सक्ती

शारदीय नवरात्रि महोत्सव में नियमों का पालन करने से व्रतधारियों को मिलती है देवी की कृपा ‍- आचार्य राजेंद्र जी महाराज

सक्ती ‌।  शरद कालीन प्रत्यक्ष नवरात्रि महोत्सव का शुभारंभ से संपूर्ण विश्व के कल्याण के लिए किया हो रहा है । नवरात्रि महोत्सव देवी जगदंबा की उपासना का महापर्व है , देवी के व्रत धारण कर शक्ति की आराधना की जाती है । शक्तिमान की ही सत्ता होती है और निःशक्त हमेशा निंदित होता है । नवरात्र महोत्सव में देवी की आराधना एवं उनकी प्रसन्नता के संबंध में भागवत प्रवाह आध्यात्मिक सेवा संस्थान छत्तीसगढ़ के संस्थापक आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने बताया कि वर्ष में चार नवरात्रि होती है , जिसमें चैत्र माह एवं आश्विन माह की नवरात्रि प्रत्यक्ष नवरात्रि मानी गई है  तथा आषाढ़ और माघ महीने की नवरात्रि को गुप्त नवरात्रि की संज्ञा दी गई है । नवरात्रि व्रत धारण करते हुए तिथि प्रतिपदा से लेकर नवमी तिथि तक देवी दुर्गा के अलग-अलग नौ रूप होते हैं , इन अलग-अलग तिथियां के स्वरूपों को अलग-अलग वस्तुओं का भोग लगाने का विधान है ‌।

इन वस्तुओं का भोग लगाने से मिलता है शुभ फल

तिथि प्रतिपदा को शैलपुत्री का भोग – गौ माता का घी, द्वितीया तिथि ब्रह्मचारिणी को मिश्री , तृतीया तिथि देवी चंद्रघंटा को गौ माता का दूध, चतुर्थी तिथि देवी कुष्मांडा को मालपुआ , पंचमी तिथि देवी स्कंदमाता को केला , षष्ठी तिथि देवी कात्यायनी को मधुरस ,सप्तमी तिथि देवी कालरात्रि को गुड ,अष्टमी तिथि देवी महागौरी को नारियल का चुरा,तिथि नवमी देवी सिद्ध रात्रि को धान का लाई भोग लगावे।


नवरात्रि व्रत में कन्या भोज अवश्य करावे तथा ध्यान रखें की कन्या भोज हेतु 2 वर्ष से 10 वर्ष तक की आयु के कन्याओं की पूजा और भोजन करावे । कन्या भोज में कोई भी कन्या अस्वस्थ अथवा अपंग ना हो, संपूर्ण नियमों का पालन करने से निश्चित ही व्रतधारियों को तथा उपासकों को देवी की कृपा और सिद्धि की प्राप्ति होती है। आचार्य राजेंद्र महाराज एवं पंडित देव कृष्ण शर्मा द्वारा नवरात्रि की मंगल कामनाएं प्रधान करते हुए उक्त जानकारी प्रदान की गई ।