सक्ती

छत्तीसगढ़ के शहरों में जलभराव पर बरसे पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री, कहा- ‘कागजी दावों की खुली पोल, जनता बेहाल’

वातानुकूलित कमरों में सोए हैं मंत्री और अफसर, सड़कों पर डूब रही जनता”: डॉ. शिवकुमार डहरिया

छत्तीसगढ़ के शहरों में जलभराव पर बरसे पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री, कहा- 'कागजी दावों की खुली पोल, जनता बेहाल' kshititech

सक्ती –  सक्ती पुर्व नगरीय प्रशासन मंत्री शिव कुमार डहरिया भाजपा सरकार के कागजी कार्यवाही पर भड़के नगरीय निकायों में भारी बारिश के बाद उपजे जलभराव और बदहाली को लेकर राजनीति गरमा गई है। प्रदेश के पूर्व नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ शिवकुमार डहरिया ने वर्तमान भाजपा सरकार और नगरीय प्रशासन विभाग पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की घोर लापरवाही और प्रशासनिक अदूरदर्शिता के कारण आज प्रदेश की जनता नरकीय जीवन जीने को मजबूर है।
स्मार्ट सिटी के नाम पर सिर्फ कागजी विकास
पूर्व मंत्री डॉ डहरिया ने राजधानी रायपुर, बिलासपुर, कोरबा और अंबिकापुर की स्थिति का हवाला देते हुए कहा, “प्रदेश के मुख्यमंत्री और नगरीय प्रशासन मंत्री बड़े-बड़े मंचों से विकास के दावे करते नहीं थकते, लेकिन मात्र कुछ घंटों की बारिश ने इनकी ‘डबल इंजन’ सरकार के दावों की पोल खोलकर रख दी है। आज छत्तीसगढ़ की जनता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रही है।” उन्होंने कहा कि राजधानी रायपुर के पॉश इलाकों से लेकर बिलासपुर और कोरबा की निचली बस्तियों तक में घुटनों तक पानी भरा हुआ है। बिलासपुर में स्थिति इतनी बदतर है कि लोग खुद अपने पैसों से सड़कों के गड्ढे भरने को मजबूर हैं। स्मार्ट सिटी और सीवरेज प्रोजेक्ट के अधूरे कामों ने शहरों को मलबे और गड्ढों के ढेर में तब्दील कर दिया है।
मानसून से पहले नालों की सफाई में हुआ बड़ा भ्रष्टाचार
पूर्व नगरीय प्रशासन मंत्री ने सीधे तौर पर भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा, “हमारे कार्यकाल में मानसून से ठीक पहले सभी नगरीय निकायों में नालों की सफाई और ड्रेनेज मेंटेनेंस की सख्त मॉनिटरिंग की जाती थी। लेकिन वर्तमान सरकार में केवल कागजों पर नालों की सफाई दिखाई गई और बजट को ठिकाने लगा दिया गया। यदि सही समय पर नालों की गाद (सफाई) निकाली गई होती, तो आज कोरबा में 40 से अधिक घरों में पानी नहीं घुसता और न ही लोगों का राशन बर्बाद होता।”
जनता बेहाल, प्रशासन और मंत्री नदारद
उन्होंने गंगरेल बांध से पानी छोड़े जाने और धमतरी-कांकेर जैसे इलाकों में बाढ़ के खतरे पर चिंता जताते हुए कहा कि आपदा प्रबंधन के नाम पर सरकार पूरी तरह फेल साबित हुई है। “जब जनता के घरों में पानी घुस रहा है, तब नगरीय प्रशासन विभाग सोया हुआ है। मंत्री और अधिकारी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलने को तैयार नहीं हैं।”
पूर्व मंत्री ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने तुरंत प्रभावित क्षेत्रों में जल निकासी की व्यवस्था नहीं की, सड़कों के गड्ढे नहीं सुधारे और पीड़ित परिवारों को मुआवजा नहीं दिया, तो वे जनता की आवाज बनकर सड़कों पर उतरेंगे और इस सोई हुई सरकार को जगाने के लिए उग्र आंदोलन करेंगे।