श्री कृष्णा के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए अपने मनुष्य जीवन के दायित्वों का निर्वहन करने की आवश्यकता – आचार्य राजेंद्र जी महाराज

सक्ती । जगतगुरु भगवान श्री कृष्णा जी का आज मध्य रात्रि अवतार होगा , पौराणिक दृष्टि से भाद्र महा कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को मध्य रात्रि की बेला में रोहिणी नक्षत्र के तीसरे चरण में अजन्मा कहलाने वाले लीला पुरुषोत्तम श्री कृष्ण जी का अवतार कंस के कारागार में हुआ था ।
भागवत प्रवाह के संस्थापक आचार्य राजेंद्र जी महाराज ने बताया कि संपूर्ण देवताओं में केवल श्री कृष्ण ही 64 कलाओं से परिपूर्ण थे और उनका अवतार केवल असुरों और राक्षसों और कंस का वध करने के लिए ही नहीं हुआ था अपितु भगवान श्री कृष्णा कृत संकल्पित होकर धरती ,जल और नभ इन तीनों का संरक्षण करते हुए इन्हें आतताईयो से मुक्त भी किया था । आज भी वर्तमान में जल जंगल और जमीन तीनों को ही बहुत नुकसान पहुंचा जा रहा है ।
श्री कृष्ण ने यमुना नदी के कालिदाह, जहां का जल कालिया नाग के रहने के कारण विषाक्त हो गया था, जिसे पीना तो दूर स्पर्श करने मात्र से ही बृजवासियों की मृत्यु हो जाती थी , यमुना नदी के जल को प्रदूषण मुक्त करने हेतु श्री कृष्ण ने कालिया नाग मर्दन की लीला कर उसे यमुना से बाहर निकाल और सांपों के द्वीप में भेज दिया ।
दूसरी ओर ताल वन के सभी वृक्षों और फलों पर अपना अधिकार करने वाले धेनुका सुर नाम के राक्षस का वध कर वन और फलों को ब्रज वासियों को प्रदान किया ।
संपूर्ण धरती पर भौमासुर अपना अधिकार चाहता था और 16,100 राज कन्याओं से ब्याह कर पृथ्वी को अपने अधीन करना चाहता था । भगवान श्री कृष्ण ने भौमासुर की राजधानी प्राग ज्योतिष पुर पर आक्रमण कर भामासुर का वध किया और धरती पर हो रहे अनाधिकार पूर्वक कब्ज़ा को समाप्त किया ।
श्री कृष्णा एक अत्यंत चमत्कारी , खतरों के खिलाड़ी और अन्य के विरुद्ध शंखनाद करने वाले परम पूज्य आराध्य देवता है जहां धरती में सर्वत्र उनकी पूजा और मान्यता होती है ।
आज उनके अवतरण दिवस होने पर संपूर्ण भारतवर्ष में और अन्य देशों में रहने वाले भी आस्थावान लोग श्री कृष्ण जन्माष्टमी का उत्सव मनाएंगे।
आचार्य राजेंद्र महाराज ने आग्रह किया कि श्री कृष्णा के उपदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करते हुए कर्म क्षेत्र में प्रखर बनकर अपने मनुष्य जीवन के दायित्वों का निर्वहन करने की आवश्यकता है , क्योंकि कर्म ही पूजा है इसलिए हम अपने जीवन में श्रेष्ठ और अच्छे कर्मों का पालन करते रहे ।
