सक्ती

सेवा संकल्प अभियान के तहत जिले में निःशुल्क रेबीज टीकाकरण शिविर आयोजित

पशुधन विकास विभाग द्वारा पालतु एवं आवारा कुत्तों-बिल्लियों का किया गया टीकाकरण, कृमिनाशक दवाओं का भी वितरण

सक्ती – सेवा संकल्प अभियान के तहत विश्व रेबीज दिवस के अवसर पर पशुधन विकास विभाग, जिला सक्ती द्वारा जिले के विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण शिविरों का आयोजन किया गया। शिविर का उद्देश्य पशुओं में रेबीज जैसी गंभीर एवं जानलेवा बीमारी की रोकथाम के साथ-साथ पशुपालकों एवं आम नागरिकों को रेबीज के प्रति जागरूक करना रहा। आयोजित शिविरों में पशुपालकों द्वारा लाए गए पालतू कुत्तों के साथ-साथ आवारा कुत्तों एवं बिल्लियों का भी निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया गया। टीकाकरण के लिए कुत्तों एवं बिल्लियों को पशु चिकित्सा विभाग द्वारा कृमिनाशक दवा भी दिया गया। पशु चिकित्सा अधिकारियों एवं कर्मचारियों द्वारा पशुपालकों को पशुओं के नियमित टीकाकरण, स्वास्थ्य देखभाल तथा रेबीज से बचाव के उपायों की जानकारी दी गई।

विभिन्न पशु चिकित्सा संस्थानों में हुआ टीकाकरण
        पशु चिकित्सा विभाग से प्राप्त जानकारी अनुसार जिले में आयोजित शिविरों के दौरान कुल 109 कुत्तों का निःशुल्क एंटी रेबीज टीकाकरण किया गया। इनमें जिला पशु चिकित्सालय सक्ती में 35 कुत्ते, पशु चिकित्सालय बाराद्वार में 25 कुत्ते, डभरा में 21 कुत्ते, जैजैपुर में 16 कुत्ते तथा मालखरौदा में 12 कुत्तों को एंटी रेबीज वैक्सीन लगाया गया। विभाग द्वारा बताया गया कि रेबीज एक गंभीर वायरल बीमारी है, जो संक्रमित पशु के काटने, खरोंचने अथवा उसकी लार के संपर्क में आने से मनुष्यों और अन्य पशुओं में फैल सकती है। समय पर टीकाकरण एवं उचित सावधानी अपनाकर रेबीज से बचाव किया जा सकता है।

रेबीज के प्रमुख लक्षण
पशुओं में रेबीज होने पर व्यवहार में अचानक परिवर्तन, अत्यधिक आक्रामकता या असामान्य शांति, बेचैनी, अत्यधिक लार आना, पानी पीने में कठिनाई, निगलने में परेशानी, आवाज में बदलाव, कमजोरी, लड़खड़ाकर चलना तथा अंततः लकवा जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। मनुष्यों में संक्रमित पशु के काटने या खरोंचने के बाद बुखार, बेचैनी, घाव वाले स्थान पर झुनझुनी या दर्द, पानी निगलने में कठिनाई, पानी से भय, भ्रम तथा तंत्रिका तंत्र से संबंधित गंभीर लक्षण विकसित हो सकते हैं।

काटने या खरोंचने पर तत्काल उपचार जरूरी
रेबीज के संक्रमण की आशंका होने पर पशु के काटने या खरोंचने के स्थान को तत्काल साबुन और बहते पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए तथा बिना विलंब किए नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए। चिकित्सक की सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन तथा आवश्यकता होने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन दिया जाता है। रेबीज के लक्षण विकसित होने के बाद बीमारी अत्यंत गंभीर हो जाती है, इसलिए पशु के काटने या खरोंचने के बाद समय पर उपचार लेना अत्यंत आवश्यक है। पशु के काटने की स्थिति में घाव पर घरेलू उपचार या बिना चिकित्सकीय सलाह के दवा लगाने के बजाय तुरंत चिकित्सा सहायता लेना चाहिए।

अधिकारियों एवं कर्मचारियों की रही सहभागिता
शिविरों के सफल आयोजन में पशुधन विकास विभाग के अधिकारियों एवं पशु चिकित्सा अमले की महत्वपूर्ण भूमिका रही। शिविरों में विभागीय कर्मचारी तथा संबंधित पशु चिकित्सा संस्थानों के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान पशुपालकों एवं आम नागरिकों को रेबीज से बचाव, पशुओं के नियमित टीकाकरण और पशु स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने की अपील की गई।