सक्ती

कार्यस्थल पर महिलाओं के यौन उत्पीड़न संबंधी यौन उत्पीड़न निषेध अधिनियम पर जागरूकता अभियान के तहत विधिक जागरूकता शिविर का हुआ आयोजन

सक्ती –  माननीय प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश/अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, जांजगीर-चांपा के कुशल मार्गदर्शन में कार्यालय तालुका विधिक सेवा समिति, सक्ती के तत्वावधान में कार्यस्थल “यौन उत्पीड़न रोकथाम, निषेध और निवारण अधिनियम, 2013” (POSH Act) विषय पर एक विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर की मुख्य वक्ता एवं अध्यक्षता श्रीमती लीना अग्रवाल, द्वितीय जिला न्यायाधीश/अध्यक्ष, तालुका विधिक सेवा समिति सक्ती ने की। कार्यक्रम में कु. पुष्पलता मारकंडे, अपर सत्र न्यायाधीश, सुश्री शुभदा गोयल, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, तथा कु. अंकिता देवदास, न्यायिक मजिस्ट्रेट सक्ती भी विशेष रूप से उपस्थित रहीं।श्रीमती लीना अग्रवाल ने अपने संबोधन में बताया कि यह अधिनियम कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन उत्पीड़न से सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से बनाया गया है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संस्थान में “आंतरिक शिकायत समिति” का गठन अनिवार्य है, जहां पीड़ित महिला अपनी शिकायत दर्ज करा सकती है। कार्यक्रम में उपस्थित न्यायाधीशगणों ने अधिनियम के प्रमुख प्रावधानों पर प्रकाश डाला। शिकायत दर्ज कराने की समय-सीमा (घटना के 3 माह के भीतर) शिकायत की गोपनीयता बनाए रखने का प्रावधान झूठी शिकायत पर भी कार्रवाई का प्रावधान, नियोक्ता के दायित्व और अनुपालन न करने पर दंड का प्रावधान उपस्थित प्रतिभागियों को यह भी बताया गया कि पीड़िता किस प्रकार निःशुल्क विधिक सहायता प्राप्त कर सकती है और शिकायत निवारण प्रक्रिया किस प्रकार कार्य करती है।इस शिविर में महिला अधिवक्ताएं एवं न्यायालय की महिला कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहीं एवं पैरालीगल वॉलिंटियर्स मनीष साहू, प्रहलाद बंजारे, संतोष कश्यप कार्यक्रम में उपस्थित रहे। तालुका विधिक सेवा समिति, सक्ती द्वारा आयोजित इस शिविर का उद्देश्य महिलाओं को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना और सुरक्षित कार्यस्थल के निर्माण में सहयोग देना बताया गया। कार्यक्रम के अंत में उपस्थित न्यायाधीशगणों ने प्रतिभागियों की शंकाओं का समाधान भी किया।