हनुमान अंश में सरस्वती शिशु मंदिर के विद्यार्थी सत्या ने निभाया नीम करौली बाबा का किरदार


सक्ती- नीम करौली बाबा के जीवन पर आधारित फिल्म हनुमान अंश में प्रदर्शित ट्रेन वाली कहानी इन दिनों लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है। इस प्रसंग का उल्लेख लेखक राम दास ने अपनी पुस्तक Miracle of Love में भी किया है। फिल्म देखने के बाद हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक एवं उच्च न्यायालय अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि यह प्रसंग बाबा नीम करौली के चमत्कारिक जीवन और उनकी आध्यात्मिक शक्ति से जुड़े महत्वपूर्ण घटनाक्रमों में से एक है।
बताया जाता है कि एक दिन बाबा लक्ष्मण नारायण शर्मा बिना टिकट ट्रेन में सवार हो गए थे। अंग्रेज अधिकारी के दबाव में टीटी ने ट्रेन को बीच रास्ते में रुकवाकर उन्हें उत्तर प्रदेश के फर्रुखाबाद जिले के नीम करौली गांव में उतार दिया। बाबा के उतरने के बाद ट्रेन आगे नहीं बढ़ी। काफी प्रयासों के बाद भी जब ट्रेन नहीं चली तो रेल अधिकारियों ने टीटी से पूरे घटनाक्रम की जानकारी ली।
इसके बाद अधिकारियों ने बाबा को खोजकर उनसे पुनः ट्रेन में बैठने का आग्रह किया। बाबा के आशीर्वाद के बाद ट्रेन के चल पड़ने की बात इस प्रसंग में कही गई है। इसी घटना के बाद बाबा की शर्त पर नीम करौली गांव में रेलवे स्टेशन बनाए जाने का उल्लेख मिलता है। कुछ समय तक बाबा इसी क्षेत्र में रहे और आगे चलकर वे ‘नीम करौली बाबा’ के नाम से प्रसिद्ध हुए।
अधिवक्ता चितरंजय पटेल ने कहा कि फिल्म हनुमान अंश में बाबा नीम करौली का किरदार निभाने वाले शोभिनव सत्या का संबंध सरस्वती शिशु मंदिर परिवार से होना विशेष गौरव का विषय है। उन्होंने बताया कि शोभिनव सत्या सरस्वती शिशु मंदिर विद्यालय, खैराबाद, सीतापुर (उत्तर प्रदेश) के विद्यार्थी रहे हैं।
उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर एवं विद्याभारती परिवार के विद्यार्थी द्वारा बाबा नीम करौली जैसे आध्यात्मिक व्यक्तित्व की भूमिका निभाना निश्चित रूप से पूरे विद्यालय परिवार के लिए गौरव की बात है। यह उपलब्धि विद्यार्थियों में छिपी प्रतिभा को मंच प्रदान करने वाली भारतीय शिक्षा पद्धति की विशेषता को भी रेखांकित करती है।
