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रक्षाबंधन पर बहनों ने मांगी भाइयों के लिए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद

रक्षाबंधन पर बहनों ने मांगी भाइयों के लिए सुख-समृद्धि का आशीर्वाद kshititech

सक्ती –  रक्षाबंधन भाई बहन का अटूट संबंध को दर्शाता है रक्षाबंधन पर्व हर्षोल्लास  के साथ मनाया गया। इस अवसर पर बहनों ने भाइयों के माथे पर तिलक नारियल भेंट कर मुंह मीठा कराकर अपने भाई के कलाई पर रक्षा सूत्र बांधकर उनकी सुख-समृद्धि और लंबी उम्र की कामना की। रक्षाबंधन को लेकर अनीता गौतम ने बताया पौराणिक प्रचलित  मान्यता है   भगवान श्रीकृष्ण की उंगली सुदर्शन चक्र चलाते समय घायल हो गई थी। उंगली से रक्त निकलता देख द्रौपदी ने अपनी साड़ी का पल्लू फाड़कर भगवान श्रीकृष्ण की उंगली पर बांध दिया था। इस पर श्रीकृष्ण ने द्रौपदी को सदैव रक्षा करने का वचन दिया था। कहा जाता है कि जब कौरवों की सभा में द्रौपदी का चीरहरण किया जा रहा था, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उनकी लाज बचाकर अपना रक्षा का  वचन  निभाया वहीं  रक्षाबंधन पर्व से जुड़ी महालक्ष्मी और राजा बलि की कथा सनातन धर्म में सबसे प्रसिद्ध और पवित्र पौराणिक कहानियों में से एक है। इस कथा के कारण ही रक्षाबंधन के त्योहार की शुरुआत मानी जाती है।एक मान्यता है जब भगवान विष्णु ने वामन अवतार लेकर दानवीर असुर राजा बलि से तीन पग में उनका सब कुछ दान में मांग लिया था, तब बलि ने अपना सिर भगवान के चरणों में रख दिया। राजा बलि के इस पूर्ण आत्मसमर्पण और गहरी भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु ने उन्हें पाताल लोक का राजा बना दिया। इसके साथ ही, बलि के अनुरोध पर भगवान विष्णु स्वयं उनके महल में (द्वारपाल) बनकर पाताल लोक में ही निवास करने लगे।उधर वैकुंठ धाम में माता महालक्ष्मी अपने स्वामी भगवान विष्णु के बिना अकेली हो गईं और बेहद चिंतित रहने लगीं। भगवान विष्णु अपने वचन से बंधे थे, इसलिए वे वैकुंठ वापस नहीं आ सकते थे। तब माता लक्ष्मी ने अपने पति को वापस लाने के लिए लीला रची। और  माता लक्ष्मी ने राजा बलि की कलाई पर रक्षासूत्र  बांधा और उनके मंगल की कामना की। राखी बंधवाने के बाद राजा बलि अत्यंत भावुक और प्रसन्न हुए। उन्होंने  कहा, “बहन, तुमने मुझे भाई होने का सौभाग्य दिया है, मांगो जो उपहार मांगना चाहती हो, मैं अवश्य पूरा करूंगा।” अपने भाई राजा बलि से बाली के द्वार पर खड़े हुए व्यक्ति को कहां अगर आप देना चाहते हो तो मुझे खड़े हुए इस व्यक्ति को मुझे दे दीजिए  अपनी बहन की इच्छा का सम्मान करते हुए  भाई का धर्म निभाते हुए, सहर्ष भगवान विष्णु को माता लक्ष्मी के साथ वैकुंठ लौटने की अनुमति दे दी।
तभी से श्रावण पूर्णिमा के दिन बहनें अपने भाइयों की कलाई पर रक्षासूत्र बांधती हैं और भाई उनकी रक्षा का वचन देते हैं
उसी दिन से राखी बांधते समय यह पौराणिक मंत्र पढ़ा जाता है:
“येन बद्धो बली राजा दानवेन्द्रो महाबलः।
तेन त्वामपि बध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥”
(अर्थात: जिस  रक्षासूत्र को महाबली दानवेंद्र राजा बलि को बांधा गया था, और बाली ने अपनी बहन की इच्छा पूरी की थी।