सशस्त्र सेना झंडा दिवस शहीद सैनिकों के सम्मान और सहयोग का पर्व


सक्ती – सशस्त्र सेना झंडा दिवस शहीद सैनिकों के बलिदान को सम्मान तथा सेना को समर्थ एवं सशक्त बनाने हेतु आर्थिक सहयोग करने हेतु संकल्प लेने का पर्व है, यह बात बताते हुए राष्ट्रीय मानवाधिकार एवं सामाजिक न्याय आयोग (विधि) के प्रदेश अध्यक्ष व उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि सरकार ने आजादी के बाद शहीद सैनिकों के परिवारों के साथ ही शारीरिक तौर पर अक्षम सैनिकों को सशक्त एवं समर्थ बनाने के लिए धन जुटाने हेतु २८ अगस्त १९४९ को देश के रक्षामंत्री बलदेव सिंह की अध्यक्षता में एक समिति का गठन कर सैनिकों के कल्याणार्थ धन संग्रह की शुरुवात किया गया। अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने आगे बताया कि इस हेतु हमारे छात्र जीवन में विद्यालयों में झंडे वितरित कर उससे सहायता राशि एकत्र सशस्त्र सेना झंडा दिवस निधि में सेना के सहायतार्थ भेजी जाती रही है फलस्वरूप बाल्यकाल से ही विद्यार्थियों में सेना के प्रति सम्मान तथा राष्ट्र के प्रति सहयोग और समर्पण का भाव जागृत होता रहा है परन्तु वर्तमान कालखंड में अब विद्यालयों में सशस्त्र सेना झंडा दिवस के प्रति जागरूकता नजर नहीं आती है जो राष्ट्रीय भाव जागरण की दृष्टि से अनुकूल नहीं है, यद्यपि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर सैनिकों के कुर्बानियों को याद कर खास अपील करते हुए कहा कि सैनिक अटूट साहस, अनुशासन एवं दृढ़ संकल्प के साथ हमारे देश की रक्षा करते हैं इसलिए हम सब सैनिकों के बलिदान का सम्मान करते हुए उनके लिए स्थापित सशस्त्र सेना झंडा दिवस फंड में अपना योगदान सुनिश्चित करें। पर स्थानीय स्तर पर इसके आयोजन को लेकर उत्साह नजर नहीं आ रहा है जबकि आज सेना के प्रति सम्मान का इजहार के साथ ही जल, थल और वायु सेना के प्रतिकात्मक झंडे वितरित कर बदले में देशवासियों से दान प्राप्त करने की परंपरा रही है। निश्चित रूप से देश के लिए कुर्बान हुए सैनिकों के सम्मान के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा में आज अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने का महत्वपूर्ण अवसर है जिसके लिए शासन प्रशासन एवं जिला सैनिक कल्याण बोर्ड के द्वारा समाज में जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है।


