी से ही नारी विकास सम्भव होगा।
           इस संगोष्ठी का अंतिम सत्र valedictory सत्र था। इस सत्र में डॉ हंसा शुक्ला ने नारी की परिभाषा बताई और वैदिक काल से शक्ति पूजा के होने का उल्लेख किया । भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में महिलाओं की भूमिका का सविस्तार  वर्णन किया और छत्तीसगढ़ की महत्वपूर्ण नारी व्यक्तित्व की चर्चा की।
       इस सत्र में उपस्थित छात्र छात्राओं ने इस अधिनियम के तारतम्य में अपना दृष्टिकोण रखा। इसमें 20 से अधिक छात्र छात्राओं ने हिस्सा लिया। तत्पश्चात डॉ सुचित्रा शर्मा ने अपना वक्तव्य दिया और कहा कि समाज की पितृसत्तात्मक व्यवस्था को बदलना होगा तभी समानता आ सकेगी। प्रत्येक नारी को swot परीक्षण करना जरूरी है। खुद की मजबूती को जानकर , कमजोरी को दूर करके , संभावनाओं को दृष्टिगत रखते हुए , समस्याओं पर कार्य करना चाहिए तभी वास्तव में नारी शक्ति का विकास हो सकेगा। उन्होंने आकर्षण के नियम का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रत्येक नारी को सकारत्मक सोचते हुए कार्य करना चाहिए।
             इस सत्र की मुख्य अतिथि डॉ रमा देवी पाणी ने अधिनियम की गूढ़ बातों को सभागार में रखा और अपना अनुभव साझा किया। उन्होंने समाज में चली आ रही रूढ़ियों पर भी चर्चा की ।