मिठाई के दाम पर बिक रहा ‘गत्ता’: होटल संचालकों की चालाकी से उपभोक्ताओं की जेब पर सरेआम डाका

इलेक्ट्रॉनिक तराजू पर बिना ‘शून्य’ किए तोली जा रही मिठाई; नाप-तौल विभाग की सुस्ती से बढ़ा जालसाजों का हौसला
सक्ती – त्योहारों और आम दिनों में शहर के होटलों और मिठाई प्रतिष्ठानों में ग्राहकों को लूटने का एक बड़ा खेल सामने आया है। शहर के नामचीन होटलों से लेकर छोटी दुकानों तक में मिठाई तोलते समय खाली डिब्बे का वजन भी शामिल किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर की जा रही इस मुनाफाखोरी के कारण आम ग्राहकों को हर महीने लाखों रुपये का भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है, जबकि जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।
दुकानदार कर रहे हैं ये गंभीर गलतियां (कानून का उल्लंघन)
अखबार की टीम द्वारा की गई ग्राउंड रियलिटी जांच में दुकानदारों की कई बड़ी लापरवाहियां और जानबूझकर की जा रही गलतियां सामने आई हैं:
‘टियर’ (Tare) बटन का इस्तेमाल न करना: इलेक्ट्रॉनिक कांटे पर खाली डिब्बा रखने के बाद उसका वजन शून्य (0.00) करने के बजाय, सीधे डिब्बे के साथ ही मिठाई तोल दी जाती है।
मोटे और भारी गत्तों का इस्तेमाल: मिठाई को सुरक्षित रखने के बहाने जानबूझकर 50 से 70 ग्राम तक के भारी डिब्बों का उपयोग किया जा रहा है, ताकि मिठाई की मात्रा कम देकर ज्यादा पैसे कमाए जा सकें।
विरोध करने पर बदतमीजी: जब कोई जागरूक ग्राहक डिब्बे का वजन घटाने को कहता है, तो दुकानदार “हमारे यहाँ ऐसा ही होता है” या “डिब्बे का पैसा अलग से नहीं लेते” कहकर बहस करने लगते हैं।
तराजू को छुपाकर रखना: कई होटलों में इलेक्ट्रॉनिक तराजू को काउंटर के नीचे या ऐसी जगह रखा जाता है जहाँ से ग्राहक को स्क्रीन पर दिख रही रीडिंग साफ नजर न आए।
40 ग्राम गत्ते की कीमत ₹30 वसूल रहे दुकानदार
बाजार में मिलने वाले गत्ते (कागजी डिब्बे) का वजन औसतन 40 से 60 ग्राम होता है। जब कोई ग्राहक एक किलोग्राम मिठाई (मान लीजिए ₹600/किलो) खरीदता है, तो दुकानदार डिब्बे के साथ ही वजन कर देता है। इसका सीधा मतलब यह है कि ग्राहक को 1000 ग्राम की जगह केवल 940 ग्राम मिठाई मिलती है। बचे हुए 60 ग्राम डिब्बे के बदले दुकानदार ग्राहक की जेब से ₹36 की अवैध वसूली कर लेता है।
कानूनी प्रावधान: पकड़े जाने पर मिलेगी कड़ी सजा और भारी जुर्माना
विधिक मापविज्ञान अधिनियम (Legal Metrology Act) के तहत पैकिंग सामग्री को सामग्री के वजन में शामिल करना एक गंभीर और दंडनीय अपराध है। इस मामले में कानून बेहद सख्त है:
1. धारा 30 के तहत कार्रवाई: कम तोलने या नेट वजन से कम सामान देने पर विधिक मापविज्ञान अधिनियम की धारा 30 के तहत मामला दर्ज किया जाता है।
2. पहली बार अपराध पर जुर्माना: यदि दुकानदार पहली बार इस गलती के साथ पकड़ा जाता है, तो उस पर ₹10,000 से लेकर ₹25,000 तक का भारी आर्थिक जुर्माना लगाया जा सकता है।
3. दूसरी बार में जेल का प्रावधान: यदि वही दुकानदार दोबारा इसी धोखाधड़ी को दोहराते हुए पकड़ा जाता है, तो जुर्माने की राशि बढ़कर ₹50,000 तक हो सकती है और साथ ही 6 महीने की जेल (कारावास) का भी प्रावधान है।
4. लाइसेंस रद्द और दुकान सील: लगातार नियमों का उल्लंघन करने वाले प्रतिष्ठानों का व्यापारिक लाइसेंस निरस्त कर दुकान को हमेशा के लिए सील किया जा सकता है।
“जांच कर होगी सख्त कार्रवाई”
“सामान तोलते समय पैकिंग का वजन जोड़ना पूरी तरह गैरकानूनी है। उपभोक्ताओं को केवल नेट वजन (शुद्ध सामग्री) के पैसे देने होते हैं। यदि शहर के होटलों में ऐसा किया जा रहा है, तो हम विशेष अभियान चलाकर औचक निरीक्षण करेंगे और दोषी दुकानदारों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।”
— जिला नाप-तौल अधिकारी (विधिक मापविज्ञान विभाग)
उपभोक्ता सतर्क रहें: ऐसे बचें इस धोखाधड़ी से
कांटे पर नजर रखें: मिठाई तोलने से पहले सुनिश्चित करें कि मशीन पर खाली डिब्बा रखने के बाद रीडिंग ‘0.00’ दिखा रही हो।
पक्की रसीद मांगें: वजन में गड़बड़ी का संदेह होने पर दुकानदार से पक्का बिल मांगें और उस पर वजन दर्ज करवाएं।
यहाँ करें शिकायत: यदि दुकानदार डिब्बे का वजन कम करने से मना करे, तो राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन नंबर 1915 पर तुरंत अपनी शिकायत दर्ज कराएं।
