स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर ग्राम पंचायतों में आयोजित होगा उल्लास महा-चौपाल

साक्षरता एवं जनजागरूकता से जुड़ी विभिन्न गतिविधियों का होगा आयोजन
सक्ती- स्वतंत्रता दिवस के पावन अवसर पर 15 अगस्त 2026 को जिले की सभी ग्राम पंचायतों में उल्लास महा-चौपाल का आयोजन किया जाएगा। कलेक्टर श्री अमृत विकास तोपनो के निर्देशन में जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी वासु जैन एवं जिला शिक्षा अधिकारी डॉ. कुमुदिनी बाघ द्विवेदी के नेतृत्व में राज्य कार्यालय के निर्देशानुसार निर्धारित तिथियों पर विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। उल्लास साक्षरता कार्यक्रम के अंतर्गत स्वतंत्रता दिवस के पूर्व 14 अगस्त 2026 को सरपंच एवं ग्राम प्रभारी के नेतृत्व में समुदाय, गांव के युवक-युवती, पुरुष, महिलाएं एवं बुजुर्गों को जोड़ते हुए मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाकर साक्षरता रैली निकाली जाएगी। रैली के दौरान “हर घर साक्षर, विकसित भारत” के नारे लगाए जाएंगे। इसी क्रम में 15 अगस्त 2026 को प्रभात फेरी, उल्लास साक्षरता ध्वजारोहण, सामूहिक उल्लास शपथ, महा-चौपाल एवं कहानियों का कारवां आयोजित किया जाएगा। नव साक्षर अपने अनुभव साझा करते हुए बताएंगे कि पढ़ना-लिखना सीखने के बाद उनके जीवन में किस प्रकार बदलाव आया। उनके अनुभव सुनकर समुदाय के अन्य शिक्षार्थियों को भी प्रेरित किया जाएगा। महा-चौपाल के साथ दादी-नानी की कहानी एवं विभिन्न प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया जाएगा। कार्यक्रम के दौरान मातृत्व साक्षरता, महा संकल्प कार्यक्रम, उल्लास हेल्प डेस्क (पंजीकरण शिविर), अंगूठा मुक्त पंचायत, अंगूठे से कलम तक सम्मान समारोह, प्रशस्ति पत्र वितरण, साक्षरता रंगोली एवं नुक्कड़ नाटक सहित विभिन्न गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इसके साथ ही उल्लास दिवार, उल्लास घंटी आदि गतिविधियों के माध्यम से विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। इस वर्ष स्वतंत्रता दिवस को साक्षरता के उत्सव के रूप में मनाते हुए आजादी के जश्न को जन-जागरूकता और शिक्षा से जोड़ने का विशेष प्रयास किया जाएगा। इसका उद्देश्य जिले में साक्षरता के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को शिक्षा से जोड़ना है। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा वर्ष 2026-27 में संपूर्ण छत्तीसगढ़ को शत-प्रतिशत साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा गया है, जिसे पूरा करने में इन गतिविधियों की महत्वपूर्ण भूमिका रहेगी। उल्लास का मूल मंत्र “जन-जन साक्षर और कर्तव्य बोध” है। इसके माध्यम से 15 वर्ष से अधिक आयु के उन वयस्कों को सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है, जिन्होंने स्कूली शिक्षा प्राप्त नहीं की है।

