सक्ती

राजनीतिक वादों के जाल में फंसा सक्ती का जिला मुख्यालय: जेठा में कार्यालय होने से जनता परेशान, चुनाव जीतने के बाद भूल गए नेता

राजनीतिक वादों के जाल में फंसा सक्ती का जिला मुख्यालय: जेठा में कार्यालय होने से जनता परेशान, चुनाव जीतने के बाद भूल गए नेता kshititech

सक्ती –  9 सितंबर 2022 को सक्ती को छत्तीसगढ़ का नया जिला घोषित किया गया था, जिसे बने अब लगभग चार वर्ष पूर्ण होने को आ रहे हैं। जिला बनने पर नगरवासियों को उम्मीद थी कि प्रशासनिक कार्य आसान होंगे, लेकिन आज सक्ती नगर की जनता खुद को ठगा सा महसूस कर रही है। कारण है— सक्ती नगर से लगभग 10 किलोमीटर दूर ग्राम जेठा (तहसील बाराद्वार) के पास जिला कलेक्टर ऑफिस, पुलिस अधीक्षक कार्यालय, जिला जनपद कार्यालय और जिला न्यायालय समेत तमाम बड़े शासकीय कार्यालयों का निर्माण।
दूरी और टोल टैक्स की दोहरी मार झेल रही आम जनता
सक्ती नगर से जिला मुख्यालय की 10 किलोमीटर की यह दूरी आम जनता के लिए किसी मुसीबत से कम नहीं है। वहां जाने के लिए सबसे पहले दोपहिया या चारपहिया वाहन की अनिवार्यता होती है। इसके अलावा, जिला कलेक्टर ऑफिस के सामने ही टोल प्लाजा स्थित होने के कारण जनता को जेब से टैक्स भी चुकाना पड़ता है। किसी भी छोटे-मोटे प्रशासनिक काम के लिए सक्ती नगर के निवासियों को अपना कीमती समय और पैसा दोनों बर्बाद करना पड़ रहा है, जिससे पूरी जनता में भारी आक्रोश है।
मैदान छूटे, उत्सवों का रंग हुआ फीका
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि पहले सक्ती नगर के बुधवारी बाजार स्थित दीनदयाल स्टेडियम में सभी प्रमुख शासकीय कार्यक्रमों और उत्सवों का आयोजन होता था। नगर के बीच होने के कारण सक्ती की आम जनता समय पर पहुंचकर कार्यक्रमों का आनंद लेती थी और अपनी उपस्थिति दर्ज कराती थी। लेकिन अब प्रशासनिक बैठकें और उत्सव 10 किलोमीटर दूर होने के कारण आम जनता की भागीदारी न के बराबर रह गई है।
चुनावी मंच से किया गया वादा पड़ा ठंडा
जनता की इस नाराजगी का सबसे बड़ा कारण मई 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान किया गया एक बड़ा राजनीतिक वादा है। जांजगीर-चांपा लोकसभा क्षेत्र से सक्ती नगर के ग्राम मसानिया कला की निवासी श्रीमती कमलेश जांगड़े भाजपा की प्रत्याशी थीं। उनके समर्थन में सक्ती नगर के जवाहरलाल नेहरू महाविद्यालय के खेल मैदान में एक विशाल आमसभा आयोजित की गई थी।
इस सभा में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंह देव मुख्य रूप से शामिल हुए थे। उन्होंने मंच से सार्वजनिक रूप से सक्ती की जनता को विश्वास दिलाया था कि यदि जनता भाजपा प्रत्याशी को जिताती है, तो आपसी राजनीतिक प्रतिस्पर्धा के कारण जेठा में स्थापित किए गए सभी शासकीय कार्यालयों को वापस सक्ती नगर में स्थानांतरित किया जाएगा। उन्होंने यहां तक कहा था कि यदि वे ऐसा नहीं कर पाए तो राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
जीत के बाद सांसद और प्रदेश अध्यक्ष ने साधी चुप्पी
लोकसभा चुनाव संपन्न हो चुके हैं और भाजपा प्रत्याशी श्रीमती कमलेश जांगड़े भारी मतों से जीतकर सांसद बन चुकी हैं। केंद्र और राज्य दोनों में भाजपा की सरकार है, लेकिन चुनाव बीते लंबा समय होने के बाद भी आज पर्यंत तक इस दिशा में कोई पहल नहीं की गई है। ना तो सांसद महोदया ने और ना ही भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने सक्ती नगर की जनता की इस बड़ी तकलीफ को दूर करने के लिए कोई कदम उठाया है।
आगामी चुनाव में भुगतना पड़ सकता है खामियाजा
सक्ती नगर की जनता अब खुद को छला हुआ महसूस कर रही है। लोगों का कहना है कि सत्ता पर काबिज होने के बाद जनप्रतिनिधि अपने वादे भूल गए हैं। मतदाताओं के बीच यह चर्चा आम है कि नेताओं को वोट देकर उन्होंने बड़ी भूल की, जिसका सीधा खामियाजा राजनीतिक दलों को आगामी चुनावों में भुगतना पड़ सकता है। आज जनता अपने जनप्रतिनिधियों से पूछ रही है कि उनके दुख-दर्द का निवारण कब होगा और उन्हें इस मानसिक व आर्थिक परेशानी से कब मुक्ति मिलेगी?