सक्ती विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ चरणदास दास महंत राष्ट्रीय भोजली महोत्सव कार्यक्रम में हुए शामिल


सक्ती – राजधानी रायपुर के सरदार बलवीर सिंह जुनेजा इंडोर स्टेडियम में गोंडवाना समाज एवं राष्ट्रीय आदिवासी समाज के संयुक्त तत्वावधान में भव्य राष्ट्रीय भोजली महोत्सव का आयोजन किया गया। महोत्सव में सक्ती विधायक एवं नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत सहित मध्य प्रदेश विधानसभा के नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, गुरु माता और छत्तीसगढ़ के अलग-अलग ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से पहुंचे पुरुष-महिला जनप्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम के दौरान इंडोर स्टेडियम में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और परंपराओं का मनमोहक नजारा देखने को मिला। बड़ी संख्या में महिलाएं अपने सिर पर भोजली की टोकरी लेकर पहुंचीं और पारंपरिक गीतों के साथ नृत्य कर महोत्सव की रौनक बढ़ाई। महिलाओं के सामूहिक स्वर से पूरा स्टेडियम भोजली के गीतों से गूंज उठा।
भोजली हरियाली और मित्रता का प्रतीक : डॉ. चरणदास महंत
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने कहा कि भोजली महोत्सव छत्तीसगढ़ की हरियाली, खुशहाली और आपसी मित्रता का प्रतीक है। छत्तीसगढ़ में भोजली तिहार को ‘मितान तिहार’ या मित्रता दिवस के रूप में भी मनाया जाता है। यह पर्व लोगों के बीच प्रेम, भाईचारे और आपसी संबंधों को मजबूत करने का संदेश देता है। उन्होंने कहा कि किसान अच्छी बारिश, बेहतर फसल और सुख-समृद्धि की कामना के साथ भोजली तिहार मनाते हैं। ‘हर हर गंगे, लहर गंगे’ के जयघोष और पारंपरिक गीतों के साथ भोजली की पूजा-अर्चना की जाती है। यह पर्व छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति और कृषि परंपरा से गहराई से जुड़ा हुआ है।
पारंपरिक गीतों से गूंज उठा इंडोर स्टेडियम
भोजली महोत्सव के दौरान महिलाओं ने पारंपरिक भोजली गीतों का सामूहिक गायन किया। ‘आ हो देवी गंगा, ओ देवी गंगा…’ और ‘देवी गंगा, लहर तुरंगा…’ जैसे पारंपरिक गीतों की गूंज से पूरा इंडोर स्टेडियम भक्तिमय और उत्सव के माहौल में रंग गया।
महिलाओं ने सिर पर भोजली की टोकरी रखकर सामूहिक रूप से नृत्य किया। इस दौरान छत्तीसगढ़ की पारंपरिक वेशभूषा, लोकगीत और नृत्य ने कार्यक्रम में प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की सुंदर झलक प्रस्तुत की।
हजारों महिलाओं ने दिखाया छत्तीसगढ़ी संस्कृति का रंग
राष्ट्रीय भोजली महोत्सव में हजारों महिलाओं की भागीदारी रही। महिलाएं अपने सिर पर भोजली की टोकरी लेकर पारंपरिक गीत गाते हुए नृत्य करती नजर आईं। पूरे आयोजन स्थल पर उत्साह और उमंग का माहौल रहा।
महोत्सव के माध्यम से छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, कृषि संस्कृति और आपसी भाईचारे की भावना को प्रदर्शित किया गया। आयोजन में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से पहुंचे जनप्रतिनिधियों एवं समाज के लोगों ने भी बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
